डिजिटल युग में स्वतंत्रता दिवस: टेक्नोलॉजी कैसे बदल रही है आजादी के उत्सव का स्वरूप
Independence Day 2024: भारत ने जब डिजिटल इंडिया अभियान की शुरुआत की थी तो किसी ने अनुमान नहीं लगाया था कि देश में इतनी तेजी से डिजिटल बदलाव देखने को मिलेगा। आज टेक्नोलॉजी आधारित डिजिटलाइजेशन हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित कर रहा है और आजादी का उत्सव भी इससे अछूता नहीं है।
डिजिटल इंडिया का हमारा अभियान सफल रहा है और आज हम 5जी के युग में जी रहे हैं। देश में गांव-गांव तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाया जा रहा है, जिससे हम सूचना क्रांति के गवाह बने हैं। स्वतंत्रता दिवस के दन दिल्ली के लाल किले पर देश में सबसे प्रमुख कार्यक्रम आयोजित होता है, जिसकी प्राचीर से प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन आजादी के महापर्व का महान उत्सव बन चुका है।

आजादी के उत्सव पर टेक्नोलॉजी का प्रभाव
टेक्नोलॉजी की मदद से देश की अधिकतर आबादी आज विभिन्न माध्यमों से प्रधानमंत्री का यह कार्यक्रम देख और सुन सकते हैं। यह संबोधन मात्र राजनीतिक भाषण नहीं होता। यह आने वाले वर्षों में देश किस दिशा में बढ़ने जा रहा है, इसका एक पैमाना भी होता है। इससे देश की जनता को सरकार की मूल नीतियां भी मालूम पड़ती हैं।
देश की अधिकांश जतना तक टेक्नोलॉजी की पहुंच
पिछले महीने ही संसद में सरकार की ओर से जो आंकड़े दिए गए हैं, उसके अनुसार देश में 120 करोड़ मोबाइल फोन डिवाइस इस्तेमाल में हैं और करीब 80% जनता का इस तक पहुंच है। मतलब, अब लाल किले पर आयोजित कार्यक्रम को देखने के लिए लिए मात्र टीवी सेट पर ही निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, खेत में खेती कर रहा किसान भी मोबाइल के माध्यम से आजादी के इस महान उत्सव का गवाह बन सकता है।
पिछले स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'आज दुनिया टेक्नोलॉजी से प्रेरित है और आने वाला युग भी टेक्नोलॉजी से प्रभावित रहने वाला है।' प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल इंडिया का लाभ गांव-गांव तक पहुंचने का सपना देखा है।
मुख्य समारोह के लिए लाइव स्ट्रीमिंग का इंतजाम
इस बार भी लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण किया जाना है। इसके अलावा मुख्य समारोह की लाइव स्ट्रीमिंग का भी इंतजाम किया गया है। जो लोग भी मोबाइल फोन या अन्य डिजिटल डिवाइस पर इस समारोह को देखना चाहते हैं, वे पीआईबी के यूट्यूब चैनल और इसके अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे कि @PIB_India या @PMOIndia के एक्स (ट्विटर) हैंडल पर इसका सीधा प्रसारण देख सकते हैं।
LED डिजिटल वीडियोवॉल पर भी देख सकते हैं समारोह
जो लोग स्वतंत्रता दिवस के मुख्य कार्यक्रम को बिल्कुल लाल किले पर मौजूदगी वाले अंदाज में देखना चाहते हैं, उनके लिए कुछ जगहों पर LED डिजिटल वीडियोवॉल का भी इंतजाम किया जा रहा है। आज से कुछ वर्ष पहले इसकी कल्पना तक नहीं की जा सकती थी। इसके माध्यम से लोग बेहतर रिजॉल्यूशन वाले साफ वीडियो और बेहतरीन आवाज का भी आनंद ले सकते हैं।
डिजिटली समावेशी भारत का स्वरूप बना रहा है टेक्नोलॉजी
LED टेक्नोलॉजी के आने से देखने का अनुभव ही बदल चुका है और लोग देश या दुनिया के किसी कोने भी बैठे हों, उन्हें ऐसा महसूस होता है कि वह उसी स्थान पर ही बैठे हैं, जहां यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। एक तरह से टेक्नोलॉजी डिजिटली समावेशी भारत का स्वरूप तैयार करने में मदद कर रही है।
टेक्नोलॉजी ने बदल दिया लाल किले का सुरक्षा इंतजाम
हम जिस दशक में चल रहे हैं, उसमें भारत को सुपरपावर बनाने की क्षमता है और अगर यह संभव होता है तो इसमें टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा योगदान रहने वाला है। आज टेक्नोलॉजी सिर्फ सूचना-प्रसारण को ही आसान नहीं बना रही है, बल्कि इसने सिक्योरिटी सिस्टम की भी तस्वीर बदल दी है।
15 अगस्त पर लाल किले पर आयोजित होने वाला कार्यक्रम सुरक्षा के लिहाज से सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर आयोजित कार्यक्रम भी इस नजरिए से बहुत अहम है, लेकिन उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी सशस्त्र सेना खुद अपने हाथों में रखती है। लेकिन, 15 अगस्त के कार्यक्रम में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी अधिक रहती है।
लाल किले पर सुरक्षा इंतजाम में AI की मदद
एएनआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस बार जो लाल किले पर कार्यक्रम आयोजित हो रहा है, उसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सुरक्षा व्यवस्था (AI-powered security systems) से निगरानी का इंतजाम किया गया है।
इसके तहत बताया जा रहा है कि लाल किले के आसपास महत्वपूर्ण जगहों पर जो सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, वे वीडियो एनालिटिक्स तकनीक से लैस हैं। इन तकनीकों में वाहनों के नंबर प्लेट की पहचान, फेस डिटेक्शन, लोगों की गतिविधियों की निगरानी, आवाज की पहचान,अवांछित तत्वों की पहचान, लावारिस और गुम हुई चीजों का पता लगाने वाली तकनीक शामिल हैं।
एक अधिकारी के मुताबिक,'हम एआई वाले कैमरों का भी इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि परिसर में आने-जाने वाले लोगों की गिनती हो सके। भीड़ का अनुमान एआई के जरिए लगाया जाएगा।' इससे अलार्म-सिस्टम भी जुड़ा रहेगा, ताकि उसी खास जगह की छानबीन की जा सके, जहां किसी तरह के संदेह की आशंका है।
मतलब, अगर सुरक्षा की चुनौतियां बढ़ी हैं तो तकनीक ने उनका सामना करने के लिए भी हमें तैयार कर दिया है; और इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि यह टेक्नोलॉजी हमें देश के सबसे बड़े महापर्व में सहयोग दे रही है।
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