कैसे दिल्ली पुलिस करेगी Republic Day पर हुए नुकसान की भरपाई, जानिए

नई दिल्ली- दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा में करीब 400 पुलिस वाले जख्मी हुए। इनमें से कुछ अभी भी आईसीयू में हैं। दंगाइयों ने सार्वजनिक संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचाया था। यहां तक कि राजपथ पर परेड से लालकिले तक आई झाकियों को भी नहीं बख्शा गया। लेकिन, दिल्ली पुलिस की मानें तो सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले बच नहीं पाएंगे। उन्हें पूरे नुकसान की भरपाई करनी होगी और इस प्रक्रिया पर दिल्ली पुलिस काम शुरू भी कर चुकी है। यह जानकारी दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एस एन श्रीवास्तव ने दी है।

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    किसान नेताओं ने समझौते के सम्मान का भरोसा दिया था-पुलिस

    किसान नेताओं ने समझौते के सम्मान का भरोसा दिया था-पुलिस

    इकोनॉमिक्स टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में दिल्ली के पुलिस कमिश्नर एस एन श्रीवास्तव ने उन सभी सवालों का जवाब देने की कोशिश की है, जो 26 जनवरी को किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा की वजह से उठ रहे हैं। इन्हीं में एक सवाल ये भी है कि जब पुलिस को 25 तारीख की रात को ही इल्म हो गया था कि किसान ट्रैक्टर रैली के लिए पुलिस से किए गए वादे पर कायम नहीं रहने वाले हैं तो उन्हें रोकने के कदम क्यों नहीं उठाए गए। इसपर दिल्ली पुलिस के कप्तान का कहना है कि हां, 'हमें सूचना मिली थी कि किसान उस वादे पर कायम नहीं रहने वाले हैं, जो अंडटरटेकिंग उन्होंने हमें दिए थे। एक जिम्मेदार सरकारी संगठन के तौर पर हमने इन आशंकाओं के बारे में संबंधित किसान नेताओं से बात भी की थी। इसपर उन्होंने हमें आश्वस्त किया था कि उनका हालात पर पूरी तरह से नियंत्रण रहेगा और पुलिस के साथ किए गए समझौते का सम्मान किया जाएगा। हमने तो पांच दौर की औपचारिक बातचीत की थी। लेकिन,चाहे हमने उन्हें किसी रूट की मंजूरी दी थी या नहीं, वह उसपर निकल पड़े....'

    हम चाहते तो किसानों को रोक सकते थे-पुलिस

    हम चाहते तो किसानों को रोक सकते थे-पुलिस

    लेकिन, जब उनसे यह पूछा गया कि पुलिस आत्मरक्षा ( self-defence) में तो शक्ति का इस्तेमाल कर ही सकती थी। इसपर श्रीवास्तव का कहना है, 'देखिए ये सब रणनीतिक फैसले होते हैं। आप अचानक ऐसे फैसले को बदल नहीं सकते, क्योंकि यह बहुत ही सोच-विचार और योजना के आधार पर तैयार की जाती है। हम चाहते तो किसानों को रोक सकते थे, लेकिन हमने सिर्फ पुलिसवालों की नहीं, दूसरों की जान की भी परवाह की। हम जिंदगियों का नुकसान नहीं चाहते थे। हमने एक रणनीतिक फैसला लिया और हमें ऐसे मुद्दों को सार्वजनिक नहीं करना चाहेंगे। हमने एक फैसला लिया और वह सही फैसला था।'

    'जिन्होंने अपराध किया, वही भरपाई करेंगे'

    'जिन्होंने अपराध किया, वही भरपाई करेंगे'

    एक आंकड़े के मुताबिक किसानों की ट्रैक्टर रैली के दौरान उपद्रवी किसानों की ओर से हुई हिंसा में डीटीसी की 40 बसें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनके अलावा दंगाइयों ने 428 बैरिकेड तोड़े हैं, 30 पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया है, 6 कंटेनर और सैकड़ों डिवाइडर तोड़ डाले हैं। लालकिले की संपत्ति को भी बहुत ज्यादा डैमेज किया गया है। इसपर दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कहा है कि 'प्रदर्शनकारी जिम्मेदार होंगे। नॉर्थईस्ट दिल्ली में हुए दंगों में भी जस्टिस एसएन गौर की अगुवाई वाला एक आयोग बनाया गया है, जो नुकसान और भरपाई को देख रहा है। यहां भी जिन लोगों का नुकसान हुआ है, उनसे आवेदन मांगे गए हैं। उसी तरह इस मामले में भी जिन्होंने अपराध किया है, उन्हीं को ही नुकसान की भरपाई करनी पड़ेगी।' गौरतलब है कि कुछ वीडियो में लालकिले की प्राचीर से कलश उतारते हुए उपद्रवी भी रिकॉर्ड किए गए हैं। कुछ देर पहले राजपथ पर देश का सम्मान बनी झाकियों तक को भी नहीं छोड़ा गया।

    स्पेशल कोर्ट में ट्रायल चल सकता है

    स्पेशल कोर्ट में ट्रायल चल सकता है

    दिल्ली पुलिस के मुताबिक इस मामले में एक भी अपराधी बच नहीं पाएंगे। उन सबकी शिनाख्त की जाएगी। यही नहीं नॉर्थईस्ट दिल्ली दंगों की तरह ही सरकार और कोर्ट से चर्चा के बाद इसमें भी ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्ट बनाए जाएंगे। उससे इसमें सिर्फ यही अंतर है कि यहां सिर्फ एक व्यक्ति की मौत लापरवाही से ट्रैक्टर चलाने की वजह से हुई है। हालांकि, उन्होंने लालकिले पर धार्मिक झंडा फहराने वाले शख्स की शिनाख्त होने के बारे में कोई भी टिप्पणी नहीं की और जांच का विषय बताकर कुछ भी कहने से मना कर दिया।

    क्या उस दिन की घटना के पीछे गहरी साजिश थी?

    क्या उस दिन की घटना के पीछे गहरी साजिश थी?

    पुलिस कमिश्नर ने इतना जरूर बताया कि उस दिन की घटना के लिए आरोंपियों पर दंगा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, एपिडमिक ऐक्ट, सरकारी काम में गैरकानूनी बाधा डालने और पुलिसवालों को जख्मी करने के साथ ही कई तरह के चार्ज लगाए जाएंगे। इसके अलावा पुलिस ने अनलॉफुल ऐक्टिविटीज (प्रिवेंशन) ऐक्ट (under the Unlawful Activities (Prevention) Act )और देशद्रोह ( sedition) के तहत भी मामला दर्ज किया है और जांच में लालकिले की वारदातों के लिए यह धाराएं और भी जोड़ी जाएंगी। लेकिन, जब उनसे यह पूछ लिया गया कि इतनी बड़ी घटना क्या किसी साजिश का नतीजा थी तो वे बोले कि जबतक जांच में कुछ नहीं निकल जाता मैं इसपर किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करूंगा।

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