देखिए आजादी के दस अटल सत्य, जिसने भारत का मस्तक सदैव ऊंचा रखा है...

यही वजह है की यहां वीरों ने न कभी पीछे हटना सीखा है और न रुदन से कांपना। भारतीय सेना का शौर्य किसी को बताना नहीं पड़ता। दुश्मन के दिल में अगर खौफ है तो ये भारतीय वीरों का पराकर्म ही है।

नोएडा। भारत की आजादी को 70 साल पूरे हुए हैं और याद आती है शहीदों की वो शहादत जिस पर हर भारतीय को गर्व है, याद आते हैं भारतीय संस्कृती के सब रंग जिसने धर्म से लेकर त्योहारों तक विश्व को भारतीय दर्शन करने पर मजबूर किया है, जन-गण-मन से लेकर अतिथि देवो भवो: तक की वो मर्यादाएं जिसका भारत ने विश्व पटल पर प्रतिनिधित्व किया है।

देखिए आजादी के दस अटल सत्य, जिसने भारत का मस्तक सदैव ऊंचा रखा है...

सदा याद रखी जाने वाली वीरगाथाएं हों या मस्तक ऊंचा करने वाले छंद, भारतीय दर्शन को धर्म से जीने की कला हो या फिर वीर रस से भरता भारतीय दस्तावेज, वो सब आजादी के परवाने हैं जिन्हें जिन्दा कर देती है साल की हर ये 15 तारीख। इतिहास में ढूढंने निकले तो भारत की योग्यता पर किसी को शक नहीं हो सकता है, यहां वीरों ने जन्म लिया है, यहां मर्यादाओं ने जन्म लिया है और निरंतर जन्म लेती ये संस्कृति अपने मस्तक को सदा उठाए रखना जानती है। भारत के महान कवि और श्रेष्ठ राजनीतिज्ञ श्री अटल विहारी बाजपेयी की वो पंक्तियां आज पूरी तरह भारतीय गौरव को चरितार्थ करती है...

यही वजह है की यहां वीरों ने न कभी पीछे हटना सीखा है और न रुदन से कांपना। भारतीय सेना का शौर्य किसी को बताना नहीं पड़ता। आज पड़ोसी मुल्कों को मिल रही तीसरी ताकतों का पहले ही भारत जवाब दे चुका है। आपसी समझौतों से बेशक दुश्मन देश कुछ आंख तरेर लें लेकिन भारत का जवाब कितना मुंहतोड़ हो सकता है ये वीडियो ये बताने के लिए काफी है...

ऐसा नहीं है कि भारतीयों ने अपनी आजादी को दिल पर पत्थर रखकर मनाया हो, यहां मां अपने बच्चे पर गर्व करती है, पत्नियों को अपने शहीद पति पर गर्व होता है, बच्चों अपने बहादुर पिता की कहानी सुनकर बड़े होते हैं और तो और बूढ़ा बाप इस मोक्ष को लेकर मरता है कि उसने जिसे जन्म दिया उसने भारत मां की इज्जत पर आंच न आने दी...

देश की निगेबाह आंखे दिन-रात इस चौकसी में लगी रहती हैं कि भारतीय सीमा पर कोई खतरा तो नहीं। वो ये कोई नौकरी नहीं जिसे सेना का जवान दिल भारी करके करता हो। यहां कि एक-एक दुश्मन पर हमारे वीर योद्धा 100 के बराबर भारी पड़ते हैं। कदम मिलकर चलने वाले देश के इन लालों के किस्से कम नहीं हैं, चाहे तो कारगिर शहीद विक्रम बत्रा हों या फिर मुंबई बचाते हुए शहीद हुए हेमंद करकरे...

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