• search
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    तीन साल की श्रेया को है आंख का कैंसर, आपकी छोटी सी मदद से मिल सकती है मासूम को जिंदगी

    |

    उड़ीसा। सुशांथि नायक अकेले ही अपनी बेटी को पाल रही हैं और पूरी दुनिया में उनका उनकी बेटी के अलावा और कोई नहीं है। तीन महीने पहले उन्‍होंने देखा कि उनकी छोटी सी बेटी श्रेया की बाईं आंख में सफेद दाग पड़ रहा था। उस समय तो उन्‍हें इसका कारण पता नहीं चला। 15 दिन पहले सुशांथि अपने काम से घर लौटी थीं और उस समय उनकी बेटी खेल रही थी। वो वहीं रूक गई और अपनी बेटी को देखने लगी। तब उसने नोटिस किया कि उसकी बेटी की आंख का वो दाग बढ़ रहा है। वो तुरंत अपनी बेटी को लेकर स्‍थानीय चिकित्‍सक के पास गईं और उनके कहने पर कोलकाता के एक अस्‍पताल में जांच करवाई। उस समय सुशांथि को पता चला कि उसकी बेटी को 'रेटिनोब्‍लास्‍टोमा' यानि 'आंखों का कैंसर' है।

     श्रेया को है आंख का कैंसर

    श्रेया को है आंख का कैंसर

    सुशांथि ने अपनी ज़िंदगी में बहुत मेहनत की है और वो उड़ीसा के जयपुर जिले के मंगलपुर गांव में रहती है। यहीं उसका बचपन भी बीता है। यहां पर लड़कियों को पढ़ाई और करियर बनाने के लिए बहुत कम अवसर मिलते हैं। हालांकि, सुशांथि ने बहुत मेहनत कर नौकरी हासिल की और अब वो एक प्राइवेट स्‍कूल में टीचर के तौर पर काम कर रही हैं। महीने में वो 15 हज़ार रुपए कमा लेती हैं। कोलकाता में श्रेया के डॉक्‍टर ने कहा कि वो उसका ईलाज नहीं कर सकते हैं और उन्‍हें श्रेया को चेन्‍नई के अपोलो अस्‍पताल ले जाना पड़ेगा। अभी श्रेया की कीमोथेरेपी चल रही है। ट्यूमर को निकालने के लिए उसे चार सेशन लेने पड़ेंगे।

    इलाज के लिए चाहिए 4 लाख रुपए

    इलाज के लिए चाहिए 4 लाख रुपए

    इसका एक साइकल पूरा हो चुका है और शुरुआती ईलाज का खर्च 1 लाख रुपए था लेकिन सुशांथि ने डॉक्‍टर्स से दर्खावस्‍त की कि वो अकेली ही अपनी बेटी को पालती है और उसके पास इतने पैसे नहीं हैं। तब जाकर डॉक्‍टर्स ने ईलाज की कीमत घटाकर 50 हज़ार रुपए की। लेकिन अभी भी उसे बची हुई तीन साइकल में प्रत्‍येक सेशन के लिए 70 हज़ार रुपए भरने हैं। अस्‍पताल में रहने का खर्च, दवाओं और डॉक्‍टर की फीस मिलाकर 4 लाख रुपए का खर्चा है। अपनी बचत और रिश्‍तेदारों से पैसे उधार लेकर सुशांथि ने पहली साइकल के पैसे तो भर दिए लेकिन अब उसे चेन्‍नई से मंगलपुर आने के लिए परिवहन का खर्च सता रहा है। हालांकि, अभी उसकी लड़ाई बहुत लंबी है। श्रेया के ईलाज की सारी ज़िम्‍मेदारी अकेले सुशांथि पर है और वो चाहती है कि उसकी बेटी श्रेया को बचाने में आप भी उसकी मदद करें। आपकी छोटी सी मदद भी उसके इस संघर्ष में बहुत काम आएगी।

    बेबस मां बेटी के लिए परेशान

    बेबस मां बेटी के लिए परेशान

    मेरी बेटी की उम्र सिर्फ तीन साल है और वो मेरे लिए बेटी नहीं बल्कि मेरी पूरी दुनिया है। आज हम दोनों एक साथ बहुत मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं। सुशांथि नायक अकेले ही अपनी बेटी को पाल रही हैं और पूरी दुनिया में उनका उनकी बेटी के अलावा और कोई नहीं है। तीन महीने पहले उन्‍होंने देखा कि उनकी छोटी सी बेटी श्रेया की बाईं आंख में सफेद दाग पड़ रहा था। उस समय तो उन्‍हें इसका कारण पता नहीं चला। 15 दिन पहले सुशांथि अपने काम से घर लौटीं थी और उस समय उनकी बेटी खेल रही थी। वो वहीं रूक गई और अपनी बेटी को देखने लगी। तब उसने नोटिस किया कि उसकी बेटी की आंख का वो दाग बढ़ रहा था। वो तुरंत अपनी बेटी को लेकर स्‍थानीय चिकित्‍सक के पास लेकर गई और उनके कहने पर कोलकाता के एक अस्‍पताल में दिखाया।

     श्रेया को 'रेटिनोब्‍लास्‍टोमा' यानि 'आंखों का कैंसर' है।

    श्रेया को 'रेटिनोब्‍लास्‍टोमा' यानि 'आंखों का कैंसर' है।

    उस समय सुशांथि को पता चला कि उसकी बेटी को 'रेटिनोब्‍लास्‍टोमा' यानि 'आंखों का कैंसर' है। श्रेया के इलाज की सारी जिम्‍मेदारी अकेले सुशांथि पर है। अब वो चाहती है कि उसकी जिंदगी श्रेया को बचाने में आप भी उसकी मदद करें। आपकी छोटी सी मदद भी उसके इस संघर्ष में बहुत काम आएगी।

    अधिक जयपुर समाचारView All

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    English summary
    Help A Single Mother Save Her Only Child Shreya From Eye Cancer, She was diagnosed with Retinoblastoma, or eye cancer.

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more