Corona नहीं 2020 में इस बीमारी से हुई दुनिया में सबसे ज्यादा मौतें
नई दिल्ली। heart disease top killer even in 2020: नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कोरोना वायरस (coronavirus) के कारण अब तक 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। सटीक डेटा की कमी के कारण यह अभी भी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि कोरोना वायरस कितना घातक है?, लेकिन 2020 में कोरोना से दुनिया में सबसे अधिक मौतें नहीं हुई हैं। साल भर में हृदय संबंधी समस्याएं(cardiovascular issues) और श्वसन संबंधी(respiratory issues) समस्याएं के चलते कोरोना से अधिक मौतें होती हैं।

पिछले 20 वर्षों से हृदय रोग मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, 2020 में हार्ट स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग और दिल से संबधित कई बीमारियों के कारण कोरोना से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट,मुंबई के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ रमाकांत पांडा ने बताया कि, वैश्विक स्तर पर पिछले 20 वर्षों से हृदय रोग मृत्यु का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। हालाँकि, यह अब पहले से कहीं अधिक लोगों को मार रहा है। दिल की बीमारी से मरने वालों की संख्या 2000 के बाद से 2 मिलियन से अधिक हो गई है।

2019 में हार्ट संबंधित बीमारियों से 90 लाख लोगों की मौत हुईं
डॉक्टर ने बताया कि, 2019 में हार्ट संबंधित बीमारियों से 90 लाख लोगों की मौत हुईं है। दुनियाभर में कुल होने वाली मौतों में 19 फीसदी मौतें केवल दिल से संबंधित बीमारियों की वजह से होती हैं। इन मौतों का मुख्य कारण प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, खराब पोषण, खराब जीवन शैली और बढ़ता तनाव हैं। 2020 के कोरोना काल में भी हार्ट डिजीज सबसे बड़ा किलर बना हुआ है। व्यायाम की कमी, खराब फाइबर की कमी, उच्च कार्बोहाइड्रेट आहार, नियमित रूप से अपने स्वास्थ्य मापदंडों को नजरअंदाज करना, मिठाई और शराब सेवन जैसे कारणों के चलते भारतीयों को दिल की बीमारी होने का सबसे अधिक खतरा है। कोरोनाकाल में यह खतरा और बढ़ जाता है।

कोरोना इसलिए दिल के लिए घातक
दिल की समस्याओं वाले लोगों को चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है, लेकिन कोरोना काल में लोग टेस्ट के डर से डॉक्टरों के पास जाने से डर रहे हैं। जिसके चलते उनकी समय पर देखरेख नहीं हो पा रही है। हार्ट संबंधी बीमारी कोरोना वायरस की कई डिजीज से जुड़ी हुई है। फेफड़े और हृदय की कोशिकाएं दोनों प्रोटीन अणुओं से ढकी होती हैं जिन्हें ACE-2 प्रोटीन कहा जाता है। कोरोना वायरस इसी प्रोटीन के जरिए कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं और खुद का विस्तार करने में उपयोग करते हैं। ACE-2 आम तौर पर सूजनरोधी ऊतकों की रक्षा करने में एक अनुकूल भूमिका निभाता है।

हृदय ओवरवर्क से विफल हो सकता है
डॉक्टर ने बताया कि,अगर कोरोनो वायरस किसी तरह से उन अणुओं को निष्क्रिय कर देते हैं, तो ये कोशिकाएं असुरक्षित रह सकती हैं जब प्रतिरक्षा प्रणाली एक्शन में आ जाती है। कोरोना वायरस फेफड़ों में हवा की थैलियों को नुकसान पहुंचाता है। इसलिए कम ऑक्सीजन रक्तप्रवाह तक पहुंचता है। हृदय को शरीर के माध्यम से रक्त पंप करने के लिए अधिक परिश्रम करना पड़ता है, जो पहले से मौजूद हृदय रोग वाले लोगों में खतरनाक हो सकता है। हृदय ओवरवर्क से विफल हो सकता है।

बदलनी होगी अपनी दिनचर्या
कोरोनो वायरस हृदय की मांसपेशियों के ऊतकों को सीधे संक्रमित और नुकसान पहुंचा सकता है। जैसा कि फ्लू के कुछ उपभेदों सहित अन्य वायरल संक्रमणों से संभव है। इससे दिल भी क्षतिग्रस्त हो सकता है। शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया से अप्रत्यक्ष रूप से सूजन हो सकती है। कोरोना काल में डॉक्टर हार्ट पेशेंट को अपनी दिनचर्या बदलने, व्यायम, और आहर संबंधी गतिविधियों में बदलाव की सलाह देते हैं।
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