ऑगस्ता घोटाला- जानबूझकर मामले की जांच में देरी की गयी

नई दिल्ली। आगस्ता वेस्टलैंड घोटाले की जांच में जिस तरह से देरी हुई उसकी वजह से इसकी शुरुआती जांच में खासा असर पड़ा है। इटली की कोर्ट अपनी सुनवाई में यह बात कही है कि भारत की यूपीए सरकार की ओर से इस मामले की जांच में किसी भी तरह की मदद नहीं की गयी।

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In Agusta Westland case, an unseen hand ensured probes were delayed

सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि भारत की ओर से इस रवैये के लिए कौन जिम्मेदार है। इटली की ओर से की जा रही इस जांच में भारत की ओर से किन अधिकारियों या संबंधित मंत्रियों ने जांच में मदद नहीं की। साथ ही सीबीआई इस बात पर नजर बनाये हुए हैं कि इटली की जांच एजेंसी ने किन दस्तावेजों को भारत से मांगा था।

सीबीआई इस बात की जांच कर रही है कि इटली की कोर्ट और जांच एजेंसियों ने जिन दस्तावेजों को मांगा था उन्हें क्यों नहीं दिया। इटली की कोर्ट इस मामले से जुड़े 2002 के दस्तावेज को मांगा था जब इस हालांकि यह डील 2002 में रद्द हो गयी थी लेकिन 2005 में एक बार फिर से यह डील सामने आयी थी।

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सीबीआई ने इस मामले में 12 मार्च 2013 को एफआईआऱ दर्ज भी की थी। इस मामले की जांच की रिपोर्ट इसी साल दिसंबर माह में ईडी को भी भेजी गयी थी। ईडी के पास यह मामला पहुंचने पर इसकी जांच में जानबूझकर देरी की गयी। यही नहीं शुरुआत में इस फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के पास जांच के लिए भेजा जाना था।

इस मामले की जांच में बहुत लोगों का मत था कि फेमा के नियम इस मामले के लिए उचित नहीं है इसलिए इसे मनी लॉड्रिंग एक्ट के तहत भेजा जाना चाहिए। सूत्रों की मानें तो इन सारी प्रक्रियाओं में जानबूझकर इतनी देरी की गयी ताकि इसकी जांच पर असर पड़े।

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