अगर चुनाव जीते तो मुझे गोली मरवा देंगे नरेंद्र मोदी- शरद यादव

नई दिल्ली। चुनावी समर में तमाम नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं। लेकिन लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने अपनी जान को खतरा बताया है। उन्होंने कहा कि अगर नरेंद्र मोदी दोबारा चुनाव जीतते हैं तो वह मुझे जेल भिजवा देंगे या फिर मुझे गोली मरवा देंगे। शरद यादव ने कहा कि हमे देश को बचाना है,आज कह रहा हूं कि अगर नरेंद्र मोदी जीत गया तो शरद यादव जेल जाएगा, या तो ये गोली मरवा देंगे, इसलिए कह रहा हूं कि ऐसी ताकतों को हराना है।

महागठबंधन का हिस्सा

महागठबंधन का हिस्सा

बता दें कि शरद यादव पहले जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे, लेकिन नीतीश कुमार के साथ मतभेद के चलते उन्होंने महागठबंधन का हाथ थाम लिया। इस बार वह राष्ट्रीय जनता दल के चुनाव चिन्ह पर बिहार के मधेपुरा लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में हैं। यह पहली बार नहीं है जब शरद यादव ने इस तरह का कोई बयान दिया है। इससे पहले उन्होंने राजस्थान के विधानसभा चुनाव के दौरान कहा था कि वसुंधरा को आराम दो ,बहुत थक गई है, मोटी हो गई है, वह पहले पतली थी, हमारे मध्य प्रदेश की बेटी हैं।

विलय हो सकता है

विलय हो सकता है

माना जा रहा है कि शरद यादव अपनी पार्टी लोजद का आरडेडी में विलय कर सकते हैं क्योंकि वह आरजेडी के ही चुनाव चिन्ह लालटेन पर चुनाव लड़ रहे हैं। वह लंबे समय तक मधेपुरा से सांसद रह चुके हैं। यहां से जन अधिकार पार्टी (लोकतांत्रिक) के नेता पप्पू यादव भी कई बार चुनाव जीत चुके हैं, ऐसे में इस बार दोनों ही दिग्गज नेताओं के बीच यह मुकाबला है।

लालू से जेल में की थी मुलाकात

लालू से जेल में की थी मुलाकात

इससे पहले खबर आई थी कि शरद यादव की पार्टी लोजद और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक समता पार्टी का भी विलय हो सकता है। लेकिन शरद यादव ने इन खबरों से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि यह मनगढ़ंत खबरें हैं और स्वार्थी लोगों ने यह खबर बनाई है। हाल ही में शरद यादव ने राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव से रांची जेल में मुलाकात की थी।

2017 में नीतीश से अलग हुए थे

2017 में नीतीश से अलग हुए थे

आपको बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में शरद यादव ने जदयू के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े था, लेकिन इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वह उस समय जदयू के अध्यक्ष थे, लेकिन उनके बगावती सुर के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी की कमान संभाल ली थी। शरद यादव को जदयू की ओर से राज्यसभा भेजा गया था। 2017 में जब नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी तो नीतीश कुमार ने इसे जनादेश का अपमान बताते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

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