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बिहार विधानसभा में गूंजा MP IAS संतोष वर्मा का विवाद: ब्राह्मण बेटियों के बयान पर LJP विधायक ने उठाई ये मांग

मध्य प्रदेश के प्रमोटी IAS अधिकारी और अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (AJJAKS) के प्रदेश अध्यक्ष संतोष वर्मा के ब्राह्मण बेटियों पर दिए गए कथित अपमानजनक बयान ने अब बिहार विधानसभा तक पहुंच बना लिया है।

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने सदन में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाते हुए वर्मा के खिलाफ FIR दर्ज करने और कठोर कार्रवाई की मांग की। तिवारी ने कहा कि किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति का यह बयान "दुर्भाग्यपूर्ण" है और समाज में वैमनस्य फैला रहा है।

MP IAS Santosh Verma controversy resonates in Bihar Assembly LJP MLA on statement about Brahmin daughters

यह विवाद 23 नवंबर 2025 को भोपाल में AJJAKS की प्रांतीय बैठक के दौरान शुरू हुआ था, जब वर्मा ने आरक्षण पर बहस के बीच कहा था, "आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे से शादी न कर दे या उसके साथ संबंध न बनाए।" इस बयान ने MP में ब्राह्मण समाज में भारी आक्रोश पैदा कर दिया, जो अब बिहार तक फैल चुका है। मध्य प्रदेश सरकार ने वर्मा को शो-कॉज नोटिस जारी किया है, लेकिन FIR की मांग तेज हो रही है।

बिहार विधानसभा में LJP विधायक राजू तिवारी का तीखा प्रहार: "किसी की बहन-बेटी पर बोलने का अधिकार नहीं"
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान गुरुवार को LJP (रामविलास) के विधायक राजू तिवारी ने सदन में IAS संतोष वर्मा के बयान का जिक्र करते हुए जोरदार हमला बोला। ब्राह्मण बिरादरी से आने वाले तिवारी ने कहा,
"मैं ब्राह्मण बिरादरी से आता हूं। एक वरिष्ठ IAS जिनका नाम संतोष वर्मा है... किसी भी जाति की बेटी के बारे में जो गंदी बात उन्होंने बोली है, एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए।

ये निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं सदन से मांग करूंगा कि किसी की बहन-बेटी के बारे में बोलने का किसी को अधिकार नहीं है। मैं सदन से मांग करूंगा कि ऐसे IAS पर कार्रवाई हो। उनके ऊपर FIR दर्ज हो और इतनी कठोर कार्रवाई हो कि किसी भी जाति का कोई व्यक्ति किसी समाज के बारे में बोलने की जुर्रत न कर सके।"

तिवारी का यह बयान सदन में गूंजा, लेकिन भाजपा और JDU विधायकों ने चुप्पी साधी। LJP नेता चिराग पासवान ने ट्वीट कर समर्थन दिया: "महिलाओं के सम्मान पर कोई समझौता नहीं। IAS अधिकारी को तुरंत बर्खास्त किया जाए।" यह मुद्दा बिहार में भी जातिगत तनाव बढ़ा रहा है, जहां OBC-SC-ST आरक्षण बहस हमेशा गर्म रहती है।
संतोष वर्मा का विवादास्पद बयान: "आरक्षण तब तक जब तक ब्राह्मण बेटी न दे दे"

23 नवंबर 2025 को भोपाल में AJJAKS की बैठक में वर्मा को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। आरक्षण को आर्थिक आधार पर देने की बहस के बीच उन्होंने कहा, "परिवार में एक ही व्यक्ति को आरक्षण मिलना चाहिए जब तक कि कोई ब्राह्मण अपनी बेटी को मेरे बेटे को न दे दे या उसके साथ संबंध न बनाए।" यह बयान वीडियो में रिकॉर्ड हो गया और सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

वर्मा ने सफाई दी कि बयान "संदर्भ से हटकर" पेश किया गया। उन्होंने कहा, "हम आरक्षण को सामाजिक या आर्थिक आधार पर देने की चर्चा कर रहे थे। मेरा इरादा किसी समाज का अपमान करना नहीं था।" लेकिन ब्राह्मण संगठनों ने इसे "जातिवादी और महिलाओं के अपमान" करार दिया। ऑल इंडिया ब्राह्मण सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा, "यह ब्राह्मण बेटियों का अपमान है। FIR दर्ज होनी चाहिए।" मिश्रा ने X पर पोस्ट किया, "ब्राह्मण बेटियों पर टिप्पणी के लिए IAS संतोष वर्मा के खिलाफ तुरंत FIR हो।"

MP में ब्राह्मण संगठनों का आक्रोश: विरोध प्रदर्शन, हाईकोर्ट में याचिका

MP में विवाद ने तूल पकड़ लिया। 25 नवंबर को भोपाल, ग्वालियर, सिंगरौली, नर्मदापुरम और रायसेन में ब्राह्मण संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए। भोपाल के रशनपुरा चौराहे पर सड़क जाम कर पुतला दहन किया गया। हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा, "यह सस्ता और विभाजनकारी मानसिकता है। IAS अधिकारी को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए।"

इंदौर कोर्ट में याचिका दाखिल हो चुकी है, जिसमें वर्मा के खिलाफ FIR की मांग की गई। ग्वालियर में वकील अनिल मिश्रा के नेतृत्व में SP कार्यालय पहुंचे और FIR की मांग की। SP धर्मवीर सिंह ने जांच का आश्वासन दिया। 26 नवंबर को राजगढ़ जिले में वर्मा का पुतला जलाया गया।

MP सरकार का रुख: शो-कॉज नोटिस जारी, लेकिन FIR पर चुप्पी

मध्य प्रदेश सरकार ने 27 नवंबर को वर्मा को शो-कॉज नोटिस जारी किया, जिसमें बयान को "सिविल सर्विस कंडक्ट रूल्स का उल्लंघन" बताया। वर्मा कृषि विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी हैं। मुख्य सचिव कैलाश चंद्र मीणा ने कहा, "जांच के बाद कार्रवाई होगी।" लेकिन ब्राह्मण संगठनों ने कहा, "शो-कॉज से काम नहीं चलेगा, FIR जरूरी।"

पूर्व स्पीकर सीतासरण शर्मा का बयान: "कार्रवाई होगी, लेकिन जांच पहले"

MP विधानसभा के पूर्व स्पीकर और BJP विधायक सीतासरण शर्मा ने कहा, "हां, थोड़ा चिंता का विषय तो है क्योंकि जिस जज ने ऑर्डर किया था उनके खिलाफ कार्रवाई हो गई। लेकिन मैं सोचता हूं किसी भी एक्शन के पहले पूरी इंक्वायरी आवश्यक होती है। इसलिए मुझे पूरा भरोसा है कि उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। चूंकि बयान अखबारों में आया है इसलिए कई बार ऑर्डर्स हाईकोर्ट में टिकते नहीं और उन्होंने जो स्पष्टीकरण दिया कि मैंने कोई गलती नहीं की। वो फिर कहेंगे कि मेरे खिलाफ बिना जांच कार्रवाई कर दी।"

शर्मा ने मुख्यमंत्री से मांग की थी, लेकिन सदन में चुप्पी साधी।

संतोष वर्मा का विवादास्पद इतिहास: पहले भी फर्जी साइन वाले केस में जेल, यह वर्मा का पहला विवाद नहीं। 2021 में एक महिला के खिलाफ आपराधिक धमकी के केस में जज के फर्जी साइन से राहत लेने का आरोप लगा। CBI ने जांच की और वर्मा जेल गए। बाद में बरी हुए, लेकिन विवाद बरकरार। ब्राह्मण संगठनों ने इसे "पुरानी आदत" बताया।

जातिगत तनाव, 2028 चुनाव से पहले BJP पर दबाव

यह विवाद MP में जातिगत समीकरण बिगाड़ सकता है। ब्राह्मण समाज BJP का पारंपरिक वोट बैंक है। कांग्रेस ने कहा, "मोहन सरकार IAS अधिकारियों को संरक्षण दे रही।" LJP का बिहार में उठाना NDA के लिए असहज है। विश्लेषकों का कहना है कि 2028 चुनाव से पहले BJP को सावधान रहना होगा।

बयान का असर दूर तक, कब होगी कार्रवाई?

IAS संतोष वर्मा का बयान MP से निकलकर बिहार तक पहुंच गया। राजू तिवारी की FIR मांग ने मुद्दे को राष्ट्रीय रंग दे दिया। पूर्व स्पीकर शर्मा का भरोसा है कि कार्रवाई होगी, लेकिन जांच का इंतजार। क्या सरकार FIR दर्ज करेगी? वनइंडिया हिंदी अपडेट लाता रहेगा।

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