Howdy Modi के 10 बड़े सियासी और कूटनीतिक मायने जो पूरी दुनिया पर डालेंगे असर
नई दिल्ली- अमेरिका में ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में दुनिया के सबसे ताकतवर लोकतंत्र के राष्ट्रपति और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के बीच की करीब डेढ़ घंटे की जुगलबंदी में पूरी दुनिया के लिए कई संदेश पढ़े जा सकते हैं। इस प्रोग्राम की अहमियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुनिया भर के एक अरब से ज्यादा देशों तक हाउडी मोदी इवेंट के सिग्नल सीधे पहुंच रहे थे। इस इवेंट ने एक ही रात में भारत-अमेरिकी संबंधों को एक नया आयाम ही नहीं दिया है, इंडो-यूएस के संबंधों पर पूरे विश्व की नजरें भी टिका दी हैं। राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों से जो बातें निकलकर सामने आई हैं, उससे यह साफ हो गया है कि यह कार्यक्रम दोनों देशों के लिए परस्पर लाभकारी साबित होने जा रहा है, जिसका प्रभाव बाकी देशों पर भी निश्चित रूप से पड़ेगा। आइए 10 प्वाइंट में समझते हैं इस मेगा इवेंट के मायने क्या हैं-

इस्लामिक आतंकवाद को सख्त संदेश
अपने भाषण के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने इस्लामिक आतंकवाद पर चिंता जताकर भारत को वह मौका दे दिया, जिसके बारे में शायद उससे पहले किसी ने नहीं सोचा होगा। अमेरिका ने वह बात कर दी, जिससे भारत तीन दशकों से ज्यादा वक्त से परेशान है और दुनिया का शायद ही कोई देश इस संकट से अछूता है। ट्रंप ने पूरी तरह से स्पष्ट किया है कि दोनों देश इस्लामिक आतंकवाद के खतरे से परेशान हैं और अपने नागरिकों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यही वजह है कि पीएम मोदी ने स्टेडियम में मौजूद 50 हजार अमेरिकी-भारतीयों के साथ मिलकर उन्हें गर्मजोशी के साथ स्टैंडिंग ओवेशन देने में जरा भी देर नहीं की। ट्रंप के इस बयान के दूरगामी परिणाम होने वाले हैं।

घिर गया पाकिस्तान
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस्लामिक आतंकवाद का जिक्र करके प्रधानमंत्री मोदी को अमेरिका को वह बात याद दिलाने का मौका दे दिया, जो अफगानिस्तान में बुरी तरह फंसने के बाद से आतंकवाद को नजरअंदाज करता दिख रहा था। पीएम मोदी ने तुरंत भारत और अमेरिका पर गुजरे आतंकवाद के काले साए का जिक्र छेड़कर पाकिस्तान को इतने बड़े मंच पर फिर से बेनकाब कर दिया। उन्होंने ट्रंप समेत अमेरिकियों को भी याद दिला दिया कि हमें भूलना नहीं चाहिए कि अमेरिका के 9/11 और भारत के 26/11 आतंकी वारदातों के साजिशकर्ता पाकिस्तान में ही पाए गए। कमाल की बात है कि ट्रंप और मोदी किसी ने भी एक बार भी पाकिस्तान या इमरान खान का नाम नहीं लिया। लेकिन, मोदी ने ट्रंप की मौजूदगी में यह बात साबित कर दिया कि पाकिस्तान ही ग्लोबल टेररिज्म की जड़ है।

जम्मू-कश्मीर पर साफ संदेश
27 सितंबर को इमरान खान यूएन जनरल असेंबली में कश्मीर का मुद्दा उठाने की तैयारी करके अमेरिका गए हैं। लेकिन, पीएम मोदी ने हाउडी मोदी के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी में दुनिया को बता दिया कि जो लोग अपने देश का शासन ठीक से नहीं चला पा रहे हैं, उन्हें आर्टिकल 370 हटाने से ज्यादा तकलीफ हो रही है। उन्होंने साफ कहा कि जो लोग आतंकवाद को संरक्षण देते हैं और उसे बढ़ावा देते हैं, वही लोग कश्मीर का राग अलापते हैं। यानि, इमरान भले ही संयुक्त राष्ट्र आमसभा में अपना वक्त जाया करें, लेकिन उनका भविष्य राउडी मोदी में ही लिखा जा चुका है। पीएम मोदी ने इस मंच से दुनिया को बता दिया कि आर्टिकल 370 के कारण आतंकवादी और अलगाववादी हालात का दुरपयोग कर रहे थे, लेकिन अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों को बराबर का हक मिला है।

सीमा सुरक्षा
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि सीमा सुरक्षा भारत और अमेरिका दोनों देशों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। जब वे सीमा सुरक्षा पर बात कर रहे थे तो पीएम मोदी क्लैपिंग कर रहे थे। जाहिर है कि भारत का मुख्य रूप से दो ही देशों के साथ सीमा पर तकरार होता है। ये देश हैं पाकिस्तान और चीन। जाहिर है कि अगर ट्रंप ने इसमें भारत का जिक्र किया है तो उन्होंने सोच-समझकर ही ये मुद्दा उठाया है। जबकि, साऊथ चाइना सी में वह खुद ही चीन से परेशान है और वहां भारत का भी स्टेक लगा हुआ है।

भारत-अमेरिका के रिश्तों में गर्माहट
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को अमेरिका का महान और सबसे सच्चा दोस्त बताया है। इसके साथ उन्होंने ये भी कहा है कि वे भारत के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। लगे हाथ उन्होंने ये भी कहा कि अभी व्हाइट हाउस में भी भारत का सच्चा मित्र मौजूद है। इसके जवाब में पीएम मोदी ने दोनों देशों के मौजूदा रिश्ते के बारे में कहा है कि आज इंडो-यूएस तालमेल में नई हिस्ट्री और नई केमिस्ट्री बन रही है और पूरी दुनिया इसकी गवाह है।

पर्सनल बॉन्डिंग
इस इवेंट में मोदी-ट्रंप के बीच की पर्सनल बॉन्डिंग भी सामान्य नहीं, बल्कि बहुत ही घनिष्ठ नजर आई। एक-दूसरे का हाथ पकड़कर चलना, कंधे पर हाथ डालकर 9 साल के बच्चे के साथ सेल्फी लेना अपने आप में काफी कुछ कह देते हैं। इस मंच का उपयोग ट्रंप ने मोदी को जन्मदिन की बधाई देने के लिए किया तो मोदी ने उनके साथ लगातार बेहतर हो रहे संबंधों का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि वे जब भी ट्रंप से मिले हैं, उनमें वही गर्मजोशी, दोस्ताना और ऊर्जा अनुभव की है। इस बॉन्डिंग का जिक्र पीएम मोदी ने दोनों देशों के नागरिकों के बीच बेहतर हो रहे रिश्तों के रूप में भी किया। यही वजह है कि जब ट्रंप ने भारत आने की इच्छा जताई तो पीएम मोदी ने उन्हें आमंत्रित करने में जरा भी देर नहीं लगाई।

'अबकी बार ट्रंप सरकार'
मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लोकप्रिय प्रधानमंत्री हैं और ट्रंप दुनिया के सबसे ताकतवर देश के चुने हुए राष्ट्रति। मोदी इस साल दोबारा चुनकर प्रधानमंत्री बने हैं तो ट्रंप अगली बार फिर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसे मौके पर 50 हजार अमेरिकी-भारतीयों के बीच पीएम मोदी ने भारत में कामयाब हुआ अपना चुनावी नारा (यह आलोचनाओं के दायरे में है) एक तरह से अपने दोस्त के लिए लगाकर एक नई कूटनीति का आगाज कर दिया है। 'अबकी बार ट्रंप सरकार' कहकर मोदी ने एक तरह से भारतीय-अमेरिकी के बीच ट्रंप का चुनावी बिगुल फूंक दिया है।

दोनों देशों में निवेश
हाल के दिनों में अमेरिका का चीन के साथ भयंकर ट्रेड वॉर चल रहा है। भारत में कुछ चीजों में इंपोर्ट ड्यूटी को लेकर कुछ समय पहले तक सार्वजनिक तौर पर ट्रंप अपनी नाराजगी जता चुके हैं। लेकिन, हाउडी मोदी इवेंट में उनकी ट्रेड को लेकर सारी नाराजगी काफूर होती नजर आई। उन्होंने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि अमेरिका में अभी भारत जितना निवेश कर रहा है, वैसा पहले कभी नहीं हुआ और उसी तरह अमेरिका जितना भारत में कर रहा है, वैसा कभी नहीं हुआ। पीएम मोदी की नीतियों की तारीफ करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी विकास की नीतियों के चलते भारत में करीब 30 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं, जो कि अविश्वसनीय है।

फेल हुआ पाकिस्तान
पाकिस्तान को अंदाजा था कि मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी अगर चल गई तो कश्मीर के मुद्दे पर उसके सारे किये-कराए पर पानी फिर सकता है। इसलिए उसने ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम के बाहर विरोध प्रदर्शन की पूरी साजिश रच डाली थी। जानकारी के मुताबिक इमरान ने अपनी नापाक योजना को अंजाम देने के लिए अपने एक मंत्री तक वहां पर तैनात कर दिया था। उन लोगों ने मोदी और ट्रंप का विरोध करने के लिए कुछ अलगाववादी और तथाकथित मानवाधिकार संगठनों के कुछ लोग भी जुटा रखे थे। उन्हें हवा देने के लिए कुछ पश्चिमी मीडिया के लोग भी पहुंचे थे। लेकिन, वो कुछ कर नहीं पाए और पूरा इवेंट ऐतिहासिक बन गया।

लोकतंत्र का मंत्र
पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच जिस तरह का तालमेल बढ़ा है, उसके पीछे दोनों देशों का आधार, यानि मजबूत लोकतंत्र भी है। इसका जिक्र राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में भी किया है। वे बोले कि हम दोनों देश लोकतंत्र के प्रति समर्पित हैं और इसी के चलते आज हमारे संबंध अबतक की सबसे ज्यादा मजबूत स्थिति में पहुंच चुकी है। अमेरिकी राष्ट्रपति का यह अंदाज भी पाकिस्तान और चीन को चिढ़ा सकता है, क्योंकि पाकिस्तान में कभी लोकतंत्र को मजबूत बनने ही नहीं दिया गया है और हॉन्गकॉन्ग में चीन की तानाशाही के खिलाफ बगवात शुरू हो चुकी है।
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