हरियाणा: रोहतक के तितोली में मुस्लिमों के नमाज पढ़ने पर रोक, हिंदुओं का इनकार

एक महीने पहले रोहतक के तितोली गांव से दो मुस्लिम युवकों को बछड़ा मारने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था.
अब तितोली गांव में रहने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों का आरोप है कि ग्राम पंचायत की तरफ़ से उन पर कई तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं.
गांव में मुस्लिम समुदाय के अगुवा राजबीर खोखर ने बीबीसी को बताया, "गांव के मुस्लिमों से कहा गया है कि वे गांव के बाहर जाकर या फिर रोहतक जाकर नमाज़ अदा करें. अभियुक्त यमीन खोखर का तो गांव में आजीवन प्रवेश ही वर्जित कर दिया गया है, भले ही उसे कोर्ट ने दोषी ठहराया हो या नहीं."
राजबीर खोक्खर का कहना है कि मुस्लिम समुदाय को ग्राम पंचायत का आदेश स्वीकार करना ही होगा क्योंकि वे गांव में शांति के साथ रहना चाहते हैं.
वो आगे कहते हैं, "ये तो समय ही बताएगा कि इस तरह के प्रतिबंधों का क्या परिणाम होगा लेकिन फ़िलहाल तो हम इस प्रतिबंध का विरोध करने से भी डर रहे हैं क्योंकि हम सिर्फ़ शांति चाहते हैं."
राजबीर बताते हैं कि पंचायत ने जो फ़रमान जारी किया है वो कहीं भी लिखित तौर पर नहीं है, पंचायत ने सिर्फ़ आदेश सुनाया है.
"ऐसे ज़्यादातर फ़रमान तो ज़ुबानी ही सुना दिए जाते हैं और जो लोग उस दौरान मौजूद नहीं होते हैं, गांव का चौकीदार उन्हें इसके बारे में बता देता है."
इस तरह का कोई बैन नहीं है
गांव में ही रहने वाले एक हिंदू शख़्स ग्राम पंचायत की ओर से कहते हैं कि पंचायत ने तो इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है.
वहीं दूसरी ओर हिंदू जाट सुरेश कुमार भी मुस्लिम समुदाय के लगाए गए इन आरोपों का खंडन करते हैं. वो कहते हैं "गांव की पंचायत ने न तो नमाज़ पढ़ने पर रोक लगाई है, न दाढ़ी रखने पर और न ही टोपी पहनने पर. पंचायत में सिर्फ़ एक बात पर फ़ैसला हुआ और वो ये कि गांव के कब्रिस्तान को दूसरी जगह शिफ़्ट कर दिया जाए."
सुरेश कुमार तितोली गांव की सरपंच प्रमिला देवी के रिश्तेदार हैं. लेकिन क्या पुलिस को इस सारे मामले के बारे में जानकारी है?
तितोली पुलिस स्टेशन के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर नाफ़े सिंह इस तरह के किसी भी पंचायती फ़ैसले की जानकारी होने से इनक़ार करते हैं. पुलिस के अनुसार, मंगलवार को कुछ लोग गांव के कब्रिस्तान को दूसरी जगह शिफ़्ट कराने के लिए जमा हुए थे क्योंकि फ़िलहाल कब्रिस्तान उस इलाक़े में है जहां लोग रहते हैं. वो कहते हैं कि जिस दौरान ये मीटिंग हो रही थी उस दौरान बहुत से मुसलमान भी वहां मौजूद थे.
तनाव तो अब भी है, अभियुक्त की पत्नी और बच्चे अभी भी नहीं लौटे हैं
इसी साल 22 अगस्त को एक मरा हुआ बछड़ा मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने यामीन और शौकीन नाम के दो मुस्लिम युवकों को उसे मारने के आरोप में उनके घर के पास से गिरफ़्तार कर लिया था. गुस्साए गांव वालों का आरोप था कि यामीन ने जानबूझकर बछड़े को मारा. जबकि यामीन और शौकीन इन आरोपों का खंडन करते आए हैं.
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इस मामले के बाद गांव में बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती कर दी गई थी ताकि माहौल न बिगड़े. यामीन और शौकीन पर गौ-हत्या का आरोप है. इन सारे तनाव के बीच यामीन की पत्नी, उनके भाई और बच्चे गांव छोड़कर जा चुके हैं और अभी तक नहीं लौटे हैं. एक महीना हो चुका है फिर भी यामीन के घर पर ताला लटका हुआ है.
गांव में रहने वाले मुस्लिमों में डर का माहौल है. उनमें से ज़्यादातर लोग या तो कैमरे पर आने से डरते हैं या फिर शर्माते हैं.
गांव के तालाब के पास दूसरे समुदाय के लोगों के साथ बैठकर ताश खेल रह सत्तर साल के मुस्लिम मीर सिंह खोखर कहते हैं कि उस दिन पंचायत में शुरुआती तौर पर चार फ़ैसले लिए गए थे.
वो कहते हैं, "यामीन जोकि बछड़ा मारने का मुख्य अभियुक्त है, उसे फ़ैसला सुनाया गया कि वो कभी भी गांव में दाख़िल नहीं होगा. अगर मुस्लिम लोगों को नमाज़ पढ़नी है तो वे रोहतक जा सकते हैं या फिर कहीं और लेकिन गांव के भीतर नहीं. मुस्लिम समुदाय के लिए बने कब्रिस्तान को अभी की जगह से एक किलोमीटर आगे शिफ़्ट करने का फ़ैसला सुनाया गया. इसके अलावा मौजूदा कब्रिस्तान में बछड़े की याद में एक स्मृति-स्थल बनाने का आदेश दिया गया."
गांव में ज़्यादातर हिंदू जाट हैं लेकिन वे सभी इस बात से इनकार करते हैं कि पंचायत ने मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ ऐसा कोई आदेश सुनाया.
उस दिन पंचायत में मौजूद रहने वाले दीपक कुमार का कहना है कि कब्रिस्तान को दूसरी जगह शिफ़्ट करने का फ़ैसला भी मुसलमानों को संज्ञान में लेकर ही लिया गया. वो आगे कहते हैं कि हमें कोई ज़रूरत नहीं है कि हम उनके नमाज़ अदा करने पर कोई प्रतिबंध लगाएं या फिर उनकी बढ़ी हुई दाढ़ी के लिए कुछ कहें. इस गांव में मुस्लिम पुश्तों से अपनी तरह से रह रहे हैं.
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