Independence Day 2023: क्या है 'ध्वजारोहण' और 'झंडा फहराने' में अंतर?
Flag Hoisting and Flag Unfurling: भारत पूरे जोश के साथ 77वां 'स्वतंत्रता दिवस' मनाने जा रहा है। क्या बच्चे और क्या बूढ़े सभी का उत्साह देखते ही बन रहा है। लाल किले के प्राचीर से मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ध्वजारोहण के बाद जनता को संबोधित भी करेंगे लेकिन क्या आप जानते हैं कि 'गणतंत्र दिवस' और 'स्वतंत्रता दिवस' पर झंडा फहराने का अलग-अलग नियम होता है और दोनों ही राष्ट्रीय पर्व हमें अलग-अलग संदेश देते हैं।

आपको बता दें कि देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था और अंग्रेजों ने तब अपना झंडा उतारकर भारतीय तिरंगे को ऊपर चढ़ाया था इसलिए 15 अगस्त को झंडा नीचे से ऊपर की ओर ले जाते हुए फहराया जाता है, जिसे कि 'ध्वजारोहण' या Flag Hoisting कहा जाता है तो वहीं 'गणतंत्र दिवस' पर पहले से बंधे ध्वज को फहराते हैं, जिसे कि 'झंडा फहराना' या 'Flag Unfurling के नाम से जानते हैं।
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति फहराते हैं झंडा
स्वतंत्रता दिवस पर 'ध्वजारोहण' देश के प्रधानमंत्री करते हैं जबकि 26 जनवरी के मौके पर राजपथ (अब कर्तव्यपथ) पर देश के राष्ट्रपति झंडा फहराते हैं। पीएम लाल किले पर ध्वजारोहण के बाद देश को संबोधित भी करते हैं।
भारत को पूर्ण गणराज्य होने का गौरव मिला था
मालूम हो कि गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को मनाया जाता है क्योंकि इस दिन हम गणराज्य घोषित हुए थे। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही भारत को पूर्ण गणराज्य होने का गौरव मिला था।
तिरंगे मे मौजूद तीनों रंग का खास महत्व है
जहां 'ध्वजारोहण' किसी देश के नए जन्म का प्रतीक है, वहीं 'झंडा फहराना' किसी राष्ट्र का स्वतंत्ररूप में विचरण करने और प्रगति पथ पर आगे बढ़ने का प्रमाण है। दोनों ही राष्ट्रीय पर्व हमें अपने देश के गौरवशाली इतिहास के बारे में बताते हैं। ये आजादी बहुतों के बलिदान के बाद हमें मिली है तो वहीं 'तिरंगे' में मौजूद तीनों रंग (केसरिया, सफेद और हरा) हमें बहुत सारे संदेश देते हैं।
ध्वज में मौजूद चक्र धर्म चक्र कहलाता है
राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग देश की शक्ति को बताता है तो वहीं सफेद रंग शांति और सत्य का मानक है तो वहीं हरा रंग समृद्धि और हमारी मिट्टी की पवित्रता को बताता है तो वहीं ध्वज में मौजूद चक्र 'धर्म चक्र' कहलाता है।
24 तीलियां समय को व्यक्त करती हैं
जो कि तृतीय शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ की लाट से लिया गया है। इस चक्र में 24 तीलियां समय को व्यक्त करती हैं, जो किसी के लिए नहीं रूकता और जिस दिन ये रूक जाता है उस वक्त इंसान का जीवन रूक जाता है यानी कि मृत्यु हो जाती है।
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