I-PAC ED Raid Case: ममता बनर्जी के खिलाफ ईडी की याचिका पर SC में फिर टली सुनवाई, TMC ने क्या रखी दलील?
I-PAC ED Raid Case Update: प्रवर्तन निदेशालय (ED) और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच चल रही कानूनी जंग एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंची है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार, 18 फरवरी को अहम सुनवाई हुई।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 मार्च की तारीख तय की है।

अदालत में ईडी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के पुलिस अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने टीएमसी से जुड़ी फर्म I-PAC के दफ्तर में की जा रही तलाशी अभियान में जानबूझकर अड़ंगा डाला था।
I-PAC ED Raid Case मामले में Supreme Court मे आज क्या हुआ?
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान ED की ओर से अदालत को बताया गया कि वह पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की तरफ से दाखिल जवाबों के खिलाफ जवाबी हलफनामा (Rejoinder Affidavit) दाखिल करेगा। इस पर अदालत ने एजेंसी को आवश्यक समय देते हुए मामले को 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्र और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कार्यवाही के दौरान ED ने अपना पक्ष रखा। जांच एजेंसी की ओर से कोर्ट को सूचित किया गया कि वे पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए जवाबों पर अपना रिज्वाइंडर एफिडेविट आज ही दाखिल कर देंगे।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाबी हलफनामा दाखिल करने और दलीलों को अंतिम रूप देने के लिए थोड़ा और समय मांगा। पीठ ने सभी पक्षों सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले को 18 मार्च तक के लिए स्थगित कर दिया है।
Kalyan Banerjee SC Statement: टीएमसी का पलटवार- हम तैयार थे
टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने सुनवाई टलने के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, हम आज सुप्रीम कोर्ट में बहस के लिए पूरी तरह तैयार थे। लेकिन सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। अदालत ने उनकी मांग स्वीकार कर ली है और अब 18 मार्च की तारीख तय की गई है।
ED vs Mamata Banerjee का क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब ईडी की एक टीम कोलकाता में I-PAC (Indian Political Action Committee) के कार्यालयों पर छापेमारी करने पहुंची थी। यह फर्म टीएमसी के चुनाव अभियानों और रणनीतियों पर काम करती है।
ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान स्थानीय पुलिस और राज्य सरकार के अधिकारियों ने बाधा उत्पन्न की, जिससे जांच की गोपनीयता और प्रक्रिया प्रभावित हुई। बंगाल सरकार ने इन ED के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे केंद्र की बदले की राजनीति और संघीय ढांचे का अपमान बताया है।
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर राज्य बनाम केंद्र (State vs Centre) की संवैधानिक स्थिति और जांच एजेंसियों के अधिकारों पर सवाल खड़ा करता है। सुप्रीम कोर्ट को अब यह तय करना है कि क्या राज्य सरकार ने वाकई अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर केंद्रीय एजेंसी की जांच में रुकावट डाली थी।












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