भारत की वायु रक्षा प्रणाली होगी और मजबूत, जनवरी-फरवरी में रूस भेजेगा S-400 का तीसरा स्क्वाड्रन
S-400 air defense system का तीसरा स्क्वाड्रन जनवरी-फरवरी में भारत आ सकता है। इसको लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बस वित्तीय लेन-देन का मामला फंस रहा है।

चीन के साथ भारत का विवाद लगातार जारी है। जिस वजह से तीनों सेनाएं अपने आप को हाईटेक करने के लिए पूरा जोर लगा रहीं। भारत ने अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए रूस के साथ S-400 सिस्टम का समझौता किया था। इसके दो स्क्वाड्रन तो आ गए हैं, जबकि तीसरा जनवरी-फरवरी में डिलीवर हो जाएगा। भारत और रूस के अधिकारी लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। इस बीच रूस भारत को S-400 के तीसरे स्क्वाड्रन की डिलीवरी करने को तैयार है। सब कुछ सही रहा तो अगले साल की शुरुआत यानी जनवरी-फरवरी में ये भारत आ जाएगा। हाल ही में भारतीय दल जिसमें वायुसेना के अधिकारी और जवान भी शामिल हैं, वो रूस गए थे। सूत्रों ने आगे कहा कि आपूर्ति के लिए सारी प्रक्रियाएं करीब-करीब पूरी कर ली गई हैं, बस वित्तीय लेन-देन का मामला फंस रहा, क्योंकि रूस पर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगे हैं। भारतीय अधिकारी इस दिशा में काम कर रहे हैं।
अभी भारत के पास S-400 के दो सक्रिय स्क्वाड्रन हैं। इसे पश्चिम बंगाल और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में संवेदनशील चिकन नेक कॉरिडोर के साथ-साथ लद्दाख सेक्टर की देखरेख में लगाया गया है। अभी तीन अन्य (कुल पांच) स्क्वाड्रन आने बाकी हैं। इसके लिए दोनों देशों के बीच 35 हजार करोड़ रुपये का समझौता हुआ था। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले वित्तीय वर्ष के अंत तक ये सौदा पूरा कर लिया जाएगा।
चीन की टेंशन बढ़ी
चीन के पास पहले ही मजबूत वायु रक्षा प्रणाली थी, लेकिन भारत इस मामले में कमजोर पड़ रहा था। अब S-400 के आने के बाद भारत की स्थिति एलएसी पर मजबूत हो गई है। इस वजह से चीन टेंशन में है। अगर अब उसके किसी विमान ने हवाई सीमा का उल्लंघन करने की कोशिश की तो ये सिस्टम उसे माकूल जवाब देगा।












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