इन 5 बातों में ही क्यों सिमटता दिख रहा है बिहार का चुनाव?

पटना। बिहार को समझने के लिए यदि वहां की राजनीति को आधार बनाएं तो हम पाएंगे कि तब से अब तक और अब से आगे तक की तस्वीर में यह राज्य कैसा दिखता है। यहां विधानसभा की 10 सीटों पर उपचुनाव ज़ोरों पर रहा। राजनगर (सु.), छपरा, हाजीपुर, मोहिउद्दीननगर, मोहनिया, नरकटियागंज, जाले, परबत्ता, भागलपुर और बांका सीट पर हुई वोटिंग ने इस बार बिहार के वोटर का मूड बयां कर दिया।

जल्द ही मतगणना में जनता की परीक्षा का परिणाम सामने आ जाएगा। आप व हम जान जाएंगे कि लालू-नीतीश के साथ आने पर राज्य का राजा आगे कौन बनने वाला है। आइए तत्व व तथ्यों की मदद से क्यों ना बिहार को इस नज़र से भी देखा जाए-

विधानसभा का सेमीफाइनल मैच

विधानसभा का सेमीफाइनल मैच

बिहार उपचुनाव अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल हैं। उपचुनाव के परिणामों को बिहार की भविष्य की राजनीति से जोड़ें तो बेहद अहम तस्वीर उभरती है। कई बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा, महागठबंधन, 20 साल से जुदा रहे लालू-नीतीश की मित्रता जैसे पहलू नज़रंदाज नहीं किए जा सकते।

कांग्रेस ना रह जाए कंगाल?

कांग्रेस ना रह जाए कंगाल?

2010 के आम चुनाव में इन 10 में से छह सीटें बीजेपी को मिली थीं। 3 आरजेडी के खाते में गई थीं। 1 सीट पर जेडीयू को जीत मिली थी। लोकसभा चुनाव में इन 10 में से 4 सीटों पर जेडीयू और आरजेडी को मिले वोटों को जोड़ दिया जाए तो ये बीजेपी से ज्यादा बैठते हैं। बाकी 6 सीटों पर आरजेडी और जेडीयू को मिले वोटों का जोड़ इन सीटों पर बीजेपी को मिले मतों से काफी कम रहा था। कांग्रेस का इस खेल में पूरी तरह डब्बा गेाल रहा था।

मांझी ना फंसें 'भंवर' में

मांझी ना फंसें 'भंवर' में

अगर आरजेडी-जेडीयू-कांग्रेस महागठबंधन का इस चुनाव में वही हाल हुआ जो हाल लोकसभा चुनाव में हुआ था तो जीतन राम मांझी की सरकार खतरे में पड़ सकती है। पहले से ही जेडीयू के कई विधायक पार्टी छोड़ने तो तैयार हो उठते हैं। उपचुनाव की हार जेडीयू में फिर नया भूचाल ला सकती है। ऐसा होने पर भाजपा जेडीयू के बागी विधायकों को साथ लेकर अपनी ताकत आगामी चुनावों में बढ़ा कर प्रोजेक्ट कर सकती है।

बीजेपी का 'सुपर बयान'

बीजेपी का 'सुपर बयान'

इस उपचुनाव में सबसे बड़ा सवाल है कि लोगों ने लालू प्रसाद के साथ नीतीश कुमार के नए गठबंधन को पसंद किया है या नहीं?
भाजपा के विकास के दावों पर बिहार की जनता का क्या रुख है? बीजेपी अपनी हर सभा में प्रोजेक्ट कर रही है कि जनता को स्पष्ट बहुमत से ही फायदा पहुंचता है ना कि गठबंधन सरकार से...

गठबंधन की 'अति'

गठबंधन की 'अति'

उपचुनाव में ज्यादातर सीटों पर भाजपा-लोजपा गठबंधन और राजद-जेडीयू-कांग्रेस गठबंधन के बीच सीधा मुकाबला है। आरजेडी और कांग्रेस के बीच तो कई चुनावों में गठबंधन पहले से ही रहा है पर इस उपचुनाव में जेडीयू भी इनके साथ शामिल हो गया है। एक और बात जो लगभग परदे के पीछे रही है वह यह कि पहली बार तीन वामपंथी दल भी एक साथ मिलकर चुनाव में ताल ठोक रहे हैं। वाम दलों ने नौ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं।

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