भारत में नागरिकता दी और छीनी कैसे जाती है?

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नागरिकता क़ानून में संशोधन के बाद से ही पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और ये माँग उठ रही है कि 'सरकार शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने वाले इस नए क़ानून को वापस ले क्योंकि यह संवैधानिक भावना के विपरीत है और भेदभावपूर्ण है'.

इसे लेकर देश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और अलग-अलग प्रदर्शनों में हुई हिंसक घटनाओं में अब तक 20 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं.

सोशल मीडिया पर भी नए नागरिकता क़ानून की चर्चा है और गूगल पर लोग 'भारतीय नागरिकता अधिनियम' के बारे में लगातार सर्च कर रहे हैं.

क्या है नागरिकता अधिनियम?

नागरिकता अधिनियम, 1955 संविधान लागू होने के बाद भारतीय नागरिकता हासिल करने, इसके निर्धारण और रद्द करने के संबंध में एक विस्तृत क़ानून है. उसे आसान भाषा में समझाने की कोशिश.

यह अधिनियम भारत में एकल नागरिकता का प्रावधान करता है यानी भारत का नागरिक किसी और देश का नागरिक नहीं हो सकता.

इस अधिनियम में वर्ष 2019 से पहले पाँच बार संशोधन (वर्ष 1986, 1992, 2003, 2005 और 2015 में) किया जा चुका है.

नवीनतम संशोधन के बाद इस अधिनियम में बांग्लादेश, अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के छह अल्पसंख्यक समुदायों (हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी, ईसाई और सिख) से ताल्लुक़ रखने वाले लोगों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान किया गया है.

इसी तरह पिछले संशोधनों में भी नागरिकता दिए जाने की शर्तों में कुछ मामूली बदलाव किए जाते रहे हैं.

भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के अनुसार कुछ प्रावधानों के अंतर्गत भारत की नागरिकता ली जा सकती है.

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क्या हैं प्रावधान?

  • पहला प्रावधान जन्म से नागरिकता का है.

भारत का संविधान लागू होने यानी कि 26 जनवरी, 1950 के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति 'जन्म से भारत का नागरिक' है. इसके एक और प्रावधान के अंतर्गत 1 जुलाई 1987 के बाद भारत में जन्मा कोई भी व्यक्ति भारत का नागरिक है, यदि उसके जन्म के समय उसके माता या पिता (दोनों में से कोई एक) भारत के नागरिक थे.

  • दूसरा प्रावधान वंशानुक्रम या रक्त संबंध के आधार पर नागरिकता देने का है.

इस प्रावधान के अंतर्गत एक शर्त ये है कि व्यक्ति का जन्म अगर भारत के बाहर हुआ हो तो उसके जन्म के समय उसके माता या पिता में से कोई एक भारत का नागरिक होना चाहिए.

दूसरी शर्त ये है कि विदेश में जन्मे उस बच्चे का पंजीकरण भारतीय दूतावास में एक वर्ष के भीतर कराना अनिवार्य है. अगर वो ऐसा नहीं करते तो उस परिवार को अलग से भारत सरकार की अनुमति लेनी होगी.

इस प्रावधान में माँ की नागरिकता के आधार पर विदेश में जन्म लेने वाले व्यक्ति को नागरिकता देने का प्रावधान नागरिकता संशोधन अधिनियम 1992 के ज़रिए किया गया था.

अवैध प्रवासी को छोड़कर अगर कोई अन्य व्यक्ति भारत सरकार को आवेदन कर नागरिकता माँगता है, तो ये कुछ विधियाँ हैं जिनके आधार पर उसे नागरिकता दी जा सकती है.

1. भारतीय मूल का वो शख़्स जो देश में नागरिकता के लिए आवेदन देने के पहले भारत में कम से कम 7 साल रह रहा हो.

2. भारतीय मूल का वो व्यक्ति जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश का नागरिक हो. मतलब ये कि व्यक्ति पाकिस्तान और बांग्लादेश से बाहर किसी अन्य देश का नागरिक हो, और उस नागरिकता को छोड़कर भारत की नागरिकता चाहता हो.

3. वो शख़्स जिसकी शादी किसी भारतीय नागरिक से हुई हो और वो नागरिकता के आवेदन करने से पहले कम से कम सात साल तक भारत में रह चुका हो.

4. वो नाबालिग़ बच्चे जिनके माता या पिता भारतीय हों.

5. राष्ट्रमंडल के सदस्य देशों के नागरिक जो भारत में रहते हों या भारत सरकार की नौकरी कर रहें हों, आवेदन पत्र देकर भारत की नागरिकता प्राप्त कर सकते हैं.

  • चौथा प्रावधान भूमि-विस्तार के ज़रिए नागरिकता देने का है. यदि किसी नए भू-भाग को भारत में शामिल किया जाता है, तो उस क्षेत्र में निवास करने वाले व्यक्तियों को स्वतः भारत की नागरिकता मिल जाएगी. मिसाल के तौर पर 1961 में गोवा को, 1962 में पुद्दुचेरी को भारत में शामिल किया गया तो वहाँ की जनता को भारतीय नागरिकता प्राप्त हो गई थी.
  • पाँचवां प्रावधान नेचुरलाइज़ेशन के ज़रिए नागरिकता देने का है. यानी देश में रहने के आधार पर भी कोई व्यक्ति भारत में नागरिकता हासिल कर सकता है. बशर्ते वो नागरिकता अधिनियम की तीसरी अनुसूची की सभी योग्यताओं पर खरा उतरता हो.

ज़ाहिर है, यह पूरा क़ानून नहीं है, पूरा क़ानून काफ़ी विस्तृत है और यहाँ मोटे तौर पर जानकारी दी गई है, कई शर्तें और डिस्क्लेमर हैं उनके बारे में जानने के लिए पूरा क़ानून पढ़ें.


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नागरिकता की बर्ख़ास्तगी?

नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा-9 में किसी व्यक्ति की नागरिकता ख़त्म करने का भी ज़िक्र किया गया है.

तीन तरीक़े हैं जिनके ज़रिए किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त हो सकती है.

यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी और देश की नागरिकता ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वयं ही समाप्त हो जाएगी.

यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से अपनी नागरिकता का त्याग कर दे तो उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाएगी.

भारत सरकार को भी निम्न शर्तों के आधार पर अपने नागरिकों की नागरिकता समाप्त करने का अधिकार है.

  • नागरिक 7 वर्षों से लगातार भारत से बाहर रह रहा हो.
  • यदि ये साबित हो जाए कि व्यक्ति ने अवैध तरीक़े से भारतीय नागरिकता प्राप्त की.
  • यदि कोई व्यक्ति देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो.
  • यदि व्यक्ति भारतीय संविधान का अनादर करे.
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