कांग्रेस छोड़कर कल जा रहे हों तो आज चले जाएं लालू प्रसाद यादव

LALU-BIHAR
पटना। कांग्रेस बिहार में नया साथी तलाश रही है, ऐसी चर्चाएं राज्य में फैल रही हैं। क्या लालू से गठबंधन फेल होने के बाद अब कांग्रेस जेडीयू पर दांव लगाना चाहती है? राजनीतिक हलकों में यह सवाल तैर रहा है कि बिहार में कांग्रेस अब लालू से छुटकारा चाहती है।

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पिछले दिनों बिहार कांग्रेस मुख्यालय सदाकत आश्रम में हार की समीक्षा के लिए बुलाई गई बैठक में ये मुद्दा छाया रहा। 4 जून को पटना के सदाकत आश्रम में संगठन के 20 महत्वपूर्ण लोगों को बुलाया गया था। इस मीटिंग में शामिल होने वालों में खासतौर पर आलाकमान की तरफ से एआईसीसी के सेक्रेटरी किशोरीलाल शर्मा और परेश धनानी मौजूद थे, जिसमें उनके सामने बिहार के तमाम नेताओं ने एक सुर में लालू यादव से जल्द से जल्द अलग होने की वकालत की है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव में गठबंधन में तो आरजेडी और कांग्रेस के बीच अच्छा तालमेल हुआ लेकिन इसी दौरान विधानसभा के 5 स्थानों पर हुए उपचुनाव में लालू ने कांग्रेस से कोई समझौता नहीं किया और सभी 5 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए।

लालू के इस रुख से तिलमिलाई कांग्रेस ने भी 3 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे। लोकसभा चुनाव के नतीजों में भी लालू हाशिए पर जाते दिखे। अब कांग्रेस ने नया राग छेड़ दिया है। कांग्रेस को लगता है लालू यादव के साथ जाकर कांग्रेस कभी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकती और उसका वोटबैंक लालू के साथ रहते, कभी उनके पास नहीं लौट सकता।

कांग्रेस प्रवक्ता और महाराजगंज विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार कुंतल कुमार कहते हैं, 'लालू यादव कांग्रेस के लिए राजनीतिक बोझ हो चुके हैं और इस बोझ को जितनी जल्दी उतार फेंका जाए पार्टी के लिए उतना ही अच्छा होगा।'

ना सिर्फ लोकसभा चुनाव में हारे उम्मीदवार और युवा नेताओं ने जल्द से जल्द लालू से गठबंधन तोड़ने की वकालत की है बल्कि दिल्ली में लालू-सोनिया की मुलाकात में भी इसके संकेत लालू यादव को दे दिए गए। कांग्रेस का बड़ा तबका अब और लालू यादव के साथ चलने को तैयार नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने आजतक से कहा कि पार्टी में इस वक्त तीन राय सामने है। एक तबका लालू से गठबंधन के पक्ष में है जबकि बड़ा तबका इसके खिलाफ है। युवा तबका पार्टी के अकेले जाने और किसी के साथ गठबंधन नहीं करने के पक्ष में है। इस पर फैसला आलाकमान को करना है।

दरअसल, कांग्रेस और जेडीयू के बीच भी पींगे बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं, संकेत हैं कि जेडीयू तीन राज्यसभा में से एक कांग्रेस को दे सकती है और सूत्रों की माने तो नीतीश की पसंद कांग्रेस नेता शकील अहमद हैं, जिसपर दोनों पार्टियों मे मंथन चल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा की एक सीट पर चर्चा को लेकर बिहार कांग्रेस के बड़े नेता दिल्ली में हैं। उधर कई हारे हुए लेकिन कद्दावर मुसलमान नेता आरजेडी का दामन छोड़ रहे है और जो साथ हैं वो नीतीश की खुलेआम वकालत कर रहे हैं। आरेजड़ी का साथ छोड़ चुके फातमी की चर्चा कांग्रेस या जेडीयू में जाने की है,जबकि आरजेडी में रहते हुए अब्दुल बारी सिद्दकी नीतीश के साथ जाने की वकालत कर रहे हैं।

हालांकि लालू ने अपनी ओर से ये साफ कर दिया है कि बिहार में काग्रेस के साथ गठबंधन बरकरार रहेगा। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अब लालू के साथ चलने को तैयार नहीं है। इन सबके बीच, कांग्रेस की नजरें जेडीयू के अंदरुनी हालात पर टिकी है, अगर जेडीयू में घमासान यूं ही चलता रहा और नीतीश कुमार की पार्टी में बगावत निर्णायक हो गई जिसके आसार राज्यसभा चुनाव में वोटिंग में दिख सकते हैं। इन्हीं हालातों के चलते कांग्रेस अब लालू प्रसाद यादव से छुटकारा पाने के मौके तलाशने में जुट गई है।

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