सर्वे: भारत में हिंदू-मुस्लिम लड़कियों की शादी हो जाती है जल्दी
नई दिल्ली। शादी एक परंपरा ही नहीं बल्कि संस्कार भी है और हमारे देश में शादी का बंधन एक पवित्र स्थान रखता है। समाज में सम्मान दिलाने में भी शादी एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि भारत में हिंदू और मुस्लिम दो संप्रदाय ऐसे हैं जिनमें लड़कियों की शादियां जल्दी कर दी जाती हैं। अगर इन दोनों धर्मों में लड़की की शादी देर से होती हैं तो इसके पीछे कारण या तो आर्थिक होता है या फिर कोई शारीरिक अक्षमता।

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यह खुलासा हुआ है एक सर्वे में, जिसे कि इंडियास्पेंड डॉट ऑर्ग.. ने करवाया है। इस सर्वे कि हिसाब से दुनियाभर में 72 करोड़ महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हुई है, जिनमें एक तिहाई महिलाएं भारत में हैं। जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 15.6 करोड़ है।
आईये आपको बताते हैं वो खास बातें जो इस सर्वे से निकल कर आयी हैं....
1.शहरों में रहने वाले ईसाई, जैन या सवर्ण हिंदू समुदायों की शिक्षित और आर्थिक रूप से स्थिर परिवार की लड़कियों की शादी 18 साल के बाद यानी वयस्क होने के बाद की जाती है।
2.ग्रामीण क्षेत्र की युवतियों और शहरी क्षेत्रों की युवतियों के शादी में दो साल का अंतर होता है।
3. अमीर घरों की युवतियों और निर्धन परिवारों की युवतियों के विवाह में चार साल का अंतर होता है।
4.कम उम्र में लड़कियों का विवाह वैसे तो निचली जातियों में देखा जाता है लेकिन कुछ सवर्ण समुदाय भी कम उम्र में लड़कियों की शादी कराते हैं।
5.जैन समुदाय की युवतियों के विवाह की औसत उम्र 20.8 है, ईसाई समुदाय में यह उम्र सीमा 20.6 है, सिख समुदाय में युवतियों के विवाह की उम्र सीमा 19.9 है, जबकि हिंदू और मुसलमानों में शादी की औसतन उम्र 16.7 है।
6.किशोरियों के गर्भधारण या मां बनने के मामले हिंदू और मुसलमान समुदायों में सबसे ज्यादा (16 फीसदी) देखने को मिलते हैं, जबकि अन्य समुदायों में ऐसे मामले अपेक्षाकृत कम है।
7. शिक्षा और आय की भी विवाह की उम्र तय करने में विशेष भूमिका रहती है।
8. किशोरियों के गर्भवती होने के मामले अल्पशिक्षित या निरक्षर किशोरियों में ज्यादा देखे जाते हैं।
9. पढ़ी-लिखी लड़कियां 18-20 साल के बाद मां बनना पसंद करती हैं।
10. केरल और असम में बाल विवाह की दर बेहद निम्न है।












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