अब क्यों भारत के देसी जेट तेजस से लगेगा चीन और पाकिस्तान को डर

बेंगलुरु। शुक्रवार को शाही अंदाज में तेजस की इंडियन एयरफोर्स में एंट्री हो गई है। अब तेजस इंडियन एयर फोर्स का हिस्सा है और इसके कई ऑपरेशंस के दौरान हो सकता है कि आपको तेजस दुश्‍मनों पर कहर बनकर टूटता नजर आए।

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शुक्रवार को तेजस के दो वर्जन ही इंडियन एयरफोर्स में शामिल हुए हैं। मार्च 2017 तक छह और तेजस की एंट्री होगी। विशेषज्ञों की मानें तो तेजस पाकिस्तान और चीन के लिए मुसीबत साबित हो सकता है।

पाक और चीन ने मिलकर थंडर जेट जेएफ-17 का निर्माण किया है। जेएफ-17 इस समय पाक एयरुोर्स का एक अहम हिस्सा है। तेजस की एंट्री से इंडियन एयरफोर्स को फाइटर जेट की कीम से आजादी मिल सकेगी।

सूत्रों की मानें तो आइएएफ इसे हिंडन एयरबेस पर तैनात कर सकती है।

हिंडन एयरबेस एयरफोर्स के लिए रणनीतिक तौर पर काफी अहम है क्‍योंकि यहां से चीन और पाकिस्तान से लगने वाली सीमा काफी नजदीक है।

तेजस चीन के थंडर जेट से भी कहीं ज्यादा श्रेष्‍ठ है। इंडियन एयरफोर्स को आने वाले वर्षों में 120 तेजस जेट्स मिलेंगे।

एयरफोर्स को जो तेजस सप्लाई किए जाएंगे उन्हें तेजस 1ए नाम दिया गया है। यह तेजस पहले से कहीं ज्‍यादा श्रेष्‍ठ और सुधार के साथ होंगे।

इनमें मिड एयर रिफ्यूलिंग, मॉर्डन इंटर्नल रडार वॉर्निंग सिस्टम और एक्सटर्नल सेल्फ प्रोटेक्शन जैमर पॉड भी है। इसकी वजह से तेजस की सर्विलांस क्षमता बढ़ेगी और यह इलेक्‍ट्रॉनिकली किसी भी रडार को स्कैन कर सकेगी। इससे साफ है कि अगर दुश्‍मन कोई भी हरकत करेगा वह तेजस की पकड़ में आ सकेगी।

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