IAF Crash Report: 5 साल में 34 हवाई दुर्घटनाएं, 19 के पीछे सिर्फ 'ह्यूमन एरर' कैसे? जनरल रावत भी बने शिकार!
IAF Crash Report: भारतीय वायुसेना (IAF) में पिछले 5 सालों (2017-2022) में कुल 34 हवाई दुर्घटनाएं हुईं। संसदीय स्थायी समिति (SCOD) की एक ताजा रिपोर्ट ने इन दुर्घटनाओं के पीछे मानवीय भूल और तकनीकी खामियों को मुख्य कारण बताया है।
हालांकि, वायुसेना की दुर्घटना दर में पिछले दो दशकों में गिरावट आई है, लेकिन पुरानी समस्याएं अभी भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। इन दुर्घटनाओं में Mi-17 हेलिकॉप्टर की घटना शामिल है, जिसमें देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की मौत हो गई थी।

इस सप्ताह की शुरुआत में संसद में तीनों सेनाओं की अनुदान मांगों पर पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, 13वीं पंचवर्षीय रक्षा योजना अवधि 2017-22 में हुई 34 दुर्घटनाओं में से 19 दुर्घटनाएं मानवीय भूल (एयरक्रू) के कारण हुईं और 9 तकनीकी खराबी के कारण हुईं। आइए विस्तार से डालते हैं नजर...
5 सालों की दुर्घटनाओं का विवरण
रिपोर्ट में दुर्घटनाओं का वर्षवार आंकड़ा दिया गया है...
- 2017-18: 8 दुर्घटनाएं
- 2018-19: 11 दुर्घटनाएं
- 2019-20: 3 दुर्घटनाएं
- 2020-21: 3 दुर्घटनाएं
- 2021-22: 9 दुर्घटनाएं
2018-19 और 2021-22 में बढ़ी दुर्घटनाएं:
इन वर्षों में हुई दुर्घटनाओं में जनरल बिपिन रावत की Mi-17V5 हेलिकॉप्टर दुर्घटना जैसी हाई-प्रोफाइल घटनाएं शामिल थीं।
मुख्य कारण: क्यों होती हैं ये दुर्घटनाएं?
रिपोर्ट में 34 दुर्घटनाओं के पीछे कारणों को स्पष्ट किया गया है...
- मानवीय भूल (एयरक्रू): 19 घटनाएं
- तकनीकी खामी: 9 घटनाएं
- अन्य कारण: पक्षी हमले और विदेशी वस्तु क्षति
Mi-17V5 हेलिकॉप्टर दुर्घटना:
दिसंबर 2021 में तमिलनाडु के नीलगिरी में हुई इस घटना में पायलट का स्थानिक भटकाव (spatial disorientation) और मौसम की अचानक खराबी मुख्य कारण माने गए।
मिग-21 और पुराने विमानों की भूमिका
मिग-21: पुरानी तकनीक और बार-बार होने वाली तकनीकी समस्याओं के कारण मिग-21 दुर्घटनाओं में शामिल रहा। इसे "उड़ने वाला ताबूत" (Flying Coffin) भी कहा जाता है।
अन्य विमान जो दुर्घटनाओं में शामिल रहे:
-
Mi-17 हेलिकॉप्टर
- जगुआर फाइटर जेट
- सु-30 लड़ाकू विमान
- किरण ट्रेनर जेट
- प्रशिक्षण और रखरखाव प्रोटोकॉल में सुधार।
- दुर्घटनाओं की जांच से प्राप्त सिफारिशों का कार्यान्वयन।
- पुराने विमानों को धीरे-धीरे हटाना।
- 2000-2005: 0.93 प्रति 10,000 उड़ान घंटे।
- 2017-2022: 0.27 प्रति 10,000 उड़ान घंटे।
- 2020-2024: 0.20 प्रति 10,000 उड़ान घंटे।
- नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान वायुसेना से संघर्ष में IAF ने मिग-21 और एक Mi-17V5 हेलिकॉप्टर खो दिया।
- मिग-21 के पायलट ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान पाकिस्तान में गिरफ्तार हुए।
- Mi-17 हेलिकॉप्टर को गलती से IAF की मिसाइल ने मार गिराया, जिसमें छह कर्मियों और एक नागरिक की जान गई।
- पायलट प्रशिक्षण: प्रशिक्षण के स्तर को और बेहतर करना होगा।
- पुराने विमानों को हटाना: मिग-21 जैसे विमानों को जल्द से जल्द चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर किया जाना चाहिए।
- तकनीकी अपग्रेडेशन : विमानों की मरम्मत और तकनीकी सुधारों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
सुरक्षा सुधार: क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
रक्षा मंत्रालय ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई उपाय किए हैं...
दुर्घटनाओं की दर में गिरावट:
बड़ी दुर्घटनाएं और उनके प्रभाव
बालाकोट हवाई हमले (2019):
चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि दुर्घटनाओं की संख्या कम हो रही है, लेकिन मानवीय त्रुटियों और तकनीकी समस्याओं को पूरी तरह खत्म करना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।
भारतीय वायुसेना ने सुरक्षा प्रोटोकॉल में सुधार कर दुर्घटनाओं की दर को कम किया है। लेकिन मानवीय भूल और तकनीकी समस्याओं का समाधान करने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे। पुराने विमानों की जगह नई तकनीकों को शामिल करना और पायलट प्रशिक्षण को और अधिक कुशल बनाना भविष्य में वायुसेना की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
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