कम पैसों में मंगल तक पहुंच सकते हैं तो सफाई में क्‍या हर्ज

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो अक्‍टूबर को 'स्‍वच्‍छ भारत अभियान' की शुरुआत कर डाली। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को संबोधित भी किया।

swachh bharat

मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत भारत माता की जय के साथ की। इसके साथ ही उन्‍होंने इस अभियान के प्रतीक चिन्‍ह को डिजाइन करने वाले दो व्‍यक्तियों का जिक्र भी मंच से किया।

उन्‍होंने कहा कि महाराष्ट्र के अनंत और गुजरात की भाग्यश्री ने इस अभियान का बेहतरीन लोगो डिजाइन किया है। मोदी ने कहा कि जब हम कम पैसों में मंगल ग्रह तक पहुंच सकते हैं तो फिर भला हम सफाई अभियान को क्‍यों नहीं पूरा कर सकते हैं।

एक नजर उनकी स्‍पीच के कुछ खास अंश

  • आज महात्‍मा गांधी और लाल बहादुर शास्‍त्री जी का जन्‍मदिन है।
  • हमें गांधी के नेतृत्‍व में आजादी हासिल हुई है। उनका देश को स्‍वच्‍छ रखने का सपना अभी अधूरा है।
  • स्‍वच्‍छ भारत अभियान के लोगो से साफ है कि गांधी जी हमें देख रहे हैं। वह हमसे पूछ रहे हैं कि हम देश की सफाई कब करेंगे।
  • चाहे मंदिर हो, मस्जिद हो गुरुद्वारा हो या फिर कोई अन्‍य स्‍थान, हमें अपने आसपास की जगहों को साफ करना है।
  • अगर हमे कम पैंसों में मंगल तक पहुंच सकते हैं तो फिर हम अपने पड़ोस को साफ क्‍यों नहीं रख सकते हैं।
  • बहुत से लोग आने वाले दिनों में इसकी आलोचना करेंगे लेकिन अगर एक स्‍वच्‍छ भारत का निर्माण करना है तो फिर इसके लिए तैयार रहना होगा।
  • इस अभियान में मीडिया का सहयोग भी चाहिए। हम सभी को साथ आना होगा।
  • यह अभियान राजनीति से ऊपर है और हमारे देश के लिए हमारे प्‍यार को दर्शाता है।
  • यह अभियान 1.2 बिलियन लोगों का अभियान है और यह 1.2 बिलियन गुना बड़ा है।
  • सरकार और मंत्री अकेले स्‍वच्‍छ भारत अभियान को पूरा नहीं कर सकते हैं।
  • इसके लिए एक सोशल मीडिया कैंपेन शुरू किया गया है।
  • नौ लोगों को सफाई करते हुए अपनी फोटोग्राफ पोस्‍ट करने के लिए आमंत्रित किया है। यह नौ लोग अगले नौ लोगों को आमंत्रित करेंगे।
  • क्‍या सफाई करना सिर्फ कर्मचारियों की जिम्‍मेदारी है।
  • क्‍या नागरिकों का इसमें कोई रोल नहीं है। हमें इस सोच को बदलना होगा।
  • बाबा रामदेव को भी इस अभियान के लिए आमंत्रित किया गया है।
  • जो उत्‍साह मुझे मेरे सोशल मीडिया पेजों पर दिख रहा है वह वाकई दिल छू लेने वाला है।
  • मुझे हमारे देश की महिलाओं का खुले में शौच करते देख वाकई अफसोस होता है।
  • शौचालयों का निर्माण वाकई बहुत जरूरी है।
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