• search
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    जानिए आखिर क्यों दिलचस्प है राजस्थान में एक-एक वोट का समीकरण

    |

    नई दिल्ली। पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती राजस्थान को बचाने की है। दरअसल राजस्थान में हुए पिछले कुछ चुनावों पर नजर डालें तो यहां महज कुछ ही फीसदी वोट ही सत्ता परिवर्तन की चाभी साबित होते है, लिहाजा कुछ फीसदी वोटों के गणित को समझ पाना यहां के दोनों मुख्य दल भाजपा और कांग्रेस के लिए आसान नहीं है। यहां हर पांच साल में लगभग सत्ता परिवर्तन होता आया है। ऐसे में भाजपा के लिए सत्ता को बचाना काफी चुनौतीपूर्ण साबित होने वाला है।

    50 फीसदी से अधिक वोट हासिल करना मुश्किल

    50 फीसदी से अधिक वोट हासिल करना मुश्किल

    राजस्थान चुनाव में सत्ता परिवर्तन की बात करें तो सवा फीसदी से पांच फीसदी तक वोटों का इधर-उधर होना ही सत्ता परिवर्तन के लिए काफी है। राजस्थान चुनाव की एक दिलचस्प बात यह भी है कि पिछले 14 विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो सिर्फ दो बार ऐसा हुआ जब प्रदेश के मतदाताओं ने किसी दल को 50 फीसदी से अधिक वोट देकर सत्ता की चाभी सौंपी है। यहां के मतदाताओं को आप कुछ इस तरह से समझ सकते हैं कि 2008 में कांग्रेस उम्मीदवार सीपी जोशी सिर्फ एक वोट से विधानसभा चुनाव हार गए थे और वह मुख्यमंत्री नहीं बन पाए थे। लिहाजा राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा एक-एक वोट पर अपनी पूरी ताकत झोंकने में लगी हैं।

    एक वोट से मिली हार

    एक वोट से मिली हार

    यही नहीं 1993, 2008 के विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर डालें तो यहां चुनाव नतीजें इतनी करीबी थे कि दोनों ही दलों को इसका यकीन कर पाना मुश्किल हो रहा था। 1993 में भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस के मुकाबले 0.33 फीसदी वोट अधिक मिले थे। लेकिन महज 0.33 फीसदी वोटों का यह अंतर 19 सीटों पर भाजपा के उम्मीदवारों की जीत के लिए निर्णायक साबित हुआ और कांग्रेस को सत्ता से बाहर जाना पड़ा।

    करीबी मुकाबले

    करीबी मुकाबले

    वर्ष 2008 के चुनाव परिणाम पर नजर डालें तो कांग्रेस महज 1.26 फीसदी अधिक वोट हासिल करके सत्ता में वापसी करने में सफल हुई थी। महज 1.26 फीसदी अधिक वोट हासिल करके कांग्रेस ने पिछली विधानसभा चुनाव के मुकाबले 40 अतिरिक्त सीटों पर कब्जा किया था। 2008 में कांग्रेस ने कुल 96 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि 2003 में उसके पास सिर्फ 56 सीटें थी। वहीं भाजपा को 2008 के चुनाव में 4.93 फीसदी वोटों का नुकसान हुआ था, लेकिन सीटों की तुलना करें तो उसे 42 सीटों का नुकसान हुआ और पार्टी 120 सीटों सिमटकर 78 पर आ गई। जिस तरह से राजस्थान में इस बार कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं उसके बीच यह देखना काफी दिलचस्प है कि इस बार प्रदेश के मतदाता किसे सत्ता की चाभी सौंपते हैं।

    अधिक राजस्थान समाचारView All

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    English summary
    Here is why every vote counts in Rajasthan BJP and congress both are working hard for it.
    For Daily Alerts

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more