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Holi 2025: भारत के इन अलग-अलग हिस्सों में क्यों नहीं मनाया जाता फागोत्सव?

Holi 2025: होली भारत का सबसे पसंदीदा त्यौहार है। फाल्गुन मास में मनाया जाने वाले इस त्यौहार की धूम हर गली-नुक्कड़, हर शहर-मोहल्ले में होता है। विश्व के कई हिस्से से लोग यहां होली खेलने आते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में कई ऐसी जगह है जहां पर पारंपरिक मान्यताओं के कारण रंगों का ये त्यौहार नहीं मनाया जाता है।

आइए जानते हैं देश के इन अनछुए कोनों के बारे में जहां रंग और उल्लास का ये त्यौहार वहां की पुरातन मान्यताओं और लोक कथाओं के कारण नहीं मनाया जाता है।

Holi-2025

Holi 2025: इन जगहों पर नहीं खेलते होली

समय के साथ कई परंपराएं बदलती हैं लेकिन कुछ इतनी गहरी जड़ें जमा चुकी हैं कि उन्हें तोड़ना आसान नहीं होता। इन स्थानों पर होली न मनाने के पीछे धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक घटनाएं और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।

1. दुर्गापुर

झारखंड के बोकारो जिले के दुर्गापुर गांव में होली नहीं मनाई जाती है इसकी वजह सौ साल पुरानी एक घटना में छुपी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, गांव के राजा के बेटे की मौत होली के दिन हुई थी, और बाद में राजा की भी मृत्यु इस दिन हो गई। दुखी होकर राजा ने मरने से पहले होली न मनाने का आदेश दिया था जिसे आज भी गांव वाले आज भी निभाते हैं।

2. महाबलीपुरम

तमिलनाडु के महाबलीपुरम में होली नहीं मनाई जाती है यहां मासी मगम नामक धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। इस दिन, लोगों का विश्वास है कि स्वर्गीय आत्माएं और देवी-देवता धरती पर आते हैं और पवित्र जल में स्नान करते हैं। यही कारण है कि यहां होली के रंगों की जगह पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान ज्यादा होते हैं।

3. बनासकांठा

गुजरात के बनासकांठा जिले के रामसन गांव में पिछले 200 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। लोककथा के अनुसार, एक राजा की अनुचित हरकतों से नाराज होकर संतों ने इस गांव को श्राप दिया था कि अगर यहां होली मनाई गई तो बुरा समय आएगा। आज भी स्थानीय हिंदू समुदाय इस परंपरा को निभाता आ रहा है।

4. बृज

मथुरा-वृंदावन की होली भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है लेकिन वहां बृज के कुछ गावों में होली नहीं खेली जाती है। मान्यता है कि किसी कारणवश राधा रानी नाराज हो गई थीं जिसके चलते यहां के लोग होली नहीं खेलते हैं।

5. रुद्रप्रयाग

उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में दो गांव है क्विली और खुरजान जहां करीब 150 साल से होली का त्यौहार नहीं मनाया गया है। मान्यताओं के अनुसार, यहां कि स्थानिय देवी को शोर-गुल पसंद नहीं है और वो नाराज हो जाती हैं इसलिए यहां के लोग होली नहीं मनाते हैं।

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