LAC पर भारतीय और चीनी सेना आमने-सामने, इस बार भारत ने किया पीछे नहीं हटने का फैसला

नई दिल्‍ली। एक तरफ जहां भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है तो वहीं चीन, लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर हालात को तनावपूर्ण बनाने से नहीं चूक रहा है। भारत और चीन के बीच लद्दाख में पिछले करीब दो हफ्तों से तनाव की स्थिति बनी हुई है। दोनों तरफ सैनिकों का भारी जमावड़ा है और भारत ने तय किया है कि वह टकराव में पीछे नहीं हटेगा। जून 2017 में डोकलाम में भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं।

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    काराकोरम पास तक भेजी गए सैनिक

    काराकोरम पास तक भेजी गए सैनिक

    भारत ने तय किया है कि लद्दाख में दौलत बेग ओल्‍डी के करीब स्थित पुल, काराकोरम पास पर आखिरी मिलिट्री पोस्‍ट के अलावा चीन को जवाब देने के लिए सेनाओं को रवाना कर दिया गया है। इंग्लिश डेली हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) और कुछ वरिष्‍ठ मंत्रियों, अ‍धिकारियों के साथ एक हाई'लेवल सिक्‍योरिटी मीटिंग की थी। इस मीटिंग में तय हुआ है कि चीन की तरफ से भले ही भारत को लगातार चुनौती दी जा रही हो मगर भारतीय सीमा में किसी भी तरह का बदलाव बर्दाश्‍त नहीं होगा।

    पूर्वी लद्दाख में मौजूद हजारों सैनिक

    पूर्वी लद्दाख में मौजूद हजारों सैनिक

    पीएम और डोवाल के अलावा इस मीटिंग के चीफ ऑफ डिफेंस स्‍टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत भी मौजूद थे। इस मीटिंग में एलएसी पर हालातों को लेकर विस्‍तार से चर्चा की गई है। पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील और गालवान घाटी में भारत और चीन के हजारों सैनिक मौजूद हैं। सीडीएस ने पीएम मोदी को मिलिट्री इनपुट्स के आधार पर अहम जानकारियां मुहैया कराईं। साथ ही उन्‍हें यह भी बताया कि लद्दाख में स्थिति से कैसे निबटा जा सकता है। सूत्रों की मानें तो सरकार, मिलिट्री और एजेंसियां इस बात पर अडिग हैं कि एलएसी पर यथास्थिति बरकरार रहनी चाहिए और इसमें किसी भी तरह के बदलाव मंजूरी नहीं होगा।

    हर बार चीन पैदा करता है मुश्किल

    हर बार चीन पैदा करता है मुश्किल

    रक्षा सूत्रों के मुताबिक इस तरह की स्थितियां पहले भी भारत के सामने आई हैं और पूरी ताकत से इसका सामना किया जाएगा। भारत और चीन के बीच जून 2017 में डोकलाम में 73 दिनों तक टकराव की स्थिति बनी हुई थी। सुरक्षा अधिकारियों की मानें तो इस समय चीन का सारा ध्‍यान डारबुक-श्‍योक-दौलत बेग ओल्‍डी रोड के निर्माण से भारत को रोकना है। इस सड़क के पूरा हो जाने के बाद सेनाओं को यहां तक आने में आसानी रहेगी और इसका बहुत बड़ा फायदा भारत को मिलेगा। चीन यहां पर एक पुल के निर्माण से भारत को रोकना चाहता है।

    सिक्किम में हालात सामान्य

    सिक्किम में हालात सामान्य

    सिक्किम में फिलहाल स्थिति सामान्‍य है और माना जा रहा है कि चीन ने लद्दाख में करीब 5,000 सैनिकों को रवाना कर दिया है। भारत ने भी तय किया है कि वह लद्दाख में सैनिकों की संख्‍या, क्षमताओं और संसाधनों में इजाफा करेगा। इस बीच विदेश मंत्रालय ने 22 मई को साफ कर दिया है कि सेना की जो भी गतिविधियां लद्दाख और सिक्किम में एलएसी पर हो रही हैं, वह भारतीय सीमा में हैं। विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि चीनी सेना ने एलएसी के दूसरी तरफ भारतीय सीमा में होने वाली गश्‍त में बाधा डाली थी।

    भारत और चीन के बीच 3500 किमी की LAC

    भारत और चीन के बीच 3500 किमी की LAC

    भारत और चीन के बीच करीब 3500 किलोमीटर लंबी एलएसी है और कई दशकों से यह तनाव का विषय बनी हुई है। अधिकारियों ने कहा है कि भारतीय सेना को एलएसी के बारे में पूरी जानकारी है। चीनी सेना की तरफ से पहले भी पेट्रोलिंग से रोकने की कोशिशें की गई हैं। लेकिन इस बार चीन की मंशा और इरादे वर्तमान स्थिति को लेकर स्‍पष्‍ट नहीं हैं। इसके बाद भी भारत की स्थिति साफ है और इंडियन आर्मी की तरफ से किसी भी तरह का कोई उल्‍लंघन नहीं किया गया है। वहीं यह भी स्‍पष्‍ट कर दिया गया है कि चीन के विरोध और टकराव के बाद भी भारत निर्माण कार्य बंद नहीं करेगा।

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