टिकटॉक सहित 59 ऐप्स पर पाबंदी लागू कैसे होगी?

सोमवार देर रात भारत सरकार ने 59 स्मार्टफोन ऐप्स पर पाबंदी लगाने का फ़ैसला किया है.
आँकड़ों के मुताबिक़ भारत में टिकटॉक (म्यूजिकली के साथ) के तकरीबन 30 करोड़, लाइकी के तकरीबन 18 करोड़, हेलो के 13 करोड़, शेयर-इट, यूसी ब्राउजर के 12 करोड़ के आसपास यूजर्स हैं. ये आँकड़े 2019 के हैं.
ट्विवटर पर इन आँकड़ो को भारतीय विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रवक्ता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के पूर्व राजदूत सैयद अकबरुद्दीन ने ट्विटर पर साझा किया है.
ये आँकड़े ये बताने के लिए काफ़ी है कि इन ऐप्स की भारत में उपलब्धता कितनी ज़्यादा है.
Making sense.
— Syed Akbaruddin (@AkbaruddinIndia) June 30, 2020
Since I don’t use any of the Apps listed in @GoI_MeitY list of 59 blocked yesterday, I was trying to make sense of their importance..
This chart by @mattsheehan88 of the top 10 non gaming Apps downloaded in 2019 in India helped clarify the situation. pic.twitter.com/LqAMJE2vde
बहुत मुमकिन है कि अगर आप इनमें से किसी भी ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो वो आपके फ़ोन में अब भी काम कर रहा है.
कई लोगों का शेयर-इट काम कर रहा है, तो कई लोगों का टिकटॉक और कई लोगों का कैम- स्कैनर. लेकिन अगर आप चाहे कि अब नए सिरे से टिकटॉक को डाउनलोड कर लें तो ये अब नहीं हो पाएगा. ऐपल और गूगल दोनों ने इसे अपने ऐप स्टोर से डिलीट कर दिया है. लेकिन कुछ मोबाइल्स पर ये अब भी डाउनलोड हो रहा है.
Tik Tok removed from Apple's App Store & Google Play Store. Government of India yesterday banned 59 apps "which are prejudicial to sovereignty and integrity of India, defence of India, security of the state and public order”. pic.twitter.com/f2LtyqXTtN
— ANI (@ANI) June 30, 2020
ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर ये बैन कैसे काम करेगा?
सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहीं पर भी चीन का ज़िक्र नहीं है, लेकिन जिन ऐप्स को प्रतिबंधित किया गया है, उनमें से कई सारे ऐप्स या तो चीन में बने हैं या उनका स्वामित्व चीनी कंपनियों के पास है. ना ही सरकार की प्रेस रिलीज़ में इस बात का भी जिक्र किया है कि सरकार इसके आगे क्या करने वाली है.
यही समझने के लिए हमने बात की आईटी एक्ट और साइबर क़ानून के जानकार विराग गुप्ता से.

उनके मुताबिक इस बैन को लागू करने में सरकार को चार क़दम उठाने पड़ेंगे.
पहला ये कि केंद्र सरकार की ओर से आईओएस और एंडरॉयड प्लेटफॉर्म को उनके ऐप स्टोर से एक निश्चित समयसीमा के अंदर हटाने का आदेश. ऐसा करने पर आप इन ऐप्स को आगे डाउनलोड नहीं कर पाएँगे क्योंकि इन्ही दोनों जगह से आप इन ऐप्स को डाउनलोड कर सकते हैं.
दूसरा क़दम ये होगा कि जिन लोगों के फोन पर ये ऐप काम कर रहा है, वहाँ इसे बंद किया जाए. इसके लिए सरकार को इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को आदेश जारी करना होगा ताकि डाउनलोड किए गए ऐप की सर्विस ख़त्म हो जाए.
आँकड़ों की बात करें, तो देश में क़रीब 50 करोड़ स्मार्ट फोन हैं, जिनमें से तकरीबन 30 करोड़ लोग बैन किए गए 59 ऐप्स का इस्तेमाल कर रहे हैं.
तीसरा क़दम ये हो सकता है कि सरकार उपभोक्ताओं से इस ऐप को डाउनलोड करने से मना करे. लेकिन सरकारी आदेश में इसका ज़िक्र अभी तक नहीं है. सरकारी आदेश में ना तो ये कहा गया है कि आप इन ऐप को डाउनलोड नहीं कर सकते या ऐसा करना ग़ैर-क़ानूनी है.
इसलिए विराग मानते हैं कि सरकारी आदेश को पढ़ कर ऐसा लगता है कि सरकार गूगल, ऐपल और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के ज़रिए ही ये ऐप बैन करना चाहती है.
इस बैन को लागू करने के लिए चौथा तरीक़ा भी है. जैसे पिछले दिनों सरकार ने पोर्न साइट पर बैन लगाया था. कई साइट को लोग चोर दरवाज़े के ज़रिए आज भी खोल ही लेते हैं.
सरकार के ताज़ा बैन के बाद भी ऐसा ना हो कि इन ऐप्स का अनाधिकृत वर्ज़न(ब्लैक) मार्केट में उपलब्ध हो. केंद्र सरकार को इस पर ध्यान देने की ज़रूरत होगा.
विराग कहते हैं कि सेकेंडरी मार्केट से इन ऐप्स का इस्तेमाल होगा, ये कोई नई बात नहीं है. लेकिन वो साथ में ये भी जोड़ते हैं कि सेकेंडरी मार्केट के बिज़नेस से इन कंपनियों को सीधे तौर पर फ़ायदा नहीं पहुँचेगा.

2018 के अक्तूबर में भारत के दूरसंचार विभाग ने देश में इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराने वाले तमाम सर्विस प्रोवाइडर्स को आदेश दिया था कि वे 827 पॉर्न वेबसाइटों को ब्लॉक कर दें. ऐसा ही आदेश 2015 में भी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिया था. जिसमें लगभग 850 पोर्न वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया गया था.
2018 के आदेश के बाद पोर्न वेबसाइटों को प्रतिबंधित करने की बात सामने आने के बाद ही पॉर्नहब ने अपनी एक दूसरी वेबसाइट भारतीय दर्शकों के लिए तैयार कर दी. इसकी जानकारी उन्होंने अपने ट्विटर पर भी दी. विराग इसी तरीक़े के इस्तेमाल की बात कर रहे हैं.
In response to Pornhub getting censored and blocked in India, our fans there can now fully access the site at https://t.co/xWrwXOE5sX
— Pornhub ARIA (@Pornhub) October 26, 2018
इस बारे में हमने देश के पूर्व नेशनल साइबर सिक्योरिटी को-ओर्डिनेटर गुलशन राय से बात की. उनके मुताबिक़ भारत सरकार ने अपने आदेश से स्पष्ट रूप से कह दिया है कि ये ऐप कंपनियाँ डेटा क़ानून और निजता के क़ानून का उलंघन कर रही हैं.
उनके ख़िलाफ़ सरकार के पास बहुत सारी शिकायतें मौजूद हैं. लेकिन अब सरकार और कंपनियों को आपस में बैठ कर इस पर बात करने की ज़रूरत है.
उनके मुताब़िक सरकार के पास तकनीकी रूप से कई तरीक़े हैं इन ऐप्स को ब्लॉक करने के और कंपनियों के पास भी तरीक़े हैं दूसरे तरीक़े से इस ब्लॉक को बाइपास करने के. लेकिन कंपनियों की मार्केट में जो साख़ है उसके मद्देनज़र वो ऐसा करना नहीं चाहेंगी और उन्हें ऐसा करना भी नहीं चाहिए.
साईबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल का मानना है कि बैन लगाना आसान है पर उसे लागू करे रखना मुश्किल हैं.
बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि जब जब ऐसे बैन लागू हुए हैं उनके इस्तेमाल में इजाफ़ा देखने को मिला है. उनके मुताबिक़ चूंकि ये ऐप दूसरे देशों में भी चलते हैं. तो अधिकांश भारतवासी वर्चुअल प्राईवेट नेटवर्क (VPN) के ज़रिए इसे इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं.
सरकार ज़्यादा से ज़्यादा वर्चुअल प्राईवेट नेटवर्क वालों को भी ऐसा करने से मना कर सकती है. लेकिन इसका बहुत फ़ायदा होते नहीं दिखा है.

बैन पर अमल नहीं किया गया तो क्या होगा?
विराग कहते हैं कि भारत के संघीय ढाँचे में ये एक मसला है. वो कहते हैं कि ऐसे ऐप्स को बैन करने का अधिकार तो केंद्र सरकार के पास है. लेकिन लॉ एंड आर्डर राज्य सरकारों के पास हैं.
साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल कहते हैं कि आईटी एक्ट के तहत इसको ना मानने पर कंपनी के ख़िलाफ़ धारा 66 और धार 43 के अंतर्गत मुक़दमा दर्ज हो सकता है. इसमें तीन साल की जेल और 5 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन बेल मिल सकती है.
पवन दुग्गल का कहना है कि उपभोक्ता के पास अगर ऐप फ़ोन पर मौजूद है तो उस पर कोई कार्रवाई का प्रावधान नहीं हैं.
यहाँ एक और बात जानना ज़रूरी है कि इस आदेश को टिकटॉक ने अंतरिम आदेश करार दिया है. टिकटॉक की तरफ़ से जारी बयान में उन्होंने सफ़ाई दी है कि वे भारत सरकार के आदेश को मानने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं.
टिकटॉक ने कहा है- हमलोग सरकार के सामने अपनी बात रखने की कोशिश कर रहे हैं. टिकटॉक डेटा की निजता और भारतीय क़ानून के हिसाब से सुरक्षा ज़रूरतों का पालन करता है. हम भारतीयों का डेटा किसी भी विदेशी सरकार के साथ साझा नहीं करते हैं. यहां तक कि चीन को सरकार को भी नहीं देते हैं. हम यूज़र्स की निजता का मज़बूती से सम्मान करते हैं.विराग गुप्ता की मानें तो अंतरिम आदेश का मतलब ये कि इसको क़ानूनी जामा पहनाने के लिए एक कमेटी से पारित कराना होगा और ऑर्डर की शक्ल देनी होगी.












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