'मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों से HIV नहीं', जानिए ICMR साइंटिस्ट ने क्यों किया ये दावा?
नई दिल्ली, 22 अगस्त। आआईसीएमआर के एक वरिष्ठ साइंटिस्ट ने दावा किया है कि स्पाइक से एचआईवी नहीं होगा। मंकीपाक्स रोगियों की क्षमता और सीरोलाजिकल निगरानी विषय पर एक महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। हालांकि इसकी जांच के लिए एलिसा परख विकसित करने की बात कही गई है। वहीं मंकीपॉक्स को लेकर एम्स के चिकित्सकों एक अलग दावा किया। जिसमें कहा गया कि मंकीपाक्स के मामले समलैगिंग पुरुषों में आ रहे हैं। वहीं अब आईसीएमआर की रिपोर्ट ने वायरस को लेकर बड़ी बात कही है।

मंकीपाक्स वायरस के फैलने के तौर तरीके कुछ अलग हैं। वहीं न्यूज एजेंसी एनएनआई के एक इंटरव्यू में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (ICMR-NIV) की एक शीर्ष वैज्ञानिक डॉ प्रज्ञा यादव ने सोमवार को कहा कि चेचक का टीकाकरण मंकीपॉक्स को रोकने में 86 प्रतिशत प्रभावी है। केरल में मंकीपॉक्स से संबंधित मृत्यु दर की पहली घटना पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि मौतों के मामले में एन्सेफलाइटिस के लिए अन्य एटियलजि की खोज नहीं की गई थी और रोगी को पहले से ही बीमारी होने की पुष्टि की गई थी। इसलिए मौतों का एक कारण मंकीपॉक्स की संभावना भी हो सकती है।
मंकीपॉक्स से एचआईवी नहीं
आईसीएमआर-एनआईवी, पुणे की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ प्रज्ञा यादव ने कहा, 'मंकीपॉक्स के मामलों में स्पाइक से एचआईवी नहीं होगा। मंकीपॉक्स रोगियों की क्षमता और सीरोलॉजिकल निगरानी के महत्व पर चर्चा करते हुए डॉ यादव ने कहा, 'मंकीपॉक्स के मामले छुआछूत से हो सकते हैं। इसके अध्ययन के लिए वर्तमान में एक एलिसा परख विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि मंकीपॉक्स के बढ़ते मामलों से एचआईवी नहीं होगा।
मंकीपॉक्स को लेकर ICMR के दावा का आधार
डॉ प्रज्ञा यादव ने कहा कि चेचक का टीकाकरण मंकीपॉक्स को रोकने में 86 प्रतिशत प्रभावी है। ऐसे में ये एचआईवी संक्रमण से अलग है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) भी प्रयोगशालाओं के अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है। आईसीएमआर क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयोगशाला नेटवर्क का विस्तार कर रहा है। हम आईसीएमआर द्वारा जारी रुचि की अभिव्यक्ति के अनुसार सीरोलॉजिकल एसेज विकसित करने और वैक्सीन की दिशा में काम कर रहे हैं।












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