CAA पर अरविंद केजरीवाल के विरोध का अमित शाह ने दिया जवाब, पूछा- आप रोहिंग्या की बात क्यों नहीं करते?
सीएए देशभर में लागू हो गया है, लेकिन विपक्षी दल लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सीएए को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनके बयान को लेकर गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार किया।
सीएए की आलोचना करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से बड़ी संख्या में लोग भारत आएंगे, जिससे चोरी, डकैती और रेप जैसी वारदातें बढ़ेंगी।

इसके जवाब में अमित शाह ने एएनआई के साथ बातचीत में कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अपने भ्रष्टाचार के उजागर होने से अपना आपा खो चुके हैं। उनको शायद मालूम नहीं है कि ये सभी लोग भारत आ चुके हैं, भारत में ही रह रहे हैं, बस उन्हें अधिकार नहीं मिला है।
अमित शाह ने कहा कि उन्हें वो अधिकार देने की बात है। ऐसे में 2014 तक जो गैर शरणार्थी भारत आ गए हैं, उन्हें नागरिकता देनी है। अगर केजरीवाल को इतनी ही चिंता है तो वे क्यों बांग्लादेशी घुसपैठियों की बात नहीं करते? रोहिंग्या का विरोध क्यों नहीं करते? क्योंकि वो वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि दिल्ली का चुनाव केजरीवाल के लिए लोहे के चने चबाने जैसा है। वो इसलिए वोट बैंक की पॉलिटिक्स कर रहे हैं। अमित शाह ने सवालिया लहजे में पूछा कि क्या बांग्लादेशी घुसपैठिए नौकरी का अधिकार नहीं छीन रहे हैं? रोहिंग्या नहीं छीन रहे हैं। इनके लिए तो आप कभी नहीं बोले। सिर्फ हिंदू, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों का ही आप विरोध कर रहे हैं।
अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल 1947 के विभाजन के बैकग्राउंड भूल गए हैं। उन्हें उन शरणार्थियों के परिवारों के साथ चाय पीनी चाहिए। वो अरबों-खरबों रुपयों की संपत्ति छोड़कर भारत आए थे और यहां दिल्ली की दुकानों में सब्जियों की दुकानें लगाईं थीं।
शाह ने कहा कि इन लोगों के मन में संवेदना नहीं है। वो समझते नहीं हैं कि अगर वहां धर्म के आधार पर इन महिलाओं का गौरव छीना जाए, अपमानित किया जाए। क्या करेंगे वो? इनकी वेदना हम भी नहीं सुनेंगे? पचास के दशक, साठ के दशक, अस्सी के दशक में आ गए और आज भी इन्हें नागरिकता नहीं मिली है।
अमित शाह ने कहा कि इनके बच्चों को अस्पताल में दाखिला नहीं मिलता, ढंग की नौकरी नहीं मिलती। अपने नाम से प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते। मतदान नहीं कर सकते क्यों? क्या अपराध है उनका? विभाजन का फैसला उन्होंने नहीं लिया था... कांग्रेस पार्टी ने लिया था। उस वक्त सबने कहा था कि जो आएंगे, हम सबको नागरिकता देंगे। अब अपने वादे से मुकर जाना, कम से कम मैं मानता हूं कि हमें मंजूर नहीं है।
अमित शाह ने आगे कहा कि इनकी संवेदनाओं को बीजेपी भी महसूस करती है, इस देश के प्रधानमंत्री भी महसूस करते हैं और मानते हैं कि इनकी 75 साल की वेदनाओं का अंत कभी न कभी आना चाहिए।
केजरीवाल ने क्या कहा था?
अरविंद केजरीवाल ने नागरिकता कानून का विरोध करते हुए कहा था कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में लगभग 2.5 से तीन करोड़ अल्पसंख्यक रहते हैं। एक बार भारत अपने दरवाजे खोल देगा तो इन देशों से बड़े पैमाने पर लोग भारत आएंगे।
इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में इन देशों से अल्पसंख्यकों को हमारे देश में लाया जाएगा। उन्हें रोजगार दिए जाएंगे, उनके लिए घर बनाए जाएंगे, उन्हें यहां बसाया जाएगा। सीएम केजरीवाल ने इसे 1947 से भी बड़ा माइग्रेशन बताते हुआ कहा था कि इससे देश में चोरी, डकैती और रेप की घटनाएं बढ़ेगी।












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