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कभी 26 जनवरी परेड पर सेना के ख‍िलाफ थीं इंदिरा गांधी

indira-gandhi
नई दिल्ली। एक ओर जहां नरेंद्र मोदी का भारत स्पेस व अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने की नई इबारत लिख रहा है वहीं इतिहास के कुछ पन्ने एक अंजान हवा के झोंके से पलट गए हैं। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में भारतीय सेना की शानदार जीत का उत्सव मनाना चाहती थीं जबकि सेना मुख्यालय ने 1972 में गणतंत्र दिवस की परेड को रद्द करने की सिफारिश की थी।

फील्ड मार्शल सैम मानेकशा पर लिखी एक पुस्तक में ऐसे कई किस्सों का उल्लेख है। सेना में लंबे समय तक मानेकशा के सहयोगी रहे ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) बेहराम पांथाकी और उनकी पत्नी जेनोबिया ने नई किताब 'फील्ड मार्शल सैम मानेकशा-- द मैन एंड हिज टाइम्स' पेश की है।

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किताब में लिखा गया है, 'भारतीय सेना ने खुद को साबित कर दिया था और 1962 में चीन से मिली हार के बादल छंट गए थे। सेना की इकाइयों के अग्रिम क्षेत्रों में ही रहने के कारण सेना मुख्यालय ने सिफारिश की थी कि उस साल गणतंत्र दिवस परेड रद्द कर दी जाए, लेकिन प्रधानमंत्री लौह महिला इंदिरा गांधी जश्न मनाना चाहती थीं।

भारत को जीत का जश्न मनाना था और श्रद्धांजलि भी अर्पित करनी थी।' पुस्तक में है कि अल्पकालिक नोटिस पर इंडिया गेट के नीचे अमर जवान ज्योति प्रज्ज्वलित की गई। पांथाकी ने लिखा है, '26 जनवरी, 1972 को परेड शुरू होने से पहले इंदिरा गांधी खुली जीप में राजपथ पहुंचीं जिसके बाद शहीदों को श्रद्धांजलि देने तीनों सेनाओं के प्रमुख वहां पहुंचे।

इसके बाद संक्षिप्त रूप में परेड निकाली गई।' हालांकि इस घटना को तमाम राजनैतिक जानकार सकारात्मक व नकरात्मक तौर पर देख रहे हैं पर इतिहस के पलटते पन्ने अपनी आहट में अक्सर बिना कुछ कहे ही बहुत कुछ कह देते हैं।

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