I.N.D.I.A. की मुंबई बैठक में सीटों के बंटवारे और गठबंधन के चेहरे पर क्यों फंस सकता है पेच? जानिए
इंडिया गठबंधन में शामिल दलों के नेता अभी दो दिनों तक मुंबई में मैराथन बैठकें करेंगे। लेकिन, इस बैठक में सीटों के बंटवारे पर कोई फॉर्मूला निकल जाएगा या गठबंधन के किसी एक चेहरे पर कोई स्पष्ट मुहर लग जाएगी, इसकी संभावना नजर नहीं आ रही है। इसके कई कारण हैं।
इंडिया गठबंधन की गतिविधियों से जुड़े कुछ लोगों की मानें तो फिलहाल जो चर्चाएं होंगी, वह समन्वय समितियों और उसके संयोजकों और अध्यक्ष तक ही सीमित रहने की संभावना है। बाकी बड़े मसलों पर सभी बड़ी पार्टियां पांच राज्यों में होने वाले चुनावों तक इंतजार करना चाहेंगी।

बड़े मुद्दों पर टल सकती है चर्चा
गठबंधन के नेताओं के बीच की अनौपचारिक बातचीत से यही बातें निकलकर आ रही हैं कि इसमें शामिल कुछ दल विभिन्न राज्यों में एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक विरोधी हैं। इसलिए सीटों पर तालमेल जैसे बड़े फैसले पर सहमति इतनी आसान नहीं होने वाली। उदाहरण के लिए एनसीपी (शरद पवार) ने हरियाणा और राजस्थान में भी अपने लिए सीटों की दावेदारी शुरू कर दी है।
पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों का रह सकता है इंतजार
इसलिए गठबंधन की बड़ी पार्टियां मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना और मिजोरम विधानसभा के लिए नवंबर-दिसंबर में होने वाले चुनाव परिणामों के इंतजार में हैं। इससे उन्हें 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए देश का मूड भांपने का मौका मिलेगा। सीटों के बंटवारे के लिए यह बहुत ही बड़ा आधार का काम कर सकता है।
कांग्रेस के नजरिए से देखें तो...
मसलन कांग्रेस को ही लेते हैं। पार्टी अभी कर्नाटक में जीती है तो उसका मनोबल सातवें आसमान पर पहुंचा हुआ है। राहुल गांधी को वह अघोषित तौर पर विपक्ष के सबसे प्रमुख चेहरे के तौर पर पेश कर रही है। अगर पांच राज्यों में पार्टी दो से तीन भी हो गई तो इंडिया ब्लॉक में उसकी दावेदारी और भी मजबूत हो जाएगी।
कांग्रेस के इन प्रदर्शनों पर कुछ राज्यों में उसके उन विरोधियों की भी नजर है, जो इंडिया गठबंधन में बीजेपी के विरोध में एक मंच पर उतरा आए हैं। अगर किसी वजह से कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिरा तो फिर इंडिया गठबंधन को लोकसभा चुनावों में लीड करने का या राहुल गांधी को ही पीएम उम्मीदवार की तरह पेश करने का उसका सपना चकनाचूर हो सकता है।
इंडिया गठबंधन की ओर से तैयार किया जा सकता है माहौल
यानी जब तक पांच राज्यों के रिजल्ट नहीं आ जाते, इंडिया गठबंधन में कोई बहुत बड़ा फैसला होगा, इसकी संभावना फिलहाल नहीं दिख रही है। तब तक ये पार्टियां अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर सकती हैं। देश में भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने में एक-दूसरे का साथ दे सकती हैं, ताकि वोटरों के मन में बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए बनाम इंडिया का मुद्दा पूरी तरह से सेट हो जाए।
गठबंधन को गतिशील बनाए रखने की हो सकती है कोशिश
इंडिया गठबंधन के नेताओं के बीच जो अनोपचारिक बताचीत चल रही है, उसमें शामिल एक विपक्षी नेता ने कहा है, 'क्योंकि मुंबई में हमारी बैठक बेंगलुरु में हुई बातचीत के लगभग डेढ़ महीने बाद हो रही है, इसलिए आगे के लिए अपनी गतिशीलता दिखाना जरूरी है। आदर्श रूप में देखें तो मुंबई में हमें गठबंधन के लिए एक अध्यक्ष और संयोजक का चुनाव करना चाहिए.... लेकिन अगर हम ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो निश्चित रूप से हमें भविष्य में समन्वय और सचिवालय कार्यों के लिए कुछ समितियों और उप-समूहों की घोषणा करनी चाहिए। ज्यादा गंभीर मुद्दे आगे की बैठकों में उठाए जा सकते हैं, शायद अगली बैठक में....'
कांग्रेस की दुविधा
कांग्रेस की दुविधा भी अजीब है। उसे प्रदेश इकाइयों से आम आदमी पार्टी की योजनाओं के चलते अंदरूनी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में जब यह पार्टी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है। कांग्रेस आलाकमान को गठबंधन के नेताओं के बीच यह बात रखने का मौका मिल सकता है।
यह ऐसे मुद्दे हैं, जिसका हल निकालना इंडिया गठबंधन के नेताओं के लिए आसान नहीं होने वाला। क्योंकि, आम आदमी पार्टी तो यही पक्ष रखेगी कि राजनीतिक रूप से विस्तार करना उसका अधिकार है। कर्नाटक विधानसभा में भी एनसीपी ने अपने उम्मीदवार उतारे थे। ऐसे में कांग्रेस के सामने सवाल होगा कि क्या वह आम आदमी पार्टी के साथ इन तीनों राज्यों में विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन के लिए तैयार हो सकती है? क्योंकि, इन तीनों राज्यों में अभी तक सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस ही आमने-सामने रही हैं।
इंडिया गठबंधन के अंदर ऐसी अनेकों चुनौतियां हैं। इसलिए तीसरी ही बैठक में इसमें शामिल दल अपने सारे मतभेद भुलाकर सीटों के बंटवारे और गठबंधन का सर्व प्रमुख चेहरा तय कर लेंगे यह फिलहाल दूर की कौड़ी लगती है। खासकर तब जब आरजेडी के तेजस्वी यादव और मुस्लिम लीग जैसी कुछ पार्टियों की ओर से ही पीएम उम्मीदवारी पर दावेदारी किया जाना बाकी रह गया है।












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