Chunauti Abhi Bhi: आजादी के 76 साल बाद भी आतंकवाद से जंग लड़ रहा भारत, आतंकियों का नया ठिकाना जम्मू
Terrorism in India: 15 अगस्त 2024 को आजाद भारत 77 साल का हो जाएगा। 1947 में अंग्रेजों की 200 साल पुरानी दास्तान-ए-जुर्म खत्म होने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि अब हिन्दुस्तान तरक्की की राह पर तेजी से आगे बढ़ेगा। दुनिया के विकसित देशों की सूची में भारत का नाम भी शामिल होगा, मगर सात दशक बाद भी ऐसा नहीं हुआ है।
स्वतंत्रता दिवस 2024 के मौके पर वन इंडिया हिंदी 'चुनौती अभी भी' (Chunauti Abhi Bhi) अभियान शुरू कर रहा है। अभियान में उन समस्याओं का जिक्र किया जाएगा, जिनसे जवाहर लाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी का भारत भी जूझ रहा है, मगर अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। अभियान की पहली कड़ी में चर्चा सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद की।

भारत में आतंकवाद की शुरुआत
भारत को आजादी मिलने के अगले ही साल 1948 में पाक ने जम्मू कश्मीर में कबायलियों की फौज भेज कर अपने नापाक मंसूबे जाहिर कर दिए थे। 1960-1970 का दशक आते-आते तो भारत में बॉर्डर पार से आतंकवाद का मर्ज और बढ़ गया। भारत-पाकिस्तान के बीच जंग तक हुई, मगर आतंकवाद खत्म नहीं हुआ। साल 1987 में आतंकवादी और विघटनकारी कार्यकलाप (निवारण) अधिनियम (टाडा) भारत में ऐसा पहला विशेष कानून बना था, जिसने आतंकवाद का परिभाषित किया। फिर साल 2002 में आतंकवाद निवारण अधिनियम (पोटा) कानून आया।
भारत में बड़े आतंकी हमले
- पुलवामा हमला: 14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में के दिन सीआरपीएफ काफिले पर आतंकवादी हमला। 40 जवान शहीद हुए थे।
- मुम्बई हमला: 12 मार्च 1993 को मुम्बई पहली बार सीरियल बम ब्लास्ट हुए। अलग-अलग जगहों पर हुए 12 धमाको से मुम्बई दहल उठी थी। 257 लोगों की जान गई। 700 से ज्यादा घायल हुए।
- कोयम्बटूर हमला: 14 फरवरी 1998 को कोयम्बटूर में 11 अलग-अलग जगहों पर 12 बम धमाके हुए। 200 से ज्यादा लोग घायल हुए और 60 लोगों ने जान गंवाई।
- विधानसभा हमला: 1 अक्टूब 2001 को जम्मू कश्मीर विधानसभा पर हमला हुआ है, जिसमें 38 लोग मारे गए।
- संसद हमला: आतंकी हमले से भारतीय संसद भी नहीं बच पाया। 13 दिसंबर 2001 को दिल्ली में भारत के संसद भवन पर आतंकियों ने हमला किया। 6 पुलिसकर्मी और 3 कर्मचारी शहीद हुए।
- दिल्ली बम ब्लास्ट: 29 अक्टूबर 2005 को दीपावली के मौके पर दिल्ली में सीरियर बम धमाके हुए। यह आतंकी हमला दिल्ली के सरोजनी नगर व पहाड़गंज में हुआ था।
- मुंबई ट्रेन ब्लास्ट: साल 2006 में मुम्बई की लाइफ लाइन लोकल ट्रेनों में 7 बम धमाके हुए। इन हमलों में 210 लोग मारे गए और 700 घायल हुए।
- जयपुर बम ब्लास्ट: 13 मई 2008 की शाम को राजस्थान की राजधानी जयपुर में 15 मिनट में 9 बम धमाके हुए, जिनमें 63 लोगों की जान गई। 200 से ज्यादा घायल हुए।
- गुवाहाटी बम ब्लास्ट: 30 अक्टूबर 2008 का असम की राजधानी गुवाहाटी में कई जगह बम धमाके हुए। कुल 81 लोगों की मौत हुई और 470 लोग घायल हुए।
- मुम्बई आतंकी हमला: 26 नवंबर 2008 को मुम्बई में बड़ा आतंकी हमला हुआ। पाकिस्तान के अजमल कसाब और उसके साथ आतंकी समुद्र के रास्ते मुम्बई में घुसे। आतंकियों ने उस हमले में 18 सुरक्षाकर्मियों और 166 लोगों की जान ले ली।
- पठानकोट आंतकी हमला: 2 जनवरी 2006 को पंजाब के पठानकोट स्थित भारतीय वायुसेना के स्टेशन पर आतंकियों ने हमला किया। आतंकियों व भारतीय जवानों के बीच चार दिन तक एनकाउंटर चला। 4 आतंकी मार गिराए गए और 7 जवान शहीद हुए।

साल 2024 में आतंकियों ने जम्मू में जमाए पैर
भारत में जम्मू कश्मीर आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित जगह है। 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने के बाद से घाटी में शांति है।
कश्मीर में तो आतंकवाद लगभग खत्म हो गया, मगर आतंकियों ने वर्षों से शांत जम्मू में पैर पसार लिए। साल 2024 में तो स्थिति यह रही कि महज 86 दिन में अकेले जम्मू संभाग में विभिन्न जगहों पर 10 आतंकी हमले हुए, जिनमें 12 सुरक्षाकर्मी और 10 आम लोगों की जान गई।
जम्मू में 86 दिन कहां-कहां आतंकी हमले
22 अप्रैल: राजौरी में सरकारी कर्मचारी को गोली मारी।
28 अप्रैल: उधमपुर में विलेज गार्ड की हत्या। आतंकी फरार।
4 मई: पुंछ में वायुसेना जवान शहीद। पांच घायल। आतंकी फरार।
9 जून: रायसी में श्रद्धालुओं की बस पर आतंकी हमला। 9 की मौत।
11 जून: कठुआ में एनकाउंटर में दो आतंकी मार गिराए गए। जवान शहीद।
12 जून: डोडा में हमला। पुलिस जवान घायल। आतंकी फरार।
26 जून: डोडा में बड़ी मुठभेड़ में 3 विदेशी आतंकी मार गिराए गए।
7 जुलाई: राजौरी में सुरक्षा पोस्ट पर फायरिंग। आतंकी भाग गए।
8 जुलाई: कठुआ में सेना पर आतंकी हमला। पांच जवान शहीद। आतंकी फरार हो गए।
15 जुलाई: डोडा में जवानों पर आतंकी हमला। कैप्टन समेत चार जवान शहीद।

जम्मू में क्यों बढ़ गए आतंकी हमले?
जम्मू संभाग में इस साल आतंकी हमले अचानक बढ़े हैं। भारतीय सुरक्षा बलों ने जम्मू से आतंकियों के 25 स्थानीय मददगारों को भी पकड़ा। 'मददगारों' से पूछताछ में पता चला कि आतंकियों ने जम्मू संभाग के 10 में से 9 जिलों में पैर जमा लिए।
जम्मू रीजन में आतंकी हमले बढ़ने की वजह यह भी मानी जा रही है कि साल 2020 में जम्मू रीजन में काफी सुरक्षा बल तैनात था, मगर लेकिन गलवान हिंसक झड़प के बाद चीन की आक्रामकता का जवाब देने के लिए जम्मू से भारतीय सेना को हटाकर लद्दाख भेज दिया गया था।
जम्मू से सेना हटाने के भारत के कदम को आतंकियों ने मौके के रूप में लिया और आतंक अपना अड्डा कश्मीर से जम्मू से शिफ्ट कर दिया। पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा का 20 साल पुराना लोकल नेटवर्क जम्मू रीजन में पहले से ही मौजूद था। उसे सिर्फ एक्टिव करना था, जो आतंकियों ने बखूबी कर लिया। यही वजह है कि जम्मू आतंकियों का नया ठिकाना बन गया।












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