जानिए IAS संतोष वर्मा के लिए MP सरकार ने की क्यों की बर्खास्तगी की सिफारिश, कृषि विभाग से हटाने का फैसला
MP News: मध्य प्रदेश में IAS अधिकारी संतोष कुमार वर्मा का विवादास्पद बयान अब उनके करियर पर भारी पड़ गया है। राज्य सरकार ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर दी है और कृषि विभाग से उन्हें हटाने का फैसला ले लिया है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 11 दिसंबर को केंद्रीय सरकार को पत्र लिखकर वर्मा की बर्खास्तगी की सिफारिश की है, जो उनके 23 नवंबर के वायरल बयान के ठीक 15 दिनों बाद आया है। वर्मा, जो वर्तमान में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी हैं, को तत्काल प्रभाव से विभाग से हटाया जाएगा।

यह कार्रवाई ब्राह्मण समाज के संगठनों के विरोध प्रदर्शनों और FIR की मांग के बीच हुई है। सवाल उठ रहा है - क्या यह ब्राह्मण समाज का दबाव था या वर्मा का बयान वाकई "सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाला" था? वर्मा ने सफाई दी है कि उनका बयान "संदर्भ से हटकर" पेश किया गया, लेकिन सरकार ने इसे "अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार" करार दिया। वनइंडिया हिंदी की विशेष रिपोर्ट में जानिए पूरा मामला, बयान का बैकग्राउंड, सरकार की कार्रवाई और राजनीतिक असर।
"आरक्षण तब तक जब तक ब्राह्मण बेटी न दे दे"
सब कुछ 23 नवंबर 2025 को भोपाल में अखिल भारतीय अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (AJJAKS) की प्रांतीय बैठक से शुरू हुआ। वर्मा, जो हाल ही में AJJAKS के प्रदेश अध्यक्ष बने थे, ने आरक्षण को आर्थिक आधार पर देने की बहस के बीच कहा: "परिवार में एक ही व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए, जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे से शादी न कर दे या उसके साथ संबंध न बनाए। अगर सिर्फ आर्थिक स्थिति की बात है तो..."
यह बयान वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ब्राह्मण समाज ने इसे "जातिवादी और महिलाओं का अपमान" बताते हुए भोपाल, ग्वालियर, सिंगरौली, नर्मदापुरम और रायसेन में विरोध प्रदर्शन किए। ऑल इंडिया ब्राह्मण सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा, "यह ब्राह्मण बेटियों का अपमान है। FIR होनी चाहिए।"
वर्मा ने सफाई दी: "मेरा इरादा अपमान का नहीं था। हम आरक्षण को सामाजिक या आर्थिक आधार पर देने की चर्चा कर रहे थे। संदर्भ से हटकर पेश किया गया।"
सरकार की कार्रवाई: शो-कॉज नोटिस से बर्खास्तगी की सिफारिश
27 नवंबर को सामान्य प्रशासन विभाग ने वर्मा को शो-कॉज नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया:
"आपके बयान से सामाजिक सद्भाव बिगड़ा और समाज में वैमनस्य पैदा हुआ। यह AIS (कंडक्ट) रूल्स 1968 के नियम 3(1), 3(2)(b)(i)(ii) का उल्लंघन है। अनुशासनहीनता और गंभीर कदाचार के कारण AIS (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स 1969 के तहत कार्रवाई होगी।"
वर्मा को 7 दिनों में जवाब मांगा गया। लेकिन 11 दिसंबर को विभाग ने केंद्रीय सरकार को पत्र लिखकर बर्खास्तगी की सिफारिश की। मुख्य सचिव कैलाश चंद्र मीणा ने कहा, "बयान से सामाजिक सद्भाव प्रभावित हुआ। केंद्रीय स्तर पर फैसला होगा।" वर्मा को कृषि विभाग से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग में अटैच किया जाएगा।
विरोध प्रदर्शन, FIR की मांग
बयान के बाद ब्राह्मण संगठनों ने हंगामा किया। इंदौर कोर्ट में 2 दिसंबर को FIR की याचिका दाखिल हुई। हिंदू उत्सव समिति के चंद्रशेखर तिवारी ने कहा, "वर्मा को तुरंत बर्खास्त करो।" ग्वालियर में SP कार्यालय घेरा गया।
"संदर्भ से हटकर पेश किया गया"
वर्मा ने कहा, "मैं AJJAKS अध्यक्ष हूं। आरक्षण बहस में बयान आया। RSS के मोहन भागवत भी रोटी-बेटी संबंधों की बात करते हैं। मेरा इरादा सामाजिक समरसता का था।" लेकिन सरकार ने इसे खारिज किया।
BJP के लिए चुनौती, कांग्रेस का तंज
BJP के लिए यह IAS विवाद आदिवासी-ब्राह्मण समीकरण बिगाड़ सकता है। झाबुआ-रतलाम जैसे आदिवासी क्षेत्रों में BJP मजबूत है। कांग्रेस ने कहा, "मोहन सरकार IAS को संरक्षण दे रही। ब्राह्मण वोट के लिए आदिवासी अधिकारी को बलि चढ़ा रही।"
बयान का बोझ, करियर का अंत?
संतोष वर्मा का मामला IAS अधिकारियों के लिए चेतावनी है। बर्खास्तगी की सिफारिश से उनका करियर खतरे में है। ब्राह्मण दबाव या अनुशासनहीनता - सच्चाई क्या है? वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।
(रिपोर्ट: वनइंडिया हिंदी, भोपाल ब्यूरो, LN Malviya)












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