बालासोर ट्रेन हादसे में अगर कोई दोषी मिला तो कितने साल की सजा होगी, जानिए

बालासोर में हुए ट्रिपल ट्रेन हादसे में सीबीआई ने एफआईआर दर्ज करने के बाद जांच कर रही है। आइए जानते हैं कि ट्रेन हादसे में अगर कोई दोषी मिला तो उसे कितने साल की सजा होगी।

Odisha train accident:
ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रिपल ट्रेन एक्‍सीडेंट ने सभी को हिलाकर रख दिया। इस ट्रेन हादसे में 288 लोगों की मौत हो गई और 1000 से अधिक लोग घायल हैं। ये ट्रिपल ट्रेन हादसा किसकी गलती से हुआ इसकी सीबीआई जांच कर रही है। जांच शुरू करते ही सीबीआई ने एक एफआईआर दर्ज की है। आइए जानते हैं इस दुर्घटना में अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसे कितने साल की जेल की सजा होगी?

पीएम मोदी ने कड़ी से कड़ी सजा देने की बात कही है लेकिन...

याद रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि है ओडिशा ट्रेन त्रासदी में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी। हालांकि सीबीआई ने जिन धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की है उसमें इस हादसे के जिम्‍मेदार पाए जाने वाले को कम से कम दो और अधिक से अधिक पांच साल की ही सजा होगी। ऐसी ट्रेन दुर्घटना जिसमें इतनी जान चली गई उस दुर्घटना के दोषी को बस पांच साल की साज मिलेगी।

सीबीआई ने इन धाराओं में दर्ज किया है केस

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार सीबीआई ने आईपीसी की धारा 337, 338, 304ए और 34 और रेलवे अधिनियम की धारा 153, 154 और 175 के तहत इस ट्रेन हादसे में एफआईआर दर्ज की है। जिन धाराओं में केस दर्ज किया गया है उस रेल एक्ट की धारा 153 में ही अधिकतम पांच साल की सजा का प्रावधान है। इस रिपोर्ट में ये भी खुलासा किया गया है कि बाकी अन्य धाराओं में दो साल या उससे कम सजा का प्रावधान है।

सीबीआई ने अपनी एफआईआर में जानें क्‍या लिखा है?

इस ट्रेन हादसे के बाद ओडिशा पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी लेकिन इस मामले को केंद्रीय एजेंसी ने अपने हाथ में ले लिया है। सीबीआई ने जो इस दुर्घटना के बारे में जो एफआई दर्ज की है उसमें लिखा है कि

'बेंगलुरु-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस और शालीमार-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी के बीच टक्कर बालासोर के बहनागा बाजार स्टेशन के पास शुक्रवार शाम करीब 7 बजे हुई। घातक दुर्घटना में 17 डिब्बे पटरी से उतर गए और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। इस त्रासदी में 288 लोगों की जान चली गई थी जबकि 1,000 से अधिक लोग घायल हुए थे।'

40 शवों पर नहीं मिले चोट के निशान

सीबीआई की एफआईआर रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि सरकारी रेलवे पुलिस ने ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना में शामिल कोरोमंडल एक्सप्रेस से बरामद किए गए लगभग 40 शवों पर चोट के कोई निशान नहीं थे और माना जाता है कि करंट लगने से उनकी मौत हुई है ।

तार टूट कर डिब्बों से चिपक गए, फसे यात्रियों की करेंट लगने से हुई मौत

राजकीय रेलवे पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में दावा किया गया है कि दुर्घटना के समय बिजली के तार टूट कर कुछ डिब्बों में उलझ गए और उनमें फंसे यात्रियों को करंट लग गया। पुलिस सब-इंस्पेक्टर पी कुमार नायक ने एफआईआर में लिखा ओवरहेड एलटी (लो टेंशन) लाइन के संपर्क में आने के बाद टक्कर और करंट लगने से कई यात्रियों की मौत हो गई।

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