फणीः कैसे पड़ा चक्रवात का नाम

फणीः कैसे पड़ा चक्रवात का नाम

भारत के मौमस विभाग के मुताबिक समुद्री तूफ़ान फणी ने देश के पूर्वी तट पर दस्तक दे दी है. तूफ़ान के सीधे रास्ते में आने वाले ओडिशा में भारी बारिश हुई है और वहाँ तेज़ हवाएं चल रही हैं.

पर्यटन के लिए मशहूर शहर पुरी में 175 किलोमीटर प्रतिघंटा तक की रफ़्तार से हवाएं चली हैं. तूफ़ान की वजह से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.

इस तूफ़ान का नाम बांग्लादेश ने रखा है. इस तूफ़ान के नाम के उच्चारण को लेकर भ्रम की स्थिति है और मीडिया में इसे कई तरह से लिखा जा रहा है.

कैसे रखे जाते हैं तूफ़ानों के नाम

विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने तूफ़ान का नाम रखने के लिए एक प्रणाली बनाई है जिसके तहत अलग-अलग देश अपनी ओर से नाम सुझाते हैं.

तूफ़ानों के नाम देशों की ओर से सुझाए गए नामों की सूची में से ही रखे जाते हैं.

1953 से मयामी नेशनल हरिकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्ल्यूएमओ) तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता रहा है.

डब्ल्यूएमओ जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है.

फोनू तूफ़ान
EPA
फोनू तूफ़ान

लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा गया था. वजह ये थी कि ऐसा करना काफ़ी विवादास्पद काम था.

भारत के चक्रवात चेतावनी केंद्र के अधिकारी डॉक्टर एम माहापात्रा के मुताबिक़ इसके पीछे कारण यह था कि जातीय विविधता वाले इस क्षेत्र में काफ़ी सावधान और निष्पक्ष रहने की ज़रूरत थी ताकि यह लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए.

साल 2004 में ये स्थिति तब बदल गई, जब डब्ल्यूएमओ की अगुवाई वाला अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दिया गया और संबंधित देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा गया.

इसके बाद भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने एक बैठक में हिस्सा लिया.

इन देशों ने 64 नामों की एक सूची सौंपी. हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए. उत्तरी हिंद महासागर के क्षेत्र में आने वाले तूफ़ानों के नाम इसी सूची से रखे जाते हैं.

तूफ़ान से गिरा पेड़

णी मतलब सांप

फणी तूफ़ान का नाम भी इसी सूची में से रखा गया है. बांग्लादेश में 'फणी' सांप को कहते हैं.

ये शब्द फन या फण से ही बना है. या ये कहें कि फन का बंगाली उच्चारण है.

फणी संस्कृत का शब्द है जिसका अर्थ होता है सांप का सिर. इसी से फणीश्वर बना है जो भगवान शिव के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

यह सूची हर देश के वर्ण क्रम के अनुसार है. इस क्षेत्र में जून 2014 में आए चक्रवात 'नानुक' का नाम म्यांमार ने रखा था.

सदस्य देशों के लोग भी नाम सुझा सकते हैं.

मसलन भारत सरकार इस शर्त पर लोगों की सलाह मांगती है कि नाम छोटे, समझ आने लायक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ न हों.

फणीः कैसे पड़ा चक्रवात का नाम

बीते साल आए तूफ़ान तितली का नाम पाकिस्तान ने रखा था. वहीं 2018 में ही आए तूफ़ान गज ने भारी तबाही मचाई थी.

साल 2013 में भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर आए पायलिन चक्रवात का नाम थाईलैंड ने रखा था.

इस इलाक़े में आए एक अन्य चक्रवात 'नीलोफ़र' का नाम पाकिस्तान ने रखा था.

पाकिस्तान ने नवंबर 2012 में जिस चक्रवात का नाम रखा था उसे 'नीलम' कहा गया.

डॉक्टर महापात्रा के मुताबिक साल 2014 में आया चक्रवात हुदहुद इस सूची का 34वां नाम था.

तूफ़ान की वजह से सड़कों पर सन्नाटा

भारत के दिए नाम

इस सूची में शामिल भारतीय नाम काफ़ी आम नाम हैं, जैसे मेघ, सागर, और वायु.

चक्रवात विशेषज्ञों का पैनल हर साल मिलता है और ज़रूरत पड़ने पर सूची फिर से भरी जाती है.

ऐसा नहीं कि 64 नामों की इस सूची को लेकर कोई विवाद नहीं रहा.

2013 में श्रीलंका की ओर से रखे गए 'महासेन' नाम को लेकर श्रीलंका के राष्ट्रवादियों और अधिकारियों ने विरोध जताया था जिसे बाद में बदलकर 'वियारु' कर दिया गया.

उनके मुताबिक़ राजा महासेन श्रीलंका में शांति और समृद्धि लाए थे.

इसलिए आपदा का नाम उनके नाम पर रखना ग़लत है.

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