गुजरात चुनाव में 'डाटा गेम' पर जीत-हार का दारोमदार

By: अमिताभ श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार
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नई दिल्ली। जो दिखता है वो बिकता है लेकिन आज की दुनिया में ये मुहावरा उलट हो गया है। जो नहीं दिखता है वो भी बिकता है और ये बात गुजरात की राजनीति के लिए सटीक बैठ रही है। हालांकि इसकी शुरूआत पिछले लोकसभा चुनाव से औपचारिक रूप से शुरू हुई और पिछले तीन साल में जिस तरह डिजिटिल क्रांति आई है उससे साफ है कि राजनीतिक लड़ाई का बड़ा जिम्मा डाटा वॉर ने ले लिया है और जो इसे अंजाम दे रहे हैं वो पर्दे के पीछे बड़े बड़े गुल खिला रहे हैं जिसका श्रेय उनके नेताओं को मिल रहा है या फिर जिसका खामियाजा विरोधी दलों को भुगतना पड़ रहा है। गुजरात चुनाव को लेकर भी डिजिटल वॉर छिड़ चुका है और जीत हार का बड़ा दारोमदार डाटा गेम का है।

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इसको सिलसिलेवार समझना जरूरी है। पिछले लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान में पहली दफा बड़े पैमाने पर मीडिया मैनेजमैंट रहा जिसके लिए बाकायदा बड़ा बजट रखा गया और प्रोफेशनल टीम की सेवाएं ली गईं। इसमें कोई शक नहीं कि दस साल लगातार सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस इसमें पिछड़ गई। उसके पास न तो मीडिया मैनेजमैंट के लिए प्रोफोशनल्स थे और न ही इस और पार्टी का फोकस था। इसके बाद बिहार में भी मीडिया मैनेजमैंट का बड़ा रोल रहा। वक्त के साथ ही इसकी भागीदारी बढ़ती जा रही है। यूपी चुनाव में तो बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने इसके लिए बड़ी फौज तैयार की और उनकी सेवाओं से सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया।

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फेसबुक, ट्विटर, यू ट्यूब के साथ ही दूसरे प्लेटफॉर्म पर जिस तेजी से लोगों की सक्रियता बढ़ी है उससे ये प्लेटफॉर्म मीडिया के बड़े सोर्स बन गए हैं। यहां तक कि अखबार और टीवी चैनल की पहुंच जहां नहीं हो पाती, वहां बिना खर्च और तेज गति से किसी का भी माहौल बन सकता है और बढ़ सकता है। हालात यहां तक हो गए हैं कि इसका सदुपयोग से ज्यादा दुरुपयोग होने लगा है। यही नहीं मीडिया भी अफवाह, भ्रम और फोटो शॉप का शिकार होने लगी है और उन्हें वायरल वीडियो की हकीकत के प्रोग्राम चलाने पड़ रहे हैं। हर रोज कोई न कोई अफवाह सच मानकर लाखों लोगों के मोबाइल में घूम रही है। इस गेम को बीजेपी ने पहले समझा, अब कांग्रेस की भी समझ में आ गया है।

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पहली बार ऐसा हुआ है जब कांग्रेस की सोशल मीडिया विंग अपने नेता राहुल गांधी की छवि को सुधारने में काफी हद तक सफल होती दिख रही है। उनकी ओर से जो जुमले फेंके जा रहे हैं, वे चर्चा का विषय बन रहे हैं। जिस तरह राहुल गांधी सभाओं में भाषण कर रहे हैं वो मीडिया की सुर्खियों में हैं तो ये उस मीडिया मैनेजमैंट टीम का ही कमाल है। इसमें कोई शक नहीं है कि बीजेपी को पहले से ही महारथ हासिल है लेकिन गुजरात में जिस तरह से कांग्रेस सुर्खियों में आई है तो इसमें डिजिटल वॉर का अहम रोल है।

आपको जानकर हैरानी होगी कि असल डिजिटल वॉर अभी शुरू नहीं हुआ है। इसके लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों की तरफ से ही बड़ी तैयारियां हैं। दोनों एक दूसरे पर कड़ी नजर रखे हैं और कहां क्या पक रहा है, इसकी भी टोह ली जा रही है। ये बिलकुल साफ है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में डिजिटल वॉर का घमासान छिड़ने वाला है और जिसके पास जितनी मारक क्षमता होगी, उसको उतना ही फायदा मिलने वाला है।

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English summary
Important role of digital war in Gujarat elections
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