जिस यूनिवर्सिटी में नहीं मिला एडमिशन, वहीं गेस्ट स्पीकर बनकर आए, काफी दिलचस्प है फाइनेंस इंफ्लुएंसर की कहानी
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो लोगों को काफी प्रभावित करते हैं। लोग अपने अनुभव को यहां साझा करते हैं। लोगों को इसे पढ़कर प्रेरणा मिलती है। इस बीच ऐसा ही एक मामला सामने आया है।
सोशल मीडिया पर अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो लोगों को काफी प्रभावित करते हैं। लोग अपने अनुभव को यहां साझा करते हैं। लोगों को इसे पढ़कर प्रेरणा मिलती है। इस बीच ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जो लोगों को काफी प्रभावित कर रहा है। एक शख्स को जिस विश्वविद्यलय में प्रवेश नहीं मिला, कुछ सालों बाद उसी यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी बनकर नहीं, बल्कि गेस्ट लेक्चरर बनकर गए। उनकी इस कामयाबी से लोग काफी प्रभावित हो रहे हैं।

2 मिलियन है फॉलोअर्स
इस शख्स का शरण हेगड़े नाम है। इंस्टाग्राम पर उनके 2 मिलियन फॉलोअर्स हैं। उन्हें फाइनेंस इन्फ्लुएंसर के रूप में जाना जाता है। शरण हेगड़े ने अपनी अविश्वसनीय कहानी को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। उन्होंने बताया कि 3 साल पहले कॉमन एडमिशन टेस्ट (CAT) में 98 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के बावजूद उन्हें भारतीय प्रबंधन संस्थान-बैंगलोर में प्रवेश नहीं मिला।

कोलंबिया से भी आ गए वापस
इसके बाद शरण हेगड़े ने संयुक्त राज्य अमेरिका में अपनी डिग्री लेने का फैसला किया। उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया लेकिन बाद में कंटेंट क्रिएशन में अपना करियर बनाने के लिए पढ़ाई छोड़ दी।

ऐसे मिली कॉलेज में एंट्री
कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के बाद शरण हेगड़े को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट बैंगलोर में प्रवेश मिला, लेकिन एक छात्र के रूप में नहीं बल्कि गेस्ट लेक्चरर के रूप में। उन्होंने बताया कि आखिरकार कॉलेज में एंट्री मिल गई।

गेस्ट लेक्चरर के रूप में यहां आए
शरण हेगड़े आईआईएम बैंगलोर (IIMB) से पढ़ाई तो नहीं कर सके, लेकिन यहां गेस्ट लेक्चरर के रूप में आए। उन्होंने एक इंस्टाग्राम पर एक तस्वीर पोस्ट की है, जिसमें आईआईएम बैंगलोर भी दिख रहा है। उन्होंने फोटो के कैप्शन में लिखा कि सीएटी में 98 प्रतिशत फिर भी प्रवेश नहीं, अब IIMB में 100 से अधिक महिला उद्यमियों के गेस्ट लेक्चरर हैं।

उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में बताया
उन्होंने अपनी यात्रा के बारे में बात की और बताया कि उन्हें अपने आईआईएम के सपने को क्यों छोड़ना पड़ा। उन्होंने लिखा कि 3 साल पहले, मैंने आईआईएम छोड़ दिया, और अब मैं आईआईएम में हूं। मैंने सोचा था कि सीएटी के लिए मेरी तैयारी समय की बर्बादी थी।
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