भारत-चीन संबंधों को लेकर नई पहल, एस जयशंकर और चाइना के विदेश मंत्री के बीच उच्च स्तरीय बैठक
विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने रियो डी जेनेरियो में एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत-चीन संबंधों और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा की। यह बैठक पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में चार वर्षों से चल रहे सैन्य गतिरोध के समाप्त होने के बाद हुई। जहां हाल ही में दोनों देशों ने वापसी पूरी की है।
जी-20 और ब्रिक्स के मौके पर हुई बैठक
यह वार्ता जी-20 शिखर सम्मेलन के अवसर पर आयोजित की गई। जिसमें दोनों पक्षों ने सीमा पर हालिया प्रगति को स्वीकार किया। जयशंकर ने इस बैठक के बाद कहा कि दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और सीमाई शांति बहाल करने के महत्व पर चर्चा की।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई वार्ता के बाद विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर संवाद फिर से शुरू हुआ है। दोनों देशों के नेताओं ने सीमा पर स्थिरता बहाल करने और तनाव कम करने के लिए एक नई प्रतिबद्धता दिखाई है।
डेमचोक और देपसांग में वापसी पूरी, गश्त फिर शुरू
21 अक्टूबर को हुए समझौते के तहत भारतीय और चीनी सेनाओं ने डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में अपनी-अपनी जगहों पर वापसी पूरी की। इसके बाद दोनों सेनाओं ने गश्त गतिविधियों को फिर से शुरू किया है। यह कदम दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
जयशंकर ने संबंधों की बहाली पर दिया जोर
विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत-चीन संबंधों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध वैश्विक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय मंचों, जैसे जी-20 और ब्रिक्स में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि हाल की वार्ताओं में जमीनी स्तर पर समझ को लागू किया जा रहा है।
विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता, तनाव कम करने की दिशा में कदम
भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधि वार्ता को एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। भारत का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल कर रहे हैं। जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री वांग यी कर रहे हैं। वापसी और गश्त गतिविधियों के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली पर जोर दिया जा रहा है।
सैनिक तैनाती और शांति प्रयास
हालांकि वास्तविक नियंत्रण रेखा के पास अब भी प्रत्येक पक्ष के लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं। दोनों देशों का फोकस तनाव को कम करने पर है। विभिन्न स्तरों पर वार्ताएं चल रही हैं। ताकि विश्वास बहाल किया जा सके।
ब्रिक्स बैठक और मोदी-शी वार्ता का प्रभाव
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान लगभग 50 मिनट की बातचीत में प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों के लिए पारस्परिक विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता जरूरी हैं।
लंबे गतिरोध के बाद स्थिरता की उम्मीद
पूर्वी लद्दाख में 5 मई 2020 को पैंगोंग झील में झड़पों के बाद शुरू हुए गतिरोध के समाधान के साथ दोनों देश स्थिरता और शांति की दिशा में बढ़ रहे हैं। हालांकि जयशंकर ने यह स्पष्ट किया कि संबंधों के पूर्ण रूप से सामान्य होने में अभी समय लग सकता है। लेकिन हालिया घटनाक्रम द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत हैं।
भारत और चीन के बीच यह बैठक दोनों देशों के संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। विशेष प्रतिनिधियों के बीच वार्ता और सैन्य वापसी जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि दोनों देश सीमा पर तनाव कम करने और आपसी विश्वास बहाल करने की दिशा में गंभीर हैं।












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