Heatwave:सिर्फ 15 दिनों में पेट्रोल की बिक्री में लगी आग, डीजल की खपत में भी बढ़ोतरी, जानिए क्यों बढ़ी मांग
नई दिल्ली, 17 मई: मई महीने के पहले 15 दिनों में पेट्रोल की बिक्री में भारी बढ़ोतरी हुई है। वैसे डीजल की खपत भी पिछले महीने के मुकाबले काफी बढ़ी है, लेकिन पेट्रोल की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ी है। इसके पीछे वजह देशभर के ज्यादातर हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी है। पेट्रोल की मांग इसलिए बढ़ी है, क्योंकि लोग अपनी कारों से चलना पसंद कर रहे हैं, ताकि एयर कंडीशन से इस गर्मी का सामना कर सकें। सिर्फ पेट्रोल की बिक्री बढ़ने का आंकड़ा देखें तो अनुमान लग सकता है कि हीट वेव ने किस तरह से कहर ढाना शुरू किया है। डीजल की बिक्री बढ़ने के पीछे भी गर्मी का ही बहुत बड़ा रोल है।

इस महीने पेट्रोल-डीजल की खपत में बढ़ोतरी
पिछले दो वर्षों से कुछ ज्यादा वक्त में देश में पेट्रोल की बिक्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई है। बात हैरान करने वाली है, लेकिन इसके पीछे हीट वेव है, जो राजधानी दिल्ली समेत देश के ज्यादातर हिस्सों में कहर बरपा रही है। लोग लू से बचने के लिए अपनी निजी गाड़ियों का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं और एसी चलाने की वजह से ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल की खपत में 1 मई से 15 मई के बीच 14 फीसदी इजाफा हो गया है। बिक्री में इजाफा डीजल में भी हुआ है, जिसके पीछे आर्थिक गतिविधियों में तेजी, फसलों की समय से पूर्व कटाई और मई के पहले भाग में बिजली की किल्लत वजह बताई जा रही है।

पिछले तीन साल में भी पेट्रोल की सबसे ज्यादा बिक्री
देश की तीनों सबसे बड़ी तेल कंपनियों के आंकड़े देखें तो 2020 के मुकाबले इस अवधि में पेट्रोल की खपत 122% और 2021 की तुलना में 59.7% फीसदी ज्यादा हुई है। लेकिन, अगर कोविड महामारी से पहले यानी मई 2019 के आंकड़ें लें तो भी यह बढ़ोतरी 16.3% है। भारत की तीनों बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम का घरेलू तेल बाजार में 90% हिस्सेदारी है।

डीजल की खपत भी बढ़ी
इसी तरह 2020 के मई के पहले पखवाड़े की तुलना में डीजल की बिक्री 57. 6% और पिछले साल की तुलना में इस महीने 15 तारीख तक 37.8% बढ़ी है। हालांकि, मई 2019 से यह 1.5% ज्यादा है। लेकिन, जेट इंधन के मामले में तस्वीर काफी अलग है। मई 2020 की इस अवधि के हिसाब से तो इसकी बिक्री 492.4% बढ़ी है, क्योंकि तब पूर्ण लॉकडाउन लगा था। जबकि, पिछले साल की तुलना में इसकी बिक्री 83.7% बढ़ी है। लेकिन, कोरोना से पहले वाले साल मई 2019 से तुलना करें तो जेट इंधन की बिक्री इस महीने भी 18.7% कम रही है।

इस महीने इतनी क्यों बढ़ी पेट्रोल की बिक्री ?
तेल की बिक्री की जानकारी रखने वाले रिफाइनरी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक इस साल 1 मई से 15 मई के बीच तीनों तेल कंपनियों ने लगभग 13 लाख टन पेट्रोल बेचे हैं और यह इसी साल के अप्रैल महीने की इसी अवधि के मुकाबले 14% अधिक है और इसका मूल कारण जानलेवा गर्मी को मात देने के लिए निजी कारों में एसी का इस्तेमाल बढ़ना है। देश में हीट वेव की वजह से बिजली संकट भी खड़ी हुई है और फसलों को भी नुकसान हो रहा है और कई जगहों पर तापमान 49 डिग्री तक पहुंचने की वजह से लाखों लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी झेलनी पड़ रही हैं। देश के बड़े शहरों में भी अभी तक एसी की सुविधा वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे लोग निजी वाहनों का ज्यादा इस्तेमाल करने को मजबूर हुए हैं।

एलपीजी की खपत में आई भारी कमी
लेकिन, हैरानी की बात है कि मई के पहले पखवाड़े में इस साल एलपीजी की खपत अप्रत्याशित रूप से कम हो गई है। 2021 के मुकाबले इसमें 5.4% की कमी देखी गई है तो 2020 के संपूर्ण लॉकडाउन के मुकाबले इसमें 11.9% कमी दर्ज की गई है। शायद इसकी वजह ये हो सकती है कि उस दौरान लोग घरों में ही रहने को मजबूर थे और इसका इस्तेमाल ज्यादा कर रहे थे। वैसे इसके पीछे एक अनुमानित कारण हाल में घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतों में इजाफा और अत्यधिक गर्मी भी बताई जा रही है। लेकिन, मई 2019 से तुलना करें तो अभी भी इसकी बिक्री 11.9% अधिक है। यानी पहले वाले कारण (लॉकडाउन) में ज्यादा दम लग रहा है।












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