Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

अगर 2022 जीत गये तो क्या नरेंद्र मोदी के बाद नंबर टू बनेंगे योगी ?

नई दिल्ली, 22 नवंबर। अगर योगी आदित्यनाथ 2022 का विधानसभा चुनाव जीत जाएंगे तो क्या वे भाजपा में नरेन्द्र मोदी का विकल्प बन जाएंगे ? राजनीतिक पंडितों का मानना है कि अगर योगी आदित्यनाथ की सत्ता में वापसी होती है तो भाजपा की राष्ट्रीय राजनीति में उनकी हैसियत बढ़ जाएगी। वे नरेन्द्र मोदी की राह पर ही आगे बढ़ रहे हैं।

if Yogi Adityanath wins 2022 assembly election will he become an alternative to Narendra Modi

बस एक जीत की दरकार है। वे भी नरेन्द्र मोदी की तरह लगातार विधानसभा चुनाव जीत कर राजनीति की बुलंदी पर पहुंच सकते हैं। जैसे नरेन्द्र मोदी ने लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गजों को पछाड़ कर अपनी जगह बनायी थी वैसे ही योगी आदित्यनाथ अमित शाह, नितिन गडकरी और राजनाथ सिंह को पीछे छोड़ कर भाजपा में नम्बर दो का ओहदा पा सकते हैं। 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव भाजपा के भविष्य के लिए निर्णायक है। 2024 में दिल्ली की गद्दी और भाजपा का भावी नेता, इसी चुनाव से ही तय होना है।

क्या नरेन्द्र मोदी का विकल्प बनेंगे योगी ?

क्या नरेन्द्र मोदी का विकल्प बनेंगे योगी ?

भाजपा की फायर ब्रांड नेता रहीं साध्वी उमा भारती ने हाल ही में कहा है कि योगी आदित्यनाथ उनका 'बेटर वर्जन'(बहुत अच्छा रूप) हैं। उमा भारती राममंदिर आंदोलन की चर्चित नेता रही हैं। नब्बे के दशक के शुरूआत में उनके आक्रामक भाषणों ने भाजपा की राजनीति को बुलंदियों पर पहुंचा दिया था। तब उनकी लोकप्रियता आसमान छू रही थी। 2004 के आसपास उमा भारती को भाजपा में अटल-आडवाणी के बाद तीसरा सबसे दमदार नेता माना जाने लगा था। कट्टर हिंदुत्व की छवि ने ही उमा भारती को शक्तिशाली नेता बनाया था। नरेन्द्र मोदी ने 'हिंदुत्व की राजनीति ' को उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया कि अब भाजपा अकेले बहुमत में है। इसी राजनीतिक आधार को और मजबूत करने के लिए ही नरेन्द्र मोदी ने योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी थी। अब आदित्यनाथ भी कट्टर हिंदुत्व के रथ पर सवार हो कर चुनावी समर में उतर चुके हैं। नरेन्द्र मोदी खुद मानते हैं कि योगी उनके भरोसे पर खरे उतरे हैं। इसी संदर्भ में ही उमा भारती ने योगी को अपना बेहतर 'वर्जन' करार दिया है। अब भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि योगी की सत्ता में वापसी कैसे होगी ? किसान आंदोलन और कोरोना संकट से उपजा असंतोष योगी आदित्यनाथ की राह में अवरोध बन रहे थे। महामारी से जुड़ी नाराजगी को बेअसर करने के लिए भाजपा सामुदायिक सम्मान अभियान चला रही है। इसके जरिये वह जातीय समीकरण को संतुलित करने की कोशिश में है। कहा जा रहा है कि यूपी चुनाव जीतने के मकसद से ही मोदी सरकार ने तीन कृषि कानूनों को वापस लिया है। नाराज किसानों को साध कर भाजपा अपने परम्परागत वोट बैंक को बरकरार रखना चाहती है।

अगर किसान मान गये तो चल जाएगा हिंदुत्व कार्ड !

अगर किसान मान गये तो चल जाएगा हिंदुत्व कार्ड !

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान महेन्द्र सिंह टिकैत के जमाने से ही एक संगठित शक्ति रहे हैं। अधिकतर किसान जाट समुदाय से हैं। दूसरे स्थान पर गुर्जर समुदाय के किसान हैं। यहां के किसान पहले चौधरी चरण सिंह के समर्थक थे। लेकिन 2013 में मुजफ्फरनगर की घटना के बाद अधिकांश किसान भाजपा के समर्थन में आ गये। 2014, 2017 और 2019 में भाजपा की प्रचंड जीत में किसानों की अहम भूमिका रही है। लेकिन पिछले साल तीन कृषि कानूनों के लागू होने के बाद स्थिति बदल गयी। किसान मोदी सरकार के खिलाफ गोलबंद हो गये। स्थिति ये हो गयी थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायक और सांसद अपने क्षेत्र में नहीं जा पा रहे थे। किसान इनको अपने इलाके में घुसने नहीं दे रहे थे। जाहिर है भाजपा इतने बड़े वोट बैंक की नाराजगी मोल नहीं ले सकती थी। इसलिए अब इन तीन कृषि कानूनों के वापस लेकर किसानों की नाराजगी दूर करने की कोशिश की गयी है। अगर किसान मान गये तो योगी का हिंदुत्व कार्ड फिर कामयाब हो सकता है। एक्सप्रेस वे और अन्य विकास योजनाओं के जरिये योगी की छवि एक योग्य प्रशासक के रूप में बनायी जा रही है। लेकिन जानकारों का कहना है कि हिंदुत्व ही उनका मूल आधार है। पांच-छह दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कैराना के विस्थापित हिंदू परिवारों से मुलाकात की थी। उनकी इस मुलाकात से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया।

उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व क्या एक चुनावी मुद्दा है ?

उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व क्या एक चुनावी मुद्दा है ?

इसे स्पष्ट रूप से भले न माना जाए लेकिन उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व एक चुनावी मुद्दा है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश का तूफानी दौरा कर रही हैं। वे मंदिर-मंदिर घूम कर न केवल पूजा कर रही हैं बल्कि त्रिपुंड तिलक लगा कर सार्वजिनक मंचों से भाषण भी कर रही हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि योगी आदित्यनाथ को जवाब देने के लिए अब कांग्रेस भी 'सॉफ्ट हिंदुइज्म' की तरफ मुड़ रही है। धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होने के कारण ही पिछले कुछ चुनावों में यहां जातीय समीकरण ध्वस्त होते रहे हैं। सपा और बसपा की हार में यह एक बड़ा कारण है। सपा के अखिलेश यादव और सुहेलदेव पार्टी के ओमप्रकाश राजभर ने जिन्ना के समर्थन में बयान दे कर एक तरह से भाजपा के काम को आसान कर दिया है। कहा जा रहा था कि किसान आंदोलन के कारण अरसे बाद जाट और मुसलमान नजदीक आ रहे थे। लेकिन ऐसे बयान मेल से पहले ही खलल पैदा कर सकते हैं। दूसरी तरफ भाजपा अपने हिंदुत्व के एजेंडे पर और मजबूती से कायम है। योगी आदित्यनाथ को 'हिंदू ह्दय सम्राट' बनाने के लिए उन्हें अयोध्या से विधानसभा चुनाव लड़ाये जाने की चर्चा चल रही है।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+