तिब्‍बत में चीन को घेरेगा IAF का राफेल फाइटर जेट, इस अहम बेस पर भी होगी तैनाती

नई दिल्‍ली। भारतीय वायुसेना (आईएएफ) की फाइटर स्‍क्‍वाड्रन के साथ जुड़ने के लिए फ्रांस की राजधानी पेरिस से पांच राफेल जेट आखिरकार भारत के लिए रवाना हो चुके हैं। पेरिस स्थित भारतीय दूतावास की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है। ये जेट मीडिल ईस्‍ट में एक स्‍टॉप लेकर फिर भारत आएंगे। 29 जुलाई को राफेल अंबाला स्थित एयरफोर्स स्‍टेशन में आईएएफ का हिस्‍सा बन जाएगा। इस फाइटर जेट की एक स्‍क्‍वाड्रन पश्चिम बंगाल के हाशिमारा में होगी और इस एयरबेस पर राफेल की तैनाती भारत के रणनीतिक फैसले को दर्शाती है। अभी पांच राफेल जेट्स आ रहे हैं और माना जा रहा है कि बाकी के जेट्स साल 2022 तक भारत आ जाएंगे।

राफेल जेट की दूसरी स्‍क्‍वाड्रन हाशिमारा

राफेल जेट की दूसरी स्‍क्‍वाड्रन हाशिमारा

हाशिमारा एयरबेस पर राफेल जेट की दूसरी स्‍क्‍वाड्रन होगी। यह जगह पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार में है और नॉर्थ बंगाल के तहत आता है। यह जगह बहुत छोटी लेकिन रणनीतिक तौर पर इसकी अहमियत काफी है। हाशिमारा एयरफोर्स स्‍टेशन, भूटान बॉर्डर के एकदम करीब है। हाशिमारा और तिब्‍बत की दूरी करीब 384 किलोमीटर है। राफेल जेट कुछ ही मिनटों में तिब्‍बत के दूसरे सबसे बड़ा शहर शिगात्‍से का एयरपोर्ट पर लैंड कर सकता है। शिगात्‍से एक मिलिट्री एयरपोर्ट है जिसका प्रयोग असैन्‍य मकसद से भी किया जाता है। इसके अलावा तिब्‍बत की राजधानी ल्‍हासा की दूरी भी हाशिमारा एयरबेस से करीब 364 किलोमीटर है।

भूटान बॉर्डर के एकदम करीब

सूत्रों के मुताबिक हाशिमारा पर सन् 1993 रनवे तैयार हुआ था लेकिन इसे दोबारा से निर्मित किया गया है। हाशिमारा एयरबेस, सिलीगुड़ी से करीब 128 किलोमीटर दूर है और यह जगह भारत-भूटान के बॉर्डर के लिए काफी अहमियत रखती है। इसके अलावा यह एयरबेस सिलीगुड़ी कॉरिडोर में आता है जिसके उत्‍तर में चीन है। हाशिमारा एयरबेस राफेल से पहले मिग-27ML एयरक्राफ्ट का घर था। साल 2017 में इन एयरक्राफ्ट को रिटायर कर दिया गया था। अब यहां से सुखोई-30 एमकेआई जेट्स टेक ऑफ करते हैं जो भारत का टॉप फाइटर जेट है।

तिब्‍बत से चीनी फाइटर जेट् नहीं कर सकते टेकऑफ

तिब्‍बत से चीनी फाइटर जेट् नहीं कर सकते टेकऑफ

तिब्‍बत में चीन का एयरबेस है लेकिन उनके फाइटर जेट्स वहां से ऑपरेट नहीं कर सकते हैं। इस फाइटर जेट्स में भारतीय पायलट के एक ग्रुप को पहले ही ट्रेनिंग दी जा चुकी है। इसके अलावा 24 और पायलट को ट्रेनिंग दी गई है। राफेल की पहली कॉम्‍बेट यूनिट वही गोल्‍डन एरो स्‍क्‍वाड्रन होगी जिसे सन् 1999 में कारगिल की जंग के समय आईएएफ के पूर्व चीफ एयर मार्शल बीएस धनोआ ने कमांड किया था। आईएएफ की 17 स्‍क्‍वाड्रन ने कारगिल की जंग के समय मिग-21 को ऑपरेट किया था।

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    2015 में 36 जेट्स की डील

    2015 में 36 जेट्स की डील

    साल 2007 में 126 एमएमआरसीए के लिए टेंडर निकाले गए थे। इसके बाद एयरफोर्स ने ट्रायल किया और फिर राफेल को चुना गया। तीन वर्षों तक चली बातचीत के बाद जून 2015 में इस डील को खारिज कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल 2015 में केंद्र की मोदी सरकार ने 36 राफेल फाइटर्स को खरीदने का फैसला किया। इसके अलावा तत्‍कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने उस समय स्‍वीडन में बने ग्रिपेन और अमेरिकी फाइटर जेट एफ-16 को खरीदने के बारे में भी जानकारी दी थी।अंबाला और हाशिमारा में राफेल जेट की तैनाती को रक्षा मंत्रालय का वह फैसला माना जा रहा है जिसके जरिए युद्ध के समय पाकिस्‍तान या चीन को पलभर में जवाब दिया जा सकता है।

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