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जानिए कैसे पीएम मोदी ग्रामीण भारत के लिए 2019 का रास्ता तय करने की बना रहे हैं योजना

जानिए कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्रामीण भारत के जरिए 2019 का रास्ता तय करने के लिए बना रहे हैं मेगा प्लान।

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी को 2014 में जिस तरह से प्रचंड जीत हासिल हुई थी उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बखूबी समझते हैं और इसी बात को ध्यान में रखते हुए वह 2019 की तैयारियों में अभी से जुट गए हैं जिससे कि पार्टी को मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ा। देश की सियासत में ग्रामीण भारत काफी अहम भूमिका निभाता है, इसी बात को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी तकरीबन हर महीने ग्रामीण विकास के लिए हो रहे कामों की समीक्षा करते हैं और तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को इस बाबत निर्देश भी देते हैं।

सही लोगों तक पैसा पहुंचाने पर मंथन

सही लोगों तक पैसा पहुंचाने पर मंथन

इन बैठकों के दौरान पीएम मोदी ने जो बड़ा सवाल रखा था कि जो पैसा हम खर्च कर रहे हैं इस बात की पुष्टि कैसे होगी की यह पैसा सही लोगों तक पहुंच रहा है। इस सवाल के जवाब को ढूंढ़ने के लिए कई तरह की प्रशासनिक, तकनीकी और अलग अलग तरह की व्यवस्थाओं पर नजर डाली गई और इसे सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया गया कि सरकार का पैसा सही लोगों के हाथों में पहुंच रहा है। मोदी सरकार के पहले साल में उनकी इसलिए आलोचना होती थी कि पैसा सही लोगों तक पहुंच नहीं रहा है।

50,000 गांवों में पानी की कमी को खत्म करना

50,000 गांवों में पानी की कमी को खत्म करना

आगामी लोकसभा चुनाव में अब दो वर्ष का समय बचा है, ऐसे मोदी सरकार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है और अपना पूरा ध्यान ग्रामीण विकास की ओर लगाना चाहती है। ग्रामीण विकास के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अपनी रिपोर्ट को पीएम कार्यालय को सौंप दिया गया है, जिसमें 2019 तक के लिए कुछ विशेष प्रावधान और योजना रखी गई है। इसमें एक अहम बात है कि लोगों को सूखे की दिक्कत से कैसे निजात दिलाई जाए, इसके लिए कम से कम 50,000 गांवों में पानी को बचाने के उपायों को क्रियान्वयित करना अहम है।

करोड़ो ग्रामीणों को रोजगार देने की योजना

करोड़ो ग्रामीणों को रोजगार देने की योजना

ग्रामीण मंत्रालय चाहता है कि 45 लाख ग्रामीण लोगों को कौशल विकास के साथ जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय लोगों को उत्थान हो। इसके अलावा 55 लाख घरों में हर व्यक्ति को ऐसा रोजगार मुहैया कराया जाए जिससे कि 4-5 करोड़ लोगों पर इसका सीधा असर दिखाई दे। इसके अलावा नई ग्रामीण सड़क योजना की भी शुरुआत की जाएगी, जिसके तहत ग्रामीण लोगों को 40 फीसदी कम दाम पर यात्रियों सवारी ढोने वाले वाहन मुहैया कराए जाएंगे। इसकी उद्देश्य ना सिर्फ महिलाओं और पुरुषों को रोजगार मुहैया कराना है बल्कि ग्रामीण इलाकों में आवागमन को बेहतर करना भी है।

फंडिंग को बनाया गया आसान

फंडिंग को बनाया गया आसान

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव अमरजीत सिंन्हा का कहना है कि पीएमओ अपने उद्देश्य को लेकर बिल्कुल साफ है, मंत्रालय ने हमें खुली छूट दी है कि इन तमाम योजनाओं को लागू कराने के लिए रोडमैप तैयार किया जाए। इन तमाम योजनाओं के लिए फंड की सप्लाई को काफी आसान बनाया गया है, ऐसे में लक्ष्य पूरा नहीं होने का कोई बहाना नहीं दिया जा सकता है। इसके लिए सरकार ने कई पारदर्शी रास्ते अपनाए हैं

ग्रामीण सड़कों का निर्माण तेजी के साथ

ग्रामीण सड़कों का निर्माण तेजी के साथ

इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर अभिरूप सरकार का कहना है कि मुझे नहीं लगता है कि ग्रामीण योजनाओं के लिए कुछ खास बजट का आवंटन किया गया है, ग्रामीण इलाकों में रहने वालों की आय में कोई खास वृद्धि नहीं हुई है, अभी भी 60-64 फीसदी ग्रामीण खेती पर निर्भर हैं, लेकिन ये लोग जीडीपी में सिर्फ 15 फीसदी का योगदान करते हैं। पिछले साल के आंकडे़ पर नजर डालें तो ग्रामीण इलाकों में रिकॉर्ड 130 किलोमीटर की रोड हर रोज औसतन बनाई गई है।

पैसा पहुंचाने में पारदर्शिता

पैसा पहुंचाने में पारदर्शिता

96 फीसदी मनरेगा का पैसा इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांसफर किया गया। पिछले साल के आंकड़ों के हिसाब से 52.4 लाख काम ग्रामीण स्कीम के तहत पूरे कराए गए, जिनके पूरा होना का औसत तकरीबन 15-25 लाख रुपए था।इस दौरान सरकार ने आधार नंबर के तहत लोगों को पैसा पहुंचाने का काम किया, पांच साल पहले सिर्फ 13 फीसदी पैसा राज्यों और लोगों तक इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए पहुंचाया जाता था, लेकिन अब यह बढ़कर 90 फीसदी पहुंच चुका है। हाल ही में सरकार ने 9.3 मिलियन जॉब कार्ड को रद्द किया है।

सैटेलाइट की मदद से ग्रामीण इलाकों का विकास

सैटेलाइट की मदद से ग्रामीण इलाकों का विकास

यहां गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरिक्ष विभाग की बैठक ली थी, जिसमें ग्रामीण इलाकों की जरूरतो में कैसे स्पेस सैटेलाइट मदद कर सकता है इस बात पर चर्चा की गई थी। जिसके बाद सैटेलाइट की मदद से जियो टैगिंग के जरिए मनरेगा और अन्य ग्रामीण योजनाओं पर नजर रखी जा सकती है, यही नहीं इसकी मदद से इन ग्रामीण रोजगार और इसमें होने वाले भ्रष्टाचार पर भी नजर रखी जा सकती है। इस तकनीक की मदद से उत्तर भारत की सड़कों की हालत भी सामने आई जोकि देश में सबसे खस्ता हाल है।

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