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India Chabahar Port: चाबहार पोर्ट पर बरसी मिसाइल तो भारत का कितना पैसा डूबेगा? रणनीतिक निवेश बना घाटे का सौदा!

India Chabahar Port: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारत पर भी पड़ रहा है। ईरान के रणनीतिक रूप से अहम चाबहार पोर्ट में भारत ने भारी निवेश किया है। हालिया तनाव के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है, तो भारत के अरबों के निवेश पर असर पड़ सकता है। हालांकि, मैरीटाइम गेटवे की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय स्वामित्व वाले शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को फिलहाल कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। वहां परिचालन सामान्य रूप से जारी है।

ईरान पर इजरायल और अमेरिका की बमबारी जारी है। आईडीएफ ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान पर एयर स्ट्राइक फिलहाल नहीं रुकेगी। ऐसे में अगर चाबहार पोर्ट को नुकसान पहुंचता है, तो भारत को निवेश में भारी नुकसान हो सकता है।

India Chabahar Port

India Chabahar Port: भारत के लिए 'गोल्डन गेट' है पोर्ट

- ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में मकरान तट पर स्थित चाबहार बंदरगाह ओमान की खाड़ी में पड़ता है। यह भारत के लिए मध्य एशिया तक पहुंच का 'स्वर्ण द्वार' माना जाता है।

- इस परियोजना में दो प्रमुख टर्मिनल-शाहिद कलंतरी और शाहिद बेहेश्ती शामिल हैं।

- इनमें से बेहेश्ती टर्मिनल का विकास भारत कर रहा है। चाबहार, अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) का अहम हिस्सा है। यह अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पाकिस्तान को बाईपास कर पहुंच बनाता है।

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Chabahar Port Facts: 10 साल का समझौता, 370 मिलियन डॉलर का निवेश

भारत और ईरान के बीच 2015 में समझौता हुआ था और दोनों पक्षों ने इस पर हस्ताक्षर किए थे। 2016 में भारत-ईरान-अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय समझौता हुआ था और इसके बाद इस पोर्ट में निवेश का आंकड़ा और बढ़ गया। 2018 में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) ने संचालन संभाला और मई 2024 में 10 वर्षीय करार के तहत शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को तैयार करने और संचालन करने की जिम्मेदारी ली थी। भारत अब तक इस बंदरगाह पर अनुदान और कर्ज की राशि मिलाकर 370 मिलियन डॉलर का निवेश कर चुका है।

इसमें से 120 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता बढ़ाई जा चुकी है और 250 मिलियन डॉलर के कर्ज के तौर पर देने का करार हुआ है। 2018 से अब तक 450 से अधिक जहाजों ने यहां से 1.34 लाख टीईयू कंटेनर आधारित और 87 लाख टन से अधिक थोक माल का संचालन किया है।

Chabahar Port भारत के लिए रणनीतिक संतुलन और जोखिम दोनों

डिफेंस एनालिस्ट लेफ्टिनेंट कर्नल (रि.) जेएस सोढ़ी ने एक मीडिया चैनल से बात करते हुए कहा कि चाबहार भारत की समुद्री और रणनीतिक पहुंच के लिए बेहद अहम है। उनका कहना है कि यदि संघर्ष के चलते पोर्ट को नुकसान होता है तो भारत का क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो सकता है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने हालिया इंटरव्यू में कहा कि भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा और वार्ता के जरिए अपने हितों की सुरक्षा करेगा। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच चाबहार की स्थिति भारत की विदेश नीति और समुद्री रणनीति के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा बन गई है।

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