कैसे फर्जी दस्तावेज पर दुबई जाकर भारत लौट आई 22 साल की अकेली युवती ?जानिए
नई दिल्ली- 22 साल की एक अकेली युवती ने कुछ दिन पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ही दुबई की यात्रा की और जिस मकसद से वो दुबई गई थी, वहां जब उसमें सफलता नहीं मिली तो वह फौरन वापस भी लौट आई। शायद वह कभी पकड़ी भी नहीं जाती अगर वो दुबई से इतनी जल्दी लौट आने के कारण का संतोषजनक उत्तर दे देती। लेकिन, वह युवती या महिला जिन फर्जी दस्तावेंजों के आधार पर तमाम एजेंसियों को चकमा देने में कामयाब रही है, उससे इमिग्रेशन अधिकारियों समेत तमाम सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े हो सकते हैं। वह लड़की पिछले 29 नवंबर को ही दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई गई थी और पिछले गुरुवार को ही वंदे भारत मिशन की दुबई-पुणे फ्लाइट से पुणे लौट आई है। सबसे बड़ी बात ये है कि उसकी वापसी के बाद पता चला है कि उसके खिलाफ कई आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं।

फर्जी दस्तावेज पर दुबई जाकर लौट आई अकेली युवती
महाराष्ट्र की पुणे पुलिस ने शनिवार को कहा है कि गुरुवार को दुबई-पुणे फ्लाइट से पुणे लौटी 22 साल की युवती ने जाली नाम और फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल करके खाड़ी देश की यात्रा की। विसाखापट्टनम की रहने वाली दामू सीतारत्नम नाम की उस युवती को पुणे में लैंडिंग के कुछ देर बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया। अधिकारियों के मुताबिक सीतारत्नम बतौर हाउस हेल्प नौकरी की तलाश में दुबई गई थी, लेकिन जब वह वहां पर काम ढूंढ़ने में नाकाम रही तो वंदे भारत फ्लाइट से वापस इंडिया लौट आई। उसने पुलिस को बताया है कि किस वजह से विदेश यात्रा के लिए जाली दस्तावेज बनवाया था और इस फर्जीवाड़े में उसकी मदद किसने की है।

सीतारत्नम पर दर्ज हैं कई आपराधिक केस
आरोपी युवती ने जांचकर्ताओं से कहा है कि उसने पहले जाली नाम वाला आधार कार्ड इसलिए बनवाया था, क्योंकि उसे डर था कि असली नाम पर पासपोर्ट के लिए अप्लाई करने पर उसका आवेदन रद्द हो जाएगा। इसकी वजह ये थी कि उसक नाम पर पहले से कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। पुणे के एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर गजानन पवार के मुताबिक दामू सीतारत्नम ने इसी साल मार्च में रीजनल पासपोर्ट ऑफिस से जाली नाम वाला पासपोर्ट हासिल किया था, जिसमें सूर्या नाम के एक शख्स ने उसकी सहायता की थी। उसने यह भी दावा किया है कि इसी शख्स ने उसका फर्जी आधार कार्ड भी बनवाकर दिया था।

दुबई की शॉर्ट ट्रिप से पैदा हुआ संदेह
आखिरकार पुणे एयरपोर्ट पर अधिकारियों को उसपर शक कैसे हुआ और वह कैसे पकड़ी गई यह किस्सा और भी दिलचस्प है। इसकी जानकारी देते हुए सीनियर इंस्पेक्टर पवार ने बताया कि 'वह 29 नवंबर को दिल्ली एयरपोर्ट से दुबई के लिए रवाना हुई। वह वंदे भारत मिशन के तहत चलने वाली दुबई-पुणे फ्लाइट से वापस भारत लौटी। उसकी इतनी छोटी सी फौरेन ट्रिप को लेकर एयरपोर्ट पर मौजूद इमिग्रेशन ऑफिसर हैरान थे। जब वह इमिग्रेशन अफसरों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई तो उन्होंने उसके सामानों की तलाशी ली। तब उसमें उन्हें उसका आधार कार्ड मिला जिसमें तस्वीर तो उसके पासपोर्ट वाली ही लगी थी, लेकिन नाम पासपोर्ट से अलग था। उन्होंने उसे हिरासत में लेकर केस को हमारे हवाले कर दिया।'

कितना बड़ा है फर्जी पासपोर्ट बनवाने वाला जाल?
सीतारत्नम को स्थानीय कोर्ट ने फिलहाल पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इसकी वजह ये रही कि पुलिस ने अदालत में यह दलील दी है कि जांचकर्ताओं को उससे विस्तृत पूछताछ की दरकार है। उन्हें उस सूर्या नाम के शख्स के कारनामों का भी पुख्ता पता लगाना जरूरी है, जो फर्जी दस्तावेज बनवाने का काम करता है। पुलिस ने यह भी दलील दी है कि वह यह भी छानबीन करना चाहती है कि जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी पासपोर्ट बनवाने का यह गोरखधंधा बड़े पैमाने पर तो नहीं चल रहा है। सवाल ये भी है कि इतनी आसानी से अगर लोग फर्जी पासपोर्ट बनवा ले रहे है तो यह तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती खड़ी कर सकता है, क्योंकि तमाम देशविरोधी लोग तो दिन-रात इसी तरह की गतिविधियों में लगे हुए हैं। (सभी तस्वीरें सांकेतिक)












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