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कौन हैं IAS अधिकारी Supriya Sahu? संयुक्त राष्ट्र ने क्यों दिया 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' अवॉर्ड्स

Supriya Sahu IAS: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने बुधवार को साल 2025 के 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' अवॉर्ड्स की घोषणा की, जिसमें भारत की वरिष्ठ IAS अधिकारी सुप्रिया साहू को 'इंस्पिरेशन एंड एक्शन' श्रेणी में चुना गया है।

तमिलनाडु सरकार के पर्यावरण विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत साहू को यह वैश्विक सम्मान उनके 30 साल के प्रशासनिक करियर में प्लास्टिक प्रदूषण को खत्म करने, वन्यजीव संरक्षण, और जलवायु अनुकूलन के लिए किए गए अभूतपूर्व कार्यों के लिए दिया गया है। यह पुरस्कार उन्हें केन्या की राजधानी नैरोबी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रदान किया गया, जिसने भारत का गौरव बढ़ाया है।

Supriya Sahu IAS

किस श्रेणी में और क्यों मिला सम्मान?

सुप्रिया साहू को यह प्रतिष्ठित सम्मान 'इंस्पिरेशन एंड एक्शन' (प्रेरणा और कार्रवाई) श्रेणी में प्रदान किया गया है। UNEP ने उन्हें भारत में प्रमुख पर्यावरणीय चुनौतियों पर उनके दीर्घकालिक कार्य और अभूतपूर्व परिणामों के लिए चुना है। तमिलनाडु सरकार में पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं वन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने उप-राष्ट्रीय स्तर पर जलवायु कार्रवाई का एक ऐसा मॉडल स्थापित किया है, जो दुनिया के अन्य राज्यों और प्रांतों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।

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'ऑपरेशन ब्लू माउंटेन' जिसने बदली जिंदगी

सुप्रिया साहू के पर्यावरण योद्धा बनने की प्रेरणा उन्हें नीलगिरि में जिला कलेक्टर रहने के दौरान मिली। उन्होंने जंगली हाथी और हिरणों को प्लास्टिक कचरा खाते हुए देखा, जिसने उन्हें झकझोर दिया। इस अनुभव के बाद, उन्होंने साल 2000 में 'ऑपरेशन ब्लू माउंटेन' अभियान चलाया, जिसके तहत नीलगिरि में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया। यह निर्णय वन्यजीव संरक्षण की दिशा में उनका सबसे शुरुआती और निर्णायक कदम था, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।

क्लाइमेट एक्शन और ग्रीन जॉब्स पर काम

सुप्रिया साहू ने अपने प्रशासनिक करियर में कई बड़े पर्यावरणीय सुधारों को नेतृत्व दिया है। उन्होंने तमिलनाडु ग्रीन क्लाइमेट कंपनी की स्थापना की, जिसका मुख्य फोकस तटीय लचीलापन (Coastal Resilience) और जलवायु परियोजनाओं पर है। उनके प्रयासों से लाखों ग्रीन जॉब्स सृजित करने में मदद मिली है और 12 मिलियन (1.2 करोड़) लोगों के लिए जलवायु अनुकूलन को मजबूत किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने वन आवरण और मैंग्रोव आवरण को बढ़ाने तथा वेटलैंड्स के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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UNEP ने बताया वैश्विक प्रेरणा का मॉडल

UNEP ने सुप्रिया साहू को सम्मानित करते हुए कहा कि उनके कार्य अन्य राज्यों और प्रांतों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं। नैरोबी में सम्मान ग्रहण करते हुए साहू ने अपने पुराने अनुभव को याद किया, जहाँ उन्होंने जानवरों को प्लास्टिक कचरा खाते देखा था। उन्होंने कहा, "मैंने महसूस किया कि हमारा ग्रह घुट रहा है। इस अनुभव ने मुझे पर्यावरण से जोड़ दिया।" UNEP का मानना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर इकोसिस्टम रेस्टोरेशन और नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस को सफलतापूर्वक लागू करने का एक मॉडल खड़ा किया है।

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