वैक्सीन की कमी से आखिर क्यों जूझ रहा भारत, विशेषज्ञों ने गिनाए कई कारण, जानें
भारत इस समय कोरोना वायरस वैक्सीन की कमी से जूझ रहा है। आखिर भारत में ऐसी नौबत क्यों आई। आईए जानते हैं विशेषज्ञों से...
नई दिल्ली, 10 मई। कोवैक्स कार्यक्रम के लिए भारत की प्रतिबद्धता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया भर में वाहवाही दिलाई। विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) के प्रमुख टेड्रोस घेब्रेयसस से लेकर क्रिकेट स्टार क्रिस गेल ने भी दुनियाभर में चल रहे टीकाकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए भारत की प्रशंसा की। ब्राजील के प्रधानमंत्री ने तो पीएम मोदी की तुलना हनुमान जी से कर दी जो उनके देशवासियों की जिंदगी बचाने के लिए वैक्सीन भेज रहे हैं। लेकिन अब भारत ने वैक्सीन का निर्यात बंद कर दिया है क्योंकि भारत खुद वैक्सीन कमी से जूझ रहा है। आखिर भारत में ऐसी नौबत क्यों आई आईए जानें..

अप्रैल में तेजी से बढ़े कोरोना के मामले
जैसे ही भारत में अप्रैल में कोरोना के मामलों में तेजी से वृद्धि हुई और वहां भारी मात्रा में वैक्सीन की जरूरत पड़ी तो इससे कोवैक्स कार्यक्रम बुरी तरह प्रभावित हुआ। अब शायद अफ्रीकी संघ का 2021 के अंत तक अपनी आबादी का 30-35 प्रतिशत टीकाकरण करने का लक्ष्य पूरा न हो सके। अब भारत ने कोरोना वायरस वैक्सीन का निर्यात बंद कर दिया है क्योंकि फिलहाल घरेलू जरूरत ही पूरी नहीं हो पा रही है। हालांकि अब विशेषज्ञ इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वैक्सीन की घरेलू जरूरत को पूरा करने के साथ-साथ इसके निर्यात को बनाए रखने के लिए और अधिक योजना बनाई जानी चाहिए।

क्यों पड़ी देश में वैक्सीन की कमी
वायरस-विज्ञानी शाहिद जमील ने कहा कि वैक्सीन की अग्रिम खरीद के लिए वैक्सीन निर्माताओं के साथ पहले से कोई अनुबंध नहीं हुआ और वैक्सीन के उत्पादन को बढ़ाने के लिए वैक्सीन निर्माताओं को द्रव्य नहीं दिया गया, जिसकी वजह से वैक्सीन की कमी को बढ़ावा मिला। उनहोंने कहा कि वैक्सीन की घरेलू जरूरत को पूरा करने के साथ-साथ इसके निर्यात को बनाये रखने के लिए विचार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि दिसंबर 2020 तक सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने घरेल उपयोग के लिए रियायती दर पर 10 करोड़ डोज देने की पेशकश की थी, लेकिन सरकार टीकों का ऑर्डर देने में असफल रही, जबकि सरकार ने जुलाई 2021 तक देश की 30 करोड़ की आबादी को टीका लगाने का लक्ष्य रखा था।
सरकार द्वारा वैक्सीन का ऑर्डर न दिए जाने के कारण सीरम ने वैक्सीन का उत्पादन कम कर दिया। इससे पहले सीरम नें मार्च 2021 तक 10 करोड़ वैक्सीन उत्पादन का लक्ष्य रखा था। एक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने बताया कि देश की 30 करोड़ आबादी को वैक्सीन लगाने के लिए लगभग 65 करोड़ वैक्सीन की जरूरत होगी। 15 करोड़ वैक्सीन भारत वायोटेक से आ रही है और जिस गति से सीरम प्रति माह वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है उसे देखते हुए वैक्सीन के निर्यात का सवाल ही नहीं उठता।
मार्च तक भारत सरकार ने अपने लोगों का कम वैक्सीनेशन किया जबकि विदेश में ज्यादा वैक्सीन भेजी। आंकड़ों के अनुसार जनवरी के पहले, दूसरे हफ्ते से लेकर जनवरी के अंत तक भारत ने 39 लाख फ्रंटलाइन वर्करों का टीकाकरण किया और 1.6 करोड़ वैक्सीन बाहर भेजी। जबकि 1 अप्रैल तक जब भारत में 45 साल के ऊपर के सभी नागरिकों का टीकाकरण चल रहा था उस समय तक भारत 6.5 करोड़ वैक्सीन बाहर भेज चुका था।

जुलाई तक 30 करोड़ लोगों को लगनी थी वैक्सीन
भारत ने जुलाई 2021 तक जितने लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा था उनमें से अभी तक केवल 25 प्रतिशत लोगों को ही टीका लग सका है और अब केवल 2 महीनों से भी कम का समय बचा है। लक्ष्य के हिसाब से अप्रैल के पहले सप्ताह से प्रतिदिन 35 लाख लोगों को कम वैक्सीन लगी, जबकि अप्रैल के दूसरे माह से यह संख्या 21 हो गई। मई की बात करें तो लक्ष्य के हिसाब से 16 लाख कम लोगों को वैक्सीन लग रही है।
वैक्सीन के स्टॉक के निर्माण में समय लगेगा। हालांकि कोवैक्सिन ने अपना उत्पादन बढ़ा दिया है। अप्रैल में उसने दो करोड़ वैक्सीन की खुराक का उत्पादन किया। कंपनी की जून तक 3.5 करोड़ वैक्सीन के उत्पादन की योजना है। वहीं कोविशील्ड को जुलाई तक हर महीने 10 करोड़ शॉट्स का उत्पादन करने की उम्मीद है। हालांकि रुस की सिंगल डोज वैक्सीन की एक खेप भारत पहुंच चुकी है, लेकिन यह जून तक उपयोग के लिए उपस्थित नहीं हो पाएगी।












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