और आरोपों के बम फोड़ने केजरीवाल ने शुरू किए

नई दिल्ली (विवेक शुक्ला) बिना प्रमाणों के किसी पर भी आरोप लगाने में अपने अरविंद केजरीवाल का कोई जवाब नहीं है। दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा होते ही उन्होंने यह आरोप लगा दिया है कि दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वालीं कंपनियों और भाजपा के प्रदेश नेताओं के बीच कारोबारी रिश्ते व सांठगांठ है।

In election time, Kejriwal is making wild allegations against two BJP leaders

भाजपा नेताओं की हिस्सेदारी

अरविन्द का आरोप देखिए, जिस कंपनी में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय और उनकी पत्नी की हिस्सेदारी है, वह बिजली कंपनी बीएसईएस के लिए मीटर लगाने और बदलने का काम करती है।

सूद रहे छात्र नेता

दिल्ली भाजपा के उपाध्यक्ष आशीष सूद भी इस कंपनी में डायरेक्टर रह चुके हैं।' सूद एक दौर में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के प्रेसिडेंट रहे हैं। तेज-तर्रार नेता हैं भाजपा के। बेशक, यह बड़ा आरोप है या छोटा, इसका पता तब चलेगा जब भाजपा की तरफ से जवाब आएगा। अरविन्द ने सतीश उपाध्याय की जिन छह कंपनियों के नाम लिए उनमें से एक एनसीएनएल इंफो मीडिया प्राइवेट लिमिटेड बीएसईएस के लिए मीटर लगाने और बदलने का काम करती है।

खलनायक मीटर

इसमें कोई शक नहीं है कि दिल्ली में बिजली के मीटर हर व्यक्ति के लिए आज भी खलनायक है। लोगों ने मजबूरी में आत्मसमर्पण किया है, पर सब मानते हैं कि ये मीटर बिजली शुल्क के नाम पर जबरन लूटने के वैधानिक मशीन है।

बिजनेस करना अपराध मानें

वरिष्ठ टिप्पणीकार अवधेश कुमार सवाल करते हैं कि क्या बिजनेस करना कोई अपराध है। सतीश उपाध्याय या आशीष सूद स्वयं मीटर उत्पादन नहीं करते हैं। केवल इसे लगाने और बदलने का काम करते हैं। यानी यह एक ठेका है जो किसी न किसी कंपनी को तो मिलना ही था। पर चुनाव के लिए यह तो एक मुद्दा है ही।

देखते रहिए अभी केजरीवाल और उनके साथी अपने विरोधियों पर इस तरह के तमाम आरोप लगाएँगे।

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