प्रशांत किशोर ने मेघालय में कांग्रेस के खिलाफ कर दिया 'खेला' ? जानिए पार्टी के सफाए में उनका रोल
शिलॉन्ग, 25 नवंबर: मेघालय में कांग्रेस के अधिकतर विधायक टीएमसी की ओर पलायन कर गए हैं। मेघालय विधानसभा में कांग्रेस के विधायक दल के नेता मुकुल संगमा ने 11 विधायकों के साथ पार्टी छोड़ने का जो कारण बताया है, वह कांग्रेस की अंदरूनी स्थिति के बारे में कुछ नया तो नहीं बता रहा है, लेकिन इस बात की ओर इशारा जरूर कर रहा है कि ममता बनर्जी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ही सोनिया और राहुल गांधी की अगुवाई वाली कांग्रेस के खिलाफ वहां 'खेला' करवा दिया है। मेघालय में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के साथ 2023 में चुनाव होने हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस वहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन अब उसमें मुख्य विपक्षी पार्टी बने रहने लायक हैसियत भी नहीं रह गई है।

मेघालय कांग्रेस में हो गया 'खेला'
कयासों के मुताबिक ही मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा कांग्रेस के 17 विधायकों में से अपने साथ 11 और एमएलए को लेकर पार्टी से निकल गए हैं। उनके मुताबिक राज्य में कांग्रेस सही ढंग से विपक्ष की भूमिका भी नहीं निभा पा रही थी और जब इन 12 विधायकों ने टीएमसी में शामिल होने का ऐलान कर दिया है तो यही पार्टी वहां मुख्य विपक्षी पार्टी भी बन जाएगी। वे पिछले कुछ महीने से अपनी पार्टी के सहयोगी विंसेंट पाला को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने से नाखुश चल रहे थे। उसके बाद वे कोलकाता भी गए थे और वहां पर तृणमूल के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर से मुलाकात कर आए थे, जिसे तब शिष्टाचार भेंट बताया गया था।

प्रशांत किशोर बदलाव ला सकते हैं- संगमा
गुरुवार को मेघालय की राजनीति में घटनाक्रम ने जो नया मोड़ लिया है, उसे मुकुल संगमा की पीके से हुई उस मुलाकात से जोड़कर नहीं देखने का कोई कारण नहीं है। मेघालय विधानसभा चुनाव 2023 के लिए टीएमसी की रणनीति तैयार करने के लिए उनकी एक टीम पहले से ही शिलॉन्ग में मौजूद है। संगमा ने कांग्रेस छोड़ने पर कहा है, 'लोकतंत्र में संतुलन होना जरूरी है। हमें एक प्रभावी विपक्ष की आवश्यकता है। हमने दिल्ली में नेतृत्व के सामने इसे उठाया। हम दिल्ली का कई चक्कर काटकर आ गए, लेकिन कुछ भी नहीं हुआ......विपक्ष के लिए विकल्प की तलाश करते हुए मेरी मेरे अच्छे मित्र प्रशांत किशोर जी से मुलाकात हुई, जिनको हम सब जानते हैं, जो बदलाव ला सकते हैं। मुझे यह खुलासा करते हुए खुशी हो रही है कि जब हम मिले, हमने इस बात पर चर्चा की- जनता का हित सर्वोपरि है।'

'कांग्रेस में रहकर जनता के प्रति जिम्मेदारी नहीं निभा सकते'
इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की खामियां उजाकर करनी शुरू की- 'इंडियन नेशनल कांग्रेस में रहते हुए क्या सच में हम जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। लेकिन, हमें दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि सभी कोशिशों के बावजूद यह छलावा लगता है। हमारे पास ऐसा मानने का कारण है कि विपक्ष के तौर पर हम अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम हो रहे हैं।' ममता बनर्जी की पार्टी ने दूसरे दिन लगातार कांग्रेस को इतना बड़ा झटका दिया है। एक दिन पहले ही बिहार से उसके नेता कीर्ति आजाद, हरियाणा के अशोक तंवर और पवन वर्मा जैसे नेताओं को टीएमसी में शामिल करवाया है।

मेघालय में टीएमसी की बढ़ी ताकत
2018 के मेघालय विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 21 सीटें जीतकर वहां सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन वह सरकार नहीं बना सकी थी। अब पार्टी के पास वहां सिर्फ 5 विधायक बच गए हैं। मेघालय तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 2012 में ही हो चुकी थी और तब उसने 35 सीटों पर लड़ने की बात कही थी, लेकिन 2013 में वह चुनावों से दूर ही रही थी। हालांकि, 2018 के विधानसभा चुनावों में उसने 8 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन सभी पर उसकी जमानतें जब्त हो गई थी।












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