देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश की आशंका, मुंबई में बरसे मेघ, देखें कहां-कहां जारी हुआ Alert
नई दिल्ली। भारतीय मौसम विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा है कि आज से लेकर अगले तीन दिनों तक देश के कई हिस्सों में भारी बारिश की आशंका है, इसलिए विभाग ने अलर्ट जारी किया है। विभाग के मुताबिक देश के कई राज्यों में भी बारिश ने आफत पैदा कर दी है, तो कहीं-कहीं बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई है।
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विभाग की ओर से जो लिस्ट जारी की गई है उसके हिसाब से निम्नलिखित जगहों पर भारी बारिश, मध्यम और हल्की बारिश हो सकती है,इसके लिए अलर्ट जारी किया गया है।

यहां होगी भारी बारिश की आशंका
- उत्तराखंड
- हिमाचल प्रदेश
- दिल्ली
- एनसीआर
- मध्य प्रदेश
- जम्मू कश्मीर
- तमिलनाडु

यहां होगी मध्यम बारिश
- मुंबई
- कोंकण और गोवा
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
- कर्नाटक
- यूपी

यहां होगी हल्की बारिश
- राजस्थान
- गुजरात
- पंजाब
- हरियाणा
- असम
- मिजोरम

स्काईमेट के मुताबिक यहां होगी मूसलाधार बारिश
- जम्मू कश्मीर
- हिमाचल प्रदेश
- उत्तराखंड
- आंतरिक तमिलनाडु
- आंध्र प्रदेश
- कोंकण और गोवा
- आंध्र प्रदेश के रायलसीमा
- तेलंगाना
- उत्तर-पश्चिमी ओडिशा
- छत्तीसगढ़
- पूर्वी मध्य प्रदेश
- पश्चिमी मध्य प्रदेश
- महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र
- मराठवाड़ा,
- कोंकण गोवा
- गुजरात
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- तेलंगाना
- पूर्वी राजस्थान
- गुजरात,
- पश्चिमी मध्य प्रदेश
- कोंकण गोवा

क्यों हो रही है भारी बारिश?
मौसम विभाग के मुताबिक इस वक्त राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश का कारण बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवात, निम्न दाब की हवाएं और नमी बताया जा रहा है। दरअसल एक साथ चार सिस्टम सक्रिय हैं। मानसून की ट्रफ लाइन हिमालय की तराई से नीचे की ओर आ गई। इसके अलावा बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना। अरब सागर से मजबूत दक्षिण-पश्चिम हवा की तरफ मूव कर रहा है, जिसके कारण कई राज्यों में भारी बारिश हो रही है।
भूस्खलन का खतरा
भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है इसलिए लोगों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। मालूम हो कि भूस्खलन एक भूवैज्ञानिक घटना है। धरातली हलचलों जैसे पत्थर खिसकना या गिरना, पथरीली मिटटी का बहाव, इत्यादि इसके अंतर्गत आते है। भू-स्खलन कई प्रकार के हो सकते हैं और इसमें चट्टान के छोटे-छोटे पत्थरों के गिरने से लेकर बहुत अधिक मात्रा में चट्टान के टुकड़े और मिटटी का बहाव शामिल हो सकता है और इसका विस्तार कई किलोमीटर की दूरी तक हो सकता है। भारी वर्षा, बाढ़ या भूकंप के आने से भूस्खलन हो सकता है।












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