असम: क्लॉज-6 को लेकर विशेष समिति की रिपोर्ट जारी, 1951 कट ऑफ के आधार पर लोगों के पहचान की सिफारिश

नई दिल्ली: असम अकॉर्ड के क्लॉज-6 को लागू करवाने के लिए गृह मंत्रालय ने एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया था। जिसने अपनी रिपोर्ट फरवरी में सरकार को सौंप दी थी, लेकिन केंद्र की ओर से इसे मंगलवार को जारी किया गया। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि असम में असमिया लोगों की पहचान 1951 के कट ऑफ के आधार पर होनी चाहिए।

nrc

केंद्र सरकार की ओर गठित 14 सदस्यीय टीम में असम के छात्र संघ के सदस्य समुज्जल भट्टाचार्य, दीपांकर नाथ और लुरिनज्योति गोगोई हैं, जबकि चौथे सदस्य अरुणाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल हैं। इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि स्वदेशी आदिवासियों के साथ-साथ असम के अन्य स्वदेशी समुदायों और 1/1/1951 से या उससे पहले असम में रहने वाले स्वदेशी असमिया और उनके वंशजों को शामिल किया जाए।

इसके अलावा रिपोर्ट में असमिया लोगों के लिए आरक्षण की भी सिफारिश की गई है। जिसके मुताबिक असम की विधानसभा या स्थानीय निकायों में 80 से 100 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए। प्राइवेट और सरकारी नौकरियों में भी इसी अनुपात में आरक्षण की बात कही गयी है। रिपोर्ट में भूमि अधिकारों का भी जिक्र किया गया है। जिसमें कहा गया कि असम की जमीन का इस्तेमाल सिर्फ असम के ही लोग करें। ऐसे में राज्य के अलावा अन्य व्यक्तियों को जमीन स्थानांतरित करने पर रोक लगे।

क्या कहा असम के मुख्यमंत्री ने?
असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने गृह मंत्रालय की ओर से जारी इस रिपोर्ट को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उनके मुताबिक केंद्र सरकार समझौते के हर फैसले को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे पहले किसी भी सरकार ने क्लॉज 6 के लिए समिति नहीं बनाई थी, लेकिन निश्चित समय दिए बिना समिति की रिपोर्ट का खुलासा करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि किसी भी हाल में लोगों के अधिकारों से समझौता नहीं होगा।

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