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CEC Impeachment Row: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव कैसे हुआ खारिज? TMC को झटका! 5 पॉइंट में समझें

CEC Gyanesh Kumar Impeachment Row : देश के 5 राज्यों में अप्रैल माह में चुनावी बयार तेज है। 9 अप्रैल को तीन राज्यों में मतदान हैं। ऐसे में राज्यसभा के सभापति ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने वाला महाभियोग प्रस्ताव पूरी तरह खारिज कर दिया है। टीएमसी के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने इसे लेकर भारी तैयारी की थी, लेकिन प्रस्ताव विचार-विमर्श के बाद रद्द हो गया।

यह विपक्ष के लिए बड़ा झटका है, खासकर तब जब 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव सिर पर हैं। आइए 5 पॉइंट में समझते हैं कि इसके पीछे क्या वजह है और क्यों यह प्रयास फेल हो गया...

CEC Gyanesh kumar

1. प्रस्ताव कब और कैसे आया?

12 मार्च 2026 को राज्यसभा में 63 सांसदों के हस्ताक्षर से महाभियोग का नोटिस दिया गया था। लोकसभा में भी 130 सांसदों ने समर्थन किया। नियम के मुताबिक, न्यूनतम 50 राज्यसभा या 100 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। संख्या पूरी थी, लेकिन सभापति ने इसे स्वीकार नहीं किया।

2. विपक्ष ने CEC पर क्या-क्या आरोप लगाए?

विपक्ष का मुख्य आरोप था कि CEC ज्ञानेश कुमार एक पार्टी का पक्ष ले रहे हैं। बिहार और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) अभियान के दौरान जानबूझकर नाम काटे गए। आरोप लगाया गया कि चुनावी धांधली की जांच रोकी गई और वोटरों के अधिकार छीने गए। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देकर पक्षपात का दावा किया गया।

3. महाभियोग लगाना इतना आसान क्यों नहीं?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 124(4), 124(5) और 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है। इसके लिए 'सिद्ध कदाचार या अक्षमता' साबित करनी पड़ती है। सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलता। संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई (2/3) बहुमत जरूरी है। यह प्रक्रिया बेहद कठिन है।

4. सभापति ने विचार-विमर्श के बाद क्यों खारिज किया? (CEC Gyanesh Kumar Impeachment Rejected Reason)

राज्यसभा के सभापति ने पूरे मामले पर विस्तृत चर्चा के बाद प्रस्ताव खारिज कर दिया। कानूनी प्रावधानों-मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम 2023 की धारा 11(2) और न्यायाधीश (जांच) अधिनियम 1968-के मुताबिक प्रस्ताव में पर्याप्त आधार नहीं पाए गए। विपक्ष के आरोप राजनीतिक लगे, जबकि महाभियोग केवल गंभीर और साबित कदाचार पर ही चलता है।

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5. विपक्ष को क्यों लगा बड़ा झटका?

यह खारिजी विपक्ष की रणनीति को सीधा झटका है। SIR अभियान को लेकर बिहार-बंगाल में जो मुद्दा उठाया जा रहा था, वह कमजोर पड़ गया। 5 राज्यों (असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल) के चुनाव इसी माह अप्रैल में हैं। विपक्ष को उम्मीद थी कि CEC पर हमला करके चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर पाएंगे, लेकिन प्रस्ताव रद्द होने से यह प्लान फेल हो गया।

महाभियोग कोई राजनीतिक हथियार नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया है। विपक्ष ने संख्या जुटा ली, लेकिन सबूत और प्रक्रिया की कसौटी पर खरा नहीं उतरा। अभी CEC ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बरकरार हैं। यह घटना दिखाती है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को हटाना कितना मुश्किल है।

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