'पहले भी कोर्ट के फैसलों को पलटा गया है, सरकार राम मंदिर पर कानून ला सकती है'
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस चेलामेश्वर ने कहा कि सरकार अगर चाहे तो विधेयक लाकर आयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करा सकती है। उन्होंने कहा कि विधायी प्रक्रिया से ही कोर्ट के फैसले को बदला जा सकता है। यह पहली बार है जब किसी सीनियर जज ने राम मंदिर मुद्दे पर बात कही है। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने आयोध्या में राम मंदिर पर फैसले को अगले साल जनवरी तक टाल दिया था, जिसके बाद सरकार पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। बता दें कि शुक्रवार को भी संघ के नेता भैयाजी जोशी ने प्रेस कांफ्रेंस कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अब और देर नहीं करना चाहिए।

सरकार ला सकती है राम मंदिर पर कानून
मुंबई में एक इवेंट में बोलते हुए पूर्व जस्टिस चेलेमेश्वर ने कहा, 'जैसे कि अतीत में ऐसे कई उदाहरण देखे गए हैं, जब विधायी प्रक्रिया द्वारा अदालत के फैसलों को पलट दिया गया। यह संभव है कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के बावजूद केंद्र राम मंदिर के लिए कानून ला सकती है। बता दें कि जस्टिस चेलमेश्वर उन चार सीनियर जजों में शामिल थे, जिन्होंने प्रेस कांफ्रेंस कर सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार सार्वजनिक तौर सीजेआई दीपक मिश्रा की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे।

इस मुद्दे पर पहले ही खुलकर रुख अपनाना चाहिए था
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस चेलेमेश्वर ने कहा कि क्या सरकार कानून लाकर राम मंदिर पर विचार कर सकती है। तब उन्होंने कहा कि यह कानूनी रूप से संभव है और ऐसा पहले भी होता आया है। उन्होंने कर्नाटक के कावेरी जल विवाद और राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के बीच जल विवाद से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को इन मुद्दों को लेकर पहले ही खुला रुख अपनाना चाहिए था और राम मंदिर पर विधेयक लाना संभव है।

जरुरत पड़ी तो फिर होगा आंदोलन- RSS
शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यवाहक भैयाजी जोशी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राम मंदिर पर संघ के रूख को स्पष्ट किया था। भैयाजी जोशी सुप्रीम कोर्ट से अपील करते हुए कहा था कि वह फैसला सुनाने में लोगों की आस्था का ख्याल रखे। उन्होंने कहा कि राम सब के दिल में रहते हैं पर वो प्रकट होते हैं मंदिरों के द्वारा। उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि अयोध्या में मंदिर बने। उन्होंने साथ में यह भी कहा था कि कभी भी कोर्ट के फैसले की उपेक्षा नहीं किया है, लेकिन जरूरत पड़ी तो राम मंदिर के लिए एक बार फिर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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