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August Kranti Day: 9 अगस्त क्यों बना आजादी की जंग का टर्निंग प्वाइंट, पढ़िए अगस्त क्रांति की ये कहानी

August Kranti Day: 9 अगस्त 2025 को भारत एक बार फिर से उस ऐतिहासिक दिन को याद कर रहा है जब स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक मोड़ आया था। यह वही दिन है जब साल 1942 में महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा देते हुए 'भारत छोड़ो आंदोलन' की शुरुआत की थी।

8 अगस्त को कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित किया और 9 अगस्त से ये आंदोलन शुरू हुआ। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन को नींव हिलाकर रख दिया था। यही कारण है कि हर साल 9 अगस्त को 'अगस्त क्रांति दिवस'(August Kranti) के रूप में मनाया जाता है।

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साल 1942 में भारत में अंग्रेजों के खिलाफ असंतोष चरम पर था। जुलाई में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें ब्रिटिश हुकूमत से तत्काल भारत छोड़ने की मांग की गई थी। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो देशभर में नागरिक अवज्ञा आंदोलन चलाने की चेतावनी दी गई।

7 अगस्त 1942 की शाम, बॉम्बे (अब मुंबई) में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई, और तय किया गया कि अगले दिन एक ऐतिहासिक जनसभा गोवालिया टैंक मैदान (अब अगस्त क्रांति मैदान) में होगी।

Gandhi Quit India speech: जब गांधी ने कहा, 'अंग्रेजों भारत छोड़ो'

8 अगस्त 1942 को शाम 6 बजे से रात 10 बजे तक कई स्वतंत्रता सेनानियों ने भाषण दिए। मौलाना अबुल कलाम आज़ाद ने सभा का आगाज़ किया। इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल ने जनसभा को संबोधित किया। अंत में महात्मा गांधी ने मंच संभाला और वही ऐतिहासिक शब्द बोले, "करो या मरो", और फिर पूरे जोश से कहा - "भारत छोड़ो!"

इसी दिन स्वतंत्रता आंदोलन की 'ग्रैंड ओल्ड लेडी' कही जाने वाली अरुणा आसफ़ अली ने भारतीय ध्वज फहराया। 'भारत छोड़ो' (Quit India) आंदोलन के इस नाम को लेकर भी बहस हुई थी। महात्मा गांधी ऐसा नाम चाहते थे जो हर भारतीय के दिल में उतर जाए। अंततः महान क्रांतिकारी यूसुफ मेहरअली ने भारत छोड़ो इंजिया को जन्म दिया जिसे गांधी जी ने जोश के साथ नारा दिया। ये वही यूसुफ थे जिन्होंने "साइमन वापस जाओ" का नारा भी दिया था।

August Kranti Day: ब्रिटिश हुकूमत का दमन: हजारों गिरफ्तार

9 अगस्त की सुबह ब्रिटिश सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुई जिसमें महात्मा गांधी, नेहरू, पटेल, और कांग्रेस के अन्य शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया। साल के अंत तक 60,000 से अधिक लोग जेलों में बंद कर दिए गए। जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हुए, हिंसा भड़की, और सैकड़ों लोग शहीद हुए।

इस आंदोलन में सिर्फ नेता ही नहीं, आम जनता, महिलाएं, छात्र, किसान और मजदूर भी खुलकर शामिल हुए। असम में कुशल कोंवर और कनकलता बरुआ जैसे नौजवानों ने शहादत दी। जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया जैसे नेता भूमिगत हो गए और आंदोलन का नेतृत्व करते रहे।

ब्रिटिश सरकार के क्रिप्स मिशन की असफलता

भारत छोड़ो आंदोलन के पीछे एक प्रमुख कारण था क्रिप्स मिशन की विफलता। ब्रिटिश सरकार केवल डोमिनियन स्टेटस देना चाहती थी - यानी आधिपत्य स्वीकारते हुए सीमित स्वशासन। कांग्रेस को यह प्रस्ताव मंज़ूर नहीं था। दूसरा कारण था - भारतीयों को जबरन दूसरे विश्व युद्ध में भेजा जाना, जिसके खिलाफ जनआक्रोश था।

आंदोलन के बाद ब्रिटिश शासन को यह स्पष्ट हो गया कि भारत में अब उनकी सत्ता कायम नहीं रह सकती। स्वतंत्रता संग्राम में एक जनजागृति पैदा हुई, जो 1947 में मिली आज़ादी की नींव बनी। महिलाओं, छात्रों, ग्रामीणों की भागीदारी ने इसे अभूतपूर्व जन आंदोलन बना दिया।

आज़ादी की चेतना का प्रतीक

भारत छोड़ो आंदोलन एक ऐसा ऐतिहासिक क्षण था जब संपूर्ण भारत एकजुट होकर स्वतंत्रता की मांग पर अड़ गया। गांधीजी का "करो या मरो" आज भी हमें ये सिखाता है कि जब बात देश की हो, तब समर्पण, साहस और एकता ही जीत दिलाते हैं।आज के इस अगस्त क्रांति दिवस पर हमें उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों को याद करना चाहिए, जिनके बलिदान से हमें आज़ादी मिली।

"आज़ादी एक उपहार नहीं, एक तपस्या का परिणाम है - आइए इस स्वतंत्रता दिवस पर हम उसे सहेजें और संजोएं।

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